सर्वाइकल कैंसर एक गंभीर बीमारी है, जिसके प्रति जागरूकता की कमी है। जनवरी में इसके लिए जागरूकता माह मनाया जाता है। डॉ. कनिका बत्रा मोदी के अनुसार, यह कैंसर खामोशी से दस्तक देता है, छोटे लक्षणों को नजरअंदाज न करें। टीकाकरण और स्क्रीनिंग से इसका इलाज व रोकथाम संभव है। 25 साल से ज्यादा उम्र की महिलाओं को नियमित जांच करानी चाहिए।
सर्वाइकल कैंसर एक गंभीर बीमारी है, जो दुनियाभर में कई महिलाओं को प्रभावित करती है। यह पूरी दुनिया में होने वाली महिलाओं की मौत के प्रमुख कारणों में से एक है। हालांकि, आज भी इसे लेकर लोगों में जागरूकता की कमी देखने को मिलती है।
इसलिए लोगों को इस गंभीर बीमारी के प्रति जागरूक करने के मकसद से हर साल जनवरी माह में सर्वाइकल कैंसर अवेयरनेस मंथ मनाया जाता है। इस मौके पर इस बीमारी के गंभीरता और समय पर इसकी पहचान के महत्व के बारे में विस्तार से जानने के लिए हमने मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, साकेत में गायनेकोलॉजी, ऑन्कोलॉजी की एसोसिएट डायरेक्टर एवं क्लिनिकल लीड डॉ. कनिका बत्रा मोदी से बात की।
दबे पांव आता है कैंसर
डॉक्टर कहती हैं कि एक चिकित्सक के रूप में, हम यह अच्छी तरह समझते हैं कि हर लक्षण गंभीर नहीं होता, लेकिन हमारा अनुभव यह भी सिखाता है कि गंभीर बीमारियां अक्सर शोर मचाकर नहीं, बल्कि खामोशी से आती हैं। कैंसर की शुरुआत भी बिल्कुल ऐसी ही होती है। यह शुरू में कोई बड़ा ड्रामा नहीं करता; यह हमारी दिनचर्या में छोटे-छोटे बदलावों जैसे हल्का-सी ब्लीडिंग, डिस्चार्ज में बदलाव या हल्के दर्द के रूप में दस्तक देता है।
लक्षणों की अनदेखी है सबसे बड़ी दुश्मन
डॉक्टर आगे कहती हैं कि सर्वाइकल कैंसर, एक ऐसी लड़ाई जिसे हम आसानी से जीत सकते हैं। यह कैंसर उन चुनिंदा कैंसर्स में से है, जिनका टीकाकरण और स्क्रीनिंग के जरिए पूरी तरह इलाज और रोकथाम संभव है। फिर भी, यह दुखद है कि हमारे पास महिलाएं तब पहुंचती हैं, जब बीमारी बढ़ चुकी होती है, सिर्फ इसलिए क्योंकि उन्हें अपनी तकलीफों को ‘मामूली’ मानकर नजरअंदाज करने की आदत डाल दी गई है। इसलिए हर महिला को अपने अंदर नजर आने वाले 8 लक्षणों को कभी भी मामूली समझ कर इग्नोर नहीं करना चाहिए।
असामान्य ब्लीडिंग: शारीरिक संबंध बनाने के बाद खून आना।
अनियमित स्पॉटिंग: दो पीरियड्स के बीच में खून के धब्बे दिखना।
मेनोपॉज के बाद ब्लीडिंग: मेनोपॉज होने के बाद किसी भी तरह की ब्लीडिंग।
पीरियड्स में बदलाव: पीरियड्स का बहुत हैवी होना या सामान्य से ज्यादा दिनों तक चलना।
डिस्चार्ज में बदलाव: लगातार पानी जैसा, खून मिला हुआ या दुर्गंधयुक्त डिस्चार्ज होना।
दर्दनाक संबंध: सेक्स के दौरान दर्द महसूस होना।
लगातार दर्द: पेल्विक एरिया या पीठ के निचले हिस्से में लगातार दर्द बना रहना।
वजन घटना और थकान: बिना किसी कारण के वजन घटना या बहुत ज्यादा थकान होना
सर्तक रहना है जरूरी
डॉक्टर आगे बताती हैं कि सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए डरना नहीं, बल्कि सर्तक रहना जरूरी है। बस इन लक्षणों को नजरअंदाज करने की गलती बिल्कुल न करें। ये लक्षण किसी सामान्य संक्रमण, फाइब्रॉइड या हार्मोनल बदलाव के कारण भी हो सकते हैं, जिनका इलाज बहुत आसान है, लेकिन अगर यह कुछ गंभीर है, तो समय पर पता चलने से इसका सही और तुरंत इलाज आपको बचा सकता है।
