बांगरमऊ जातीय समीकरणः विधानसभा सीट पर क्या हैं कास्ट फैक्टर, सपा ढेर, BJP ने रचा इतिहास

ग्राउंड रिपोर्टः अखिलेश कृष्ण मोहन

बांगरमऊ/उन्नाव: उत्तर प्रदेश में हाल ही में सात सीटों पर उपचुनाव हुए हैं। इसमें से बांगरमऊ भी एक ऐसी सीट थी जहां पर उपचुनाव में भाजपा ने कांग्रेस को भारी मतों से हराया। यह सीट तो कुलदीप सिंह सेंगर के सजायाफता होने से खाली हुई थी, लेकिन भाजपा पर इसका कोई असर नहीं पड़ा। कुलदीप सिंह सेंगर के बाद भी भाजपा ने यहां भारी जीत दर्ज की।

भाजपा के श्रीकांत कटियार को 31398 वोटों से जीत मिली है। श्रीकांत को 71381 और कांग्रेस की आरती बाजपेई को 39983 वोट मिले हैं। सपा उम्मीदवार सुरेश पाल को 35322 वोटों से तीसरे स्थान पर संतोष करना पड़ा। वहीं बसपा प्रत्याशी महेश पाल की जमानत जब्त हो गई। उन्हे मात्र 19062 वोट ही मिले।

हवा में उड़ गए सपा के कई युवा कमांडर

बांगरमऊ में समाजवादी पार्टी तीसरे नंबर पर चली गई, जबकि यहां पर अखिलेश यादव के करीबी कहे जाने वाले कई युवा नेता कमान संभाल रहे थे। सपा एमएलसी सुनील सिंह साजन अखिलेश यादव के काफी करीबी कहे जाते हैं। वह यहां पर मुख्य भूमिका में थे। क्योंकि वह कोई भी रिपोर्ट अखिलेश यादव तक तत्काल पहुंचा सकते थे। इसके साथ ही मुलायम सिंह यादव युथ ब्रिगेड के प्रदेश अध्यक्ष कहे जाने वाले अनीस राजा भी अहम भूमिका में दिखाई दिए। अन्य युवा नेता भी यहां पर जमीनी संघर्ष करते हुए नहीं दिखाई दिए। कहा तो यह भी जाता है कि यहां पर नेता पिकनिक मनाने जैसे अंदाज में आते थे और अदरक की गर्म चाय का आनंद लेकर 2022 में 351 सीट पर सपा को जिताने की पूरी चर्चा करते थे। इसके अलावा किसी को भी सीट पर कोर वोटर को सहेजने की चिंता नहीं थी।

मुस्लिम वोट बैंक नाराज

मुस्लिम वोटबैंक को नजर अंदाज करना भी सपा को भारी पड़ गया। बसपा से सपा में आए इंद्रजीत सरोज अपने खास आदमी सुरेश पाल को टिकट तो दिलवा ले गए, लेकिन चुनाव जितवाने के लिए कोई कोशिश नहीं की। सूत्रों की माने तो यह भी कहा जाता है कि इंद्रजीत सरोज का ही 99 फीसदी हाथ था कि सुरेश पाल को बांगरमऊ से सपा का टिकट मिला। इसके बदले में सुरेश पाल और इंद्रजीत सरोज के बीच क्या लेनदेन हुई इसकी सही बात बताने को कोई तैयार नहीं है, लेकिन लेनदेन हुई है, यह आशंका हर किसी को है।

जफरयाब जिलानी भी फेल

सपा के कद्दावर नेता अनवार अहमद 1994 से लगातार करीब 28 साल तक सपा के जिला अध्यक्ष रहे। अनवार सपा के पूर्व सांसद और विधायक और राज्य सरकार में मंत्री भी रहे। उनके निधन के बाद यहां पर यहां पर धर्मेंद्र यादव को जिला अध्यक्ष बना दिया गया। धर्मेंद्र यादव की जमीनी पकड़ कमजोर होने का खामियाजा भी सपा को भुगतना पड़ा। यहां पर मुस्लिमों को समझाने की जिम्मेदारी अखिलेश यादव ने आखिरी में जफरयाब जिलानी को सौंपी, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। जफरयाब जिलानी भी फेल रहे और समाजवादी पार्टी का पूरा मुस्लिम वोट बैंक कांग्रेस और बसपा में शिफ्ट कर गया।

बदलू खां को टिकट न देना महंगा पड़ गया

स्थानीय लोग यह भी बताते हैं कि वर्ष 2012 से 2017 तक सपा से विधायक रहे बदलू खां को टिकट न देना सपा नेतृत्व का अदूरदर्शी फैसला था। 2017 में जब सपा और बसपा दोनों ने मुस्लिम प्रत्याशी उतारे थे तो सपा के बदलू खां को 60 हजार वोट मिले थे। ऐसे में इस बार यदि सपा का केवल एक मुस्लिम प्रत्याशी होता, तो वह जीत सकता था, लेकिन अखिलेश यादव ने इंद्रजीत सरोज के कहने पर यह अवसर गंवा दिया।

2002 के बाद पहली बार 2017 में भाजपा जीती और अब दोबारा भाजपा ने सीट हथियाई।

 

सपा से मजबूत तो कांग्रेस हो गई

बांगरमऊ के इस उपचुनाव ने कांग्रेस को यह संकेत दे दिए कि वह यहां पर पहले से कई गुणा मजबूत हुई है। सपा और बसपा की कमजोरी का फायदा उठाने में यहां की कांग्रेस प्रत्याशी आरती बाजपेई कामयाब रही हैं। कांग्रेस की आरती बाजपेई को 39983 वोट मिले हैं।

उपचुनाव बांगरमऊ सीट पर ये प्रत्याशी रहे मैदान में

1- आरती बाजपेयी – कांग्रेस
2- श्रीकांत कटियार- भाजपा
3- सुरेश कुमार पाल- सपा
4- महेश कुमार पाल- बसपा
5- उमर खॉ – नागरिक एकता पार्टी
6- रामकरण – भारतीय वंचित पार्टी
7- रामप्रकाश – राष्ट्रीय शोषित समाज पार्टी
8- आशुतोष पांडेय – मेरा अधिकार राष्ट्रीय दल
9- महेंद्र कुमार – निर्दल
10- मोहम्मद सब्बन – निर्दल

आइए देखते हैं क्या है बांगरमऊ विधानसभा सीट पर जातीय समीकरण

1. मुस्लिम वोटर – 75 हजार से 80 हजार

2. अनुसूचित जाति वोटर – 80- 90 हजार

3. यादव वोटर – 30 से 35 हजार

4. पाल समाज वोटर – 30 हजार से 35 हजार

5. कुर्मी समाज वोटर – 8 हजार से 10 हजार

6. लोथी वोटर – 20 से 25 हजार

7. कश्यप, निषाद, मल्लाह वोटर – 35 से 40 हजार

8. अन्य ओबीसी वोटर – 25 से 30 हजार

9. छत्रिय वोटर – 12 हजार से 15 हजार

10. कुशवाहा वोटर – 8 हजार से 10 हजार

11. ब्राह्मण वोटर – 10 हजार से 15 हजार

12. चौरसिया वोटर – 8 हजार से 10 हजार

13. वैश्य वोटर – 3 हजार से 5 हजार

• कुल वोटर लगभग 3 लाख 40 हजार / मतदान हुआ 50.84 फीसदी

Check Also

हाईकोर्टः प्राथमिक शिक्षकों के अंतर्जनपदीय तबादलों की बड़ी खबर, लेकिन कुछ नियम हैं अहम

इलाहाबाद. हाईकोर्ट के एक फैसले से यूपी सरकार को भी बड़ी राहत मिली है। अब ...