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इतिहास लिखने को बेताब है ये अनोखा विधायक

जी हां, आज हम आपको एक ऐसे विधायक से रूबरू कराने जा रहे हैं, जो इतिहास लिखने को बेताब है। आपको बता दें कि वर्तमान में उत्तर प्रदेश की विधानसभा 137 पलिया कलाँ से भारतीय जनता पार्टी के विधायक हरविंदर साहनी उर्फ रोमी ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत बहुजन समाज पार्टी से की थी। बसपा की अध्यक्ष मायावती ने वर्ष 2012 में रोमी साहनी पर भरोसा करते हुए उन्हें पार्टी का टिकट दिया, जिस पर रोमी साहनी खरे उतरे और धुरंधरों को धूल चटाकर जीत हासिल की। अब व्यापारी रोमी विधायक बन चुके थे। इसके बाद मानो उन्होंने शपथ ले ली हो कि पलिया विधानसभा की सूरत जैसे भी बदले, बदल कर रहेंगे। इसी कड़ी में उन्होंने चुनाव जीतने के बाद एक-एक गांव का दौरा किया। सभी छोटे, बड़े, बुजुर्ग से मिलकर उनके कष्टों को जानने का प्रयास करने लगे। मगर, तभी उत्तर प्रदेश में बसपा की सरकार चली गई और समाजवादी पार्टी की अखिलेश यादव की सरकार आ गई। रोमी साहनी ने फिर भी हिम्मत नहीं हारी और जो वादा उन्होंने पलिया की जनता से किया था, उसे पूरा करने का प्रण उनके जहन में बना रहा।

विधायक बना नायक –

पलिया विधानसभा के कुछ ऐसे गांव भी थे, जहां आज़ादी के सालों बाद भी उजाला नहीं पहुंच सका था। उन्होंने अपना वादा पूरा करते हुए उन सभी गांवों में बिजली भेजी। जब बिजली उन सभी के घरों में पहुंची तब लोगों की आंखों में खुशी की लहर दौड़ गई और उनकी दुआओं से रोमी साहनी की भी आंखें नम हो गईं। अब क्या था जब रोमी उन गांव में वापस पहुंचे तो महिलाओं ने आरती उतारते हुए उनका स्वागत किया, मानो वो उनके लिए कोई इंसान नहीं बल्कि फ़रिश्ता हों। ऐसी लोकप्रियता सभी के हिस्से में नहीं आती। रामी साहनी ने लगभग उन सभी बच्चियों की ज़िम्मेदारी ली, जो पढ़ तो सकती थीं मगर, मां-बाप के पास रोजगार न होने की वजह से मजबूर थीं। रोमी ने उन सभी बच्चियों को चिन्हित किया और सभी की एक लिस्ट बनाई, जिसमें पलिया विधानसभा की 400 बच्चियों को अपने खर्चे से पढ़ाने का जिम्मा उठाया। रोमी साहनी के इस कदम से न सिर्फ उन बच्चियों के मां-बाप को राहत मिली बल्कि उन बेटियों का पढ़ाई का सपना भी करने में मदद मिली।
 


पलिया विधानसभा की जर्जर सड़कें विपक्ष में होने के बावजूद भी रोमी साहनी ने दुरुस्त करने का काम किया। पेशे से व्यापारी विधायक हरविंदर साहनी के जीवन में अब सब कुछ बदल चुका था। मानो पलिया की जनता ही उनके लिए सब कुछ हो चुकी हो। दिन-रात पलिया में रुककर वहां की चलती सड़कों पर लोगों को रोक-रोक कर उनके दुख दर्द जाने बिना जाने नहीं देते। रोमी साहनी पलिया विधानसभा में चर्चाओं में शामिल हो चुके थे। हर किसी की जुबान पर एक ही नाम था। रोमी साहनी हर किसी की तकलीफ दुःख दर्द में सबसे पहले पहुंचकर मरहम लगाने से नहीं चूकते। सभी ने उन्हें अपना मसीहा कहना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे 4 वर्ष बीत चुके थे। 2017 नजदीक आ रहा था, चुनाव की चर्चा शुरू हो चुकी थी। इसी बीच रोमी साहनी के जीवन में एक बदलाव आया, भाजपा के नेता दयाशंकर का मुद्दा चल रहा था, जिस पर विधायक रोमी साहनी ने दयाशंकर के पक्ष में एक बयान दे दिया, उनके बयान के बाद बहुजन समाज पार्टी की मुखिया ने अनुशासनहीनता के कारण पार्टी से बाहर कर दिया। हालांकि, 2 दिन के बाद उन्होंने लिखित में माफी मांगते हुए अपनी गलती मान ली और उनको पार्टी में वापस ले लिया गया।

विधानसभा चुनाव के लिए जब बसपा में टिकट बंटवारे को लेकर पलिया विधानसभा का नंबर आया, तब रोमी साहनी का टिकट काट दिया गया। रोमी ने बसपा पर आरोप लगाते हुए कहा कि मुझसे 5 करोड़ की मांग की गई थी, जिसे देने से मना कर दिया और इसी वजह से मेरा टिकट काट दिया गया। हालांकि, बसपा ने सफाई देते हुए साफ कहा कि जब इन्हें पार्टी में वापस लिया गया था, उसी वक्त ये साफ कर दिया गया था कि आने वाले चुनाव में टिकट नहीं दिया जाएगा। आरोपों का दौर शुरू हो चुका था। उसी बीच रोमी साहनी ने अपना पाला पलटते हुए भाजपा का दामन थाम लिया और भाजपा ने भी बिना देरी किए उन्हें पलिया से प्रत्याशी घोषित कर दिया। उधर, जैसे ही ये खबर पलिया में पहुंची तो मानो विरोधियों के खेमे में सन्नटा पसर गया, सभी के चेहरे उतर गए। ऐसा इसलिए क्योंकि रोमी साहनी ने बीते 5 वर्षों में पलिया में जो काम किया था, उससे सभी विरोधी घबराए हुए थे। चुनाव अपनी चरम सीमा पर था। एक बहुत ही आश्चर्य की बात है, जो पलिया के निवासी बताते हैं कि पलिया में जितने भी भिखारी भीख मांगते हैं अगर वो अपने विधायक रोमी साहनी को न देखें तो फोन कर देते हैं और उनका हाल-चाल लेते हैं। अब आप इससे अंदाजा लगा सकते हैं कि विधायक रोमी साहनी अपने क्षेत्र में कितने लोकप्रिय होंगे।

खैर, साल 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के बैनर तले और बसपा से पलड़ा झाड़ते हुए रोमी साहनी दूसरी बार विधायक बन चुके थे। उनके विरोधी परास्त हो चुके थे। दूसरे कार्यकाल में पहुंचते ही उन्होंने सभी को धन्यवाद किया। उत्तर प्रदेश में अब भाजपा की योगी सरकार बन चुकी थी। क्षेत्र के लोगों में एक चर्चा तेजी से फैलने लगी कि विधायक रोमी साहनी को मंत्री मंडल में जगह मिलेगी मगर, यहां सभी को मायूस होना पड़ा क्योंकि रोमी साहनी को मंत्री मंडल में शामिल नहीं किया गया।

कैसे चर्चा में आए विधायक रोमी साहनी

आपको बता दें कि अगर उनके क्षेत्र में कोई भी घटना घट गई तो बगैर देरी किए हुए विधायक रोमी साहनी लखनऊ या गोला खीरी से सीधे पीड़ित के आवास पर पहुंच जाते हैं। विधायक को देखकर पीड़ित का हौसला बढ़ जाता है और विधायक अपने गले लगाकर उनका दुःख-दर्द बांटने की कोशिश करते हैं। सिर्फ यही नहीं बल्कि पीड़ित की नजरों से ओझल होते-होते आर्थिक मदद करने से भी नहीं चूकते। जैसे अगर किसी के घर में आग लग जाए, सब कुछ जलकर राख़ हो जाये तो कम से कम 20,000 हजार रुपये की आर्थिक सहायता तो रोमी साहनी खुद ही दे देते हैं। अगर कोई सड़क दुर्घटना में घायल हो जाये तो इलाज के लिए 10 हजार से लेकर 50,000 तक मदद करने में भी नहीं चूकते। यही नहीं, अगर जनपद में इलाज होने में कुछ परेशानी हो रही हो तो अपने कार से लखनऊ भेजने में जरा सी भी देरी नहीं करते। क्षेत्र की सड़कें, पानी की व्यवस्था, शिक्षा व्यवस्था, स्वास्थ्य व्यवस्था इन सभी के मामले में रोमी साहनी हमेशा जागरूक रहते हैं। यूं तो जनपद लखीमपुर खीरी में आठ विधानसभाएं हैं मगर, पलिया विधायक रोमी साहनी की अगर हम बात करें तो सभी विधानसभाओं में हमेशा चर्चा का विषय बने रहते हैं। जनपद के लोगों का कहना है कि रोमी साहनी किसी भी विधानसभा से चुनाव लड़ जाते हैं तो जीत उन्हीं के पाले में होगी।

तो चलिए अब हम आपको ले चलते हैं उस आंकड़े की ओर जिसने दिलाई रोमी साहनी को जीत

आपको बता दें कि वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में जब रोमी साहनी अपना पहला चुनाव लड़ रहे थे, तब उनके सामने राजनीति के दिग्गज मैदान में ताल ठोक रहे थे, लेकिन एक कहावत है जो काफी चर्चा में रहती है “डर के आगे जीत है”। विधायक रोमी साहनी के लिए एक बड़ी चुनौती थी, जिसका सामना करते हुए रोमी साहस नहीं हारे। एक व्यापारी का सामना अब राजनीतिक धुरंधरों से हो रहा था। चुनाव में सभी बड़े-बड़े वादों और दावों की बात करके अपनी हवा मजबूत कर रहे थे मगर, जब रिजल्ट सामने आया तो चौंकाने वाला था। भाजपा से पूर्व मंत्री रामकुमार वर्मा को 22,000 वोट ही मिल सके वहीं, समाजवादी पार्टी के कृष्ण कुमार पटेल को 49,000 हजार के आस-पास वोट मिले और कांग्रेस को 22,000 वोट मिल सके। सभी के चेहरे उतर चुके थे और वहीं, बसपा से रोमी साहनी ने 56,000 वोट पाकर 137 पलिया विधानसभा से विधायक बन चुके थे, जो खुद में एक बड़ा इतिहास था।

तो ये थे वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव के आंकड़े जो हैरान करने वाले थे, अब हम आपको वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव के आंकड़ों से रूबरू कराते हैं, जिसे पढ़ने के बाद आप समझ जाएंगे की एक साधारण व्यापारी ने विधायक बनकर किस तरह से लोकप्रियता हासिल कर ली। साल 2017 में जहां समाजवादी पार्टी और कांग्रेस का महागठबंधन हो चुका था। सभी के दिमाग में एक ही बात चल रही थी कि अब महागठबंधन हो गया है। रोमी साहनी के सामने कांग्रेस से गठबंधन प्रत्याशी पूर्व कैबिनेट मंत्री व सांसद जफर अली नक़वी के पुत्र सेफ अली नक़वी थे, जिन्हें 49,000 वोट मिले बसपा को 50,000 वोट मिले। 

महागठबंधन के चक्रव्यू को तोड़ते हुए विधायक रोमी साहनी ने सभी को पीछे छोड़ते हुए 1,20,000 वोट पाकर दोबारा जीत का बिगुल फूंक चुके थे, जिससे इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि अपनी विधानसभा में रोमी साहनी के काम ने उनका साथ दिया। आपको बता दें कि विधायक रोमी साहनी को जो भी तनख्वाह मिलती है, पूरी की पूरी वो गरीबों में बांट देते हैं। उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव 2022 को लेकर राजनीतिक पार्टियों की तैयारियां तेज हो गई हैं। मगर, विधायक रोमी साहनी आश्वस्त हैं कि उनके प्रति पलिया की जनता जनार्दन का जो प्यार है, वो और कोई भी बांट नहीं सकता।  

आपको बता दे की बढ़ते हुए कदम शायद सभी को पसंद नहीं आते इसीलिए अक्सर आरोप प्रत्यारोप लगते रहते है क्योंकि विधायक रोमी साहनी की राजनीति को दागदार बनाने के लिए विपक्ष हमेसा व्याकुल रहता है मगर उसका कोई भी आरोप काम नहीं आता क्योकि जनता ज़्नार्दन सब जानती है एसे ही कोई रोमी साहनी नहीं बन जाता उसके लिए त्याग और समर्पण की जरूरत होती है|
 
-पियूष मणि अवस्थी    

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