कार्बन उत्सर्जन कम करने और हरित ऊर्जा को बढ़ावा देते की प्रतिबद्धता के साथ भारत ऊर्जा सप्ताह की शुरूआत
ऊर्जा संक्रमण में निरंतर निवेश जरूरी= हरदीप सिंह पुरी

गोवा। भारत में ऊर्जा क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ाई जाएगी। इसे किफायती बनाया जाएगा। इसकी दीर्घकालीन उपलब्धता के लिए नई रणनीति तैयार होगी। इस तरह के संकल्प के साथ मंगलवार को गोवा के ओएनजीसी एटीआई परिसर में भारत ऊर्जा सप्ताह की शुरुआत हुई। इस दौरान भारत के साथ ही विभिन्न देशों से आए प्रतिनिधियों ने कार्बन उत्सर्जन कम करने और हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता दोहराई। निरंतर नवाचार करने और ऊर्जा का सदुपयोग करते हुए विकास पर जोर दिया।।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्चुअल संबोधित करते हुए भारत में ऊर्जा क्षेत्र की संभावनाओं पर प्रकाश डाला।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री पुरी ने कहा कि भारत ऊर्जा सप्ताह तेजी से ऐसे विश्वसनीय वैश्विक मंच के रूप में विकसित हुआ है जो वैश्विक ऊर्जा प्रणाली में अभूतपूर्व परिवर्तन और अस्थिरता के दौर में नीति निर्माताओं, उत्पादकों, उपभोक्ताओं, प्रौद्योगिकी प्रदाताओं और निवेशकों को एक साथ लाता है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि वैश्विक ऊर्जा संक्रमण मूलतः ऊर्जा के स्रोतों और साधनों को बदलने के बजाय “ऊर्जा संवर्धन” से संबंधित है। उन्होंने तेल, गैस, जैव ईंधन, हरित हाइड्रोजन, एलएनजी तथा खाना पकाने के स्वच्छ ईंधनों के क्षेत्र में निरंतर निवेश की आवश्यकता का भी उल्लेख किया। ऊर्जा स्रोतों के अन्वेषण के लिए बड़े तलछटी बेसिनों को खोलने, ओपन एकरेज लाइसेंसिंग नीति (ओएएलपी) और डिस्कवर्ड स्मॉल फील्ड्स (डीएसएफ) की क्रमिक बोली प्रक्रिया के साथ ही वैश्विक निवेशकों को आकर्षित करने के लिए किये जा रहे नीतिगत सुधारों का का सिलसिलेवार ब्यौरा दिया।

अरब अमीरात के उद्योग और उन्नत प्रौद्योगिकी मंत्री और एडीएनओसी के प्रबंध निदेशक और समूह सीईओ सुल्तान अहमद अल जाबेर ने कहा कि आने वाले दशकों में वैश्विक स्तर पर ऊर्जा की मांग बढ़ेगी। वैश्विक ऊर्जा प्रणाली के सामने सबसे बड़ा जोखिम अपर्याप्त निवेश है। उन्होंने सुरक्षा, सस्ती दर और दीर्घकालिक उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए ऊर्जा के सभी रूपों में संतुलित निवेश का आह्वान किया।

गोवा के मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत ने प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए कहा कि उनके राज्य में 2050 तक 100 प्रतिशत नवीकरणीय ऊर्जा प्राप्त करने का दीर्घकालिक रोडमैप तैयार है। उन्होंने हरित अर्थव्यवस्था और समुद्री अर्थव्यवस्था के बीच संतुलन बनाए रखने, पर्यावरणीय स्थिरता सुनिश्चित करने और समुद्री संसाधनों के उत्तरदायित्वपूर्ण उपयोग पर भी बल दिया। इसी तरह अन्य देश से आए प्रतिनिधियों ने वैश्विक स्तर पर व्यावहारिक, विस्तार योग्य और समावेशी समाधान प्रस्तुत करने
