यूपी बीमार, सीएम साहब, जौनपुर में एसपी की भी नहीं सुनते थानेदार!

जौनपुर/लखनऊ. दारोगा और थानेदार यदि सीओ और कप्तान की भी न सुने, तो आप समझ सकते हैं कि अपराध और वसूली की स्थिति क्या होगी। ऐसा ही हाल कुछ हमारे उत्तर प्रदेश में जौनपुर का है। यहां पर पैसे के दमपर आप गलत या सही कोई भी काम करवा सकते हैं, लेकिन सही काम के लिए एसपी की भी सिफारिश सुनी जाएगी इसकी संभावना कम ही है।

मामला जौनपुर के बरसठी थानाक्षेत्र के बारीगांव का है। यहां मनिराम यादव किराना की दुकान चलाते हैं। उनके गांव के ही दूसरे पक्ष ने 15 वर्ष पहले हुए समझौते और फैसले को दरकिनार कर विवाद करने की नीयत से उनकी दुकान में ताला डाल दिया। जिससे कोरोना संक्रमण के दौरान वह परेशान हों। खुद अपनी ही दुकान का ताला खुलवाने के लिए मनिराम को थानेदार के यहां दो दिन तक चक्कर लगाना पड़ा। ताला बंद रहा और ताला लगाने वाले पकड़े नहीं गए। 2 दिनतक केस न दर्ज करने वाली पुलिस अचानक एक महिला के भी दुकान में ताला लगाने के बाद दुकान के मालिक मनिराम को ही हवालात में बंद कर देती है। जबकि तालाबंद करने वाले मस्ती में घूम रहे हैं।

बताया जा रहा है कि मनिराम यादव को रातभर हवालात में बंद रखा गया, जबकि जिन लोगों ने पहले ताला लगाकर विवाद पैदा किया, उन्हें पुलिस ने पकड़ा ही नहीं। पीड़ित को ही थाने में रातभर बैठाए रखी। मामले की पैरवी कुछ पुलिस अधीक्षक और सीओ रैंक के अधिकारी भी करते रहे, लेकिन थानेदार ने किसी की बात नहीं मानी और पीड़ित को कोर्ट से जमानत करवानी पड़ी। जबकि बताया जा रहा है कि जिन लोगों के खिलाफ तहरीर देने के लिए मनिराम 2 दिन तक थानेदार के चक्कर लगाते रहे उन्हें आज तक पकड़ा ही नहीं गया। तालाबंद करने वाले गांव में घूम रहे हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि थानेदार साहब किसी की नहीं सुनते हैं। उन्हें केवल मोदी साहब वाली लाल-लाल नई नोटें चाहिए। आपका काम हो जाएगा। कप्तान साहब भी उनके आगे फेल हैं। इसकी चर्चा जोरों पर है कि बरसठी का थानेदार जो शिकायत लेकर जाता है, उसे बंद कर आरोपियों से पैसा ले लेता है। पुलिस की कार्यप्रणाली ने उत्तर प्रदेश को बीमार कर दिया है।

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