सीएम योगी की पारदर्शी प्रणाली को ओमनीनेट का ठेंगा, हर विभाग में हो रहा टेंडर मैनेज का खेल

लखनऊ. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भ्रष्टाचार मुक्त और पारदर्शी टेंडर प्रणाली को साफ्टवेयर कंपनी ओमनीनेट टेक्नोलॉजीस ने ठेंगा दिखाना शुरू कर दिया है। इसकी चर्चा अब मीडिया में भी होने लगी है कि ओमनीनेट को ही सभी विभागों में टेंडर क्यों मैनेज करवाए जा रहे हैं ? हालात तो यहां तक हो गए हैं कि सेवा योजन विभाग में केवल ओमनीनेट को काम देने के लिए विभाग के निदेशक कुणाल सिल्कू ने सारे कायदे कानून ताक पर रखकर केवल यूपीईएलसी को ही टेंडर दिया, जिससे केवल ओमनीनेट को ही काम दिया जा सके।

टेंडर मामलों के जानकार रविशंकर बताते हैं कि अपने सहयोगी कंपनियों से ओमनीनेट विभागों में टेंडर डलवा देती है। यूपीडेस्को, सिट्रॉन, अपट्रॉन और यूपीईलसी को टेंडर दिया जाता है। हालांकि विभाग में अधिकारी सभी के रेट बता देते हैं या टेंडर डालने वाला ओमनीनेट से अधिक रेट पर टेंडर डालकर खुद अलग हो जाता है, ओमनीनेट लोवेस्ट बिडर होकर एल वन हो जाती है। इसके बाद पूरा टेंडर ओमनीनेट का हो जाता है। ओमनीनेट यह खेल पिछले कई साल से लखनऊ में खेल रही है।

अखिलेश यादव सरकार में भी ओमनीनेट का जलवा था। कर्मचारियों और अधिकारियों से मिलीभगत कर इस कंपनी ने कई करोड़ के काम किए। बताया जाता है कि जो काम 10 लाख का होता था, वही काम ओमनीनेट टेंडर मैनेज कर करोड़ों रुपए में करती थी। टेंडर मैनेज करने में माहिर ओमनीनेट ने ही अभी हाल ही में समाज कल्याण विभाग की वेबसाइट का काम किया है। केवल वेबसाइट का रंग बदलकर और कुछ चेंचिंग कर कई लाख रुपए का पूरा पेमेंट समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से ले लिया गया। जबकि वेबसाइट बिलकुल पहले की तरह ही है।

अब सवाल ये उठता है कि ओमनीनेट को ही क्यों मिल रहे हैं सभी विभागों के साफ्टवेयर और वेबसाइट समेत अन्य टेंडर। इसे समझने के लिए जब एक विभाग के अधिकारी से संपर्क किया गया तो नाम न छापने की गुजरिश करते हुए वह बोला कि मैं कुछ नहीं पाता हूं। जब बड़े अधिकारी साहब मेहरबान है, तो हमें तो काम करना ही पड़ेगा। लगभग सभी विभागों में ओमनीनेट ने जाल बिछा दिया है। चाहे 2 लाख का काम हो या 2 करोड़ का छोटी कंपनियां देखती रह जाती हैं, सभी काम ओमनीनेट को दिए जा रहे हैं।

ओमनीनेट की कार्यप्रणाली से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भष्ट्राचार रोकने की मुहिम को धक्का लगा है। ओमनीनेट के नेटवर्क और उसे टेंडर दिलाने के खेल का जिस दिन खुलासा होगा, उस दिन अरविंद सेन की तरह कई लोग जेल में होंगे। इस कंपनी के भी कई लोग टेंडर मैनेज करवाने के खेल में अधिकारियों को शामिल करते रहे हैं।

क्या कहती हैं ओमनीनेट कंपनी

फर्क इंडिया ने ओमनीनेट कंपनी को तेजी से आगे बढ़ने के लिए जब फोन किया तो उधर से जवाब मिला की धन्यवाद। कंपनी के बारे में जब पूछा गया तो पता चला कि सुधीर श्रीवास्तव ओमनीनेट के टेक्निकल डायरेक्टर हैं और आशीष श्रीवास्तव ओमनी के मार्केटिंग डारेक्टर है।

किन-किन विभागों में और कैसे ओमनीनेट टेंडर मैनेज कर काम कर रही है, इसकी खुलासा जल्द होगा।

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