हर महीने में 2 बार एकादशी व्रत किया जाता है। यह तिथि जगत के पालनहार भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस दिन तिल का दान और व्रत कथा (Shattila Ekadashi Katha) का पाठ जरूर करना चाहिए। इससे साधक को बैकुंठ लोक में सभी सुख मिलते हैं।
वैदिक पंचांग के अनुसार, षटतिला एकादशी आज यानी 14 जनवरी (Shattila Ekadashi 2026) को मनाई जा रही है। इस खास अवसर पर भगवान विष्णु और धन की देवी मां लक्ष्मी की पूजा का खास महत्व है। साथ ही विशेष चीजों का दान किया जाता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस व्रत को करने से साधक को सभी पापों से मुक्ति मिलती है और घर में सुख-शांति का वास होता है। ऐसा माना जाता है कि षटतिला एकादशी के दिन व्रत कथा का पाठ न करने से साधक को व्रत का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता है। इसलिए एकादशी के दिन व्रत कथा का पाठ जरूर करना चाहिए। ऐसे में चलिए पढ़ते हैं षटतिला एकादशी (Shattila Ekadashi Katha) की कथा।
षटतिला एकादशी व्रत कथा (Shattila Ekadashi Vrat Katha in Hindi)
पौराणिक कथा के अनुसार, एक ब्राह्मण स्त्री प्रभु की विशेष पूजा-अर्चना किया करती थी, लेकिन उसने कभी अन्न और तिल का दान नहीं किया था। रोजाना पूजा करने से उसने भगवान विष्णु को प्रसन्न किया। प्रभु ने विचार किया कि ब्राह्मण स्त्री ने पूजा के द्वारा से अपने शरीर को शुद्ध कर लिया है, लेकिन दान करने से उसे बैकुंठ में भोजन कैसे मिलेगा?
ऐसे में भगवन विष्णु ने साधु का रूप धारण कर ब्राह्मणी के पास पहुचें। साधु ने ब्राह्मणी से भिक्षा मांगी। उसने भिक्षा के रूप में मिट्टी का ढेला दिया। इसके बाद प्रभु बैकुंठ लोक में लौट आए। इसके बाद कुछ समय के बाद ब्राह्मणी की मृत्युऔर वे बैकुंठ लोक में आ गई।
ब्राह्मणी ने मिट्टी को भिक्षा में देने से बैकुंठ लोक में जगह प्राप्त हुई, लेकिन उसे बैकुंठ लोक में कुछ भोजन नहीं मिला। इस विषय के बारे में ब्राह्मणी ने भगवान विष्णु से कहा कि मैंने पूजा और व्रत किया, लेकिन मुझे बैकुंठ लोक में भोजन प्राप्त नहीं हुआ। इसके बाद प्रभु ने कहा कि तुम बैकुंठ लोक की देवियों से मिलकर षटतिला एकादशी व्रत के दिन दान का महत्व सुनों। इस व्रत को करने से तुम्हारी सभी मुरादें पूरी होंगी।
इसके बाद ब्राह्मणी ने विधिपूर्वक षटतिला एकादशी व्रत किया और तिल का दान किया। धार्मिक मान्यता के अनुसार, षटतिला एकादशी व्रत करने से ब्राह्मणी में बैकुंठ लोक में सुख मिला। इसलिए षटतिला एकादशी के दिन तिल का दान जरूर करना चाहिए।
