अमेरिका के टैरिफ के बाद पस्त जूता कारोबार को यूरोपीय देशों के साथ हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) से बड़ी राहत मिलेगी। जूता कारोबारियों और वित्तीय विशेषज्ञ इसे जूता एक्सपोर्ट कारोबार के लिए बूस्टर डोज के तौर पर मान रहे हैं। माना जा रहा है कि कारोबारियों को जो नुकसान अमेरिकी टैरिफ के बढ़ने से हुआ, उसकी न सिर्फ भरपाई हो सकेगी।
आर्थिक विशेषज्ञ सीए दीपिका मित्तल ने बताया कि भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता से जिले की अर्थव्यवस्था को विशेष लाभ मिलने वाला है। विशेष रूप से ये समझौता चमड़ा, जूते और हस्तशिल्प क्षेत्रों को बढ़ावा देने वाला है। चमड़े के उत्पादों पर टैरिफ को घटाकर शून्य करने से शहर की निर्माण इकाइयों को 100 अरब डॉलर के यूरोपीय संघ के बाजार में सीधा और प्रतिस्पर्धी प्रवेश मिल सकता है । नेशनल चैंबर के पूर्व उपाध्यक्ष अंबा प्रसाद गर्ग ने कहा कि अमेरिकी टैरिफ के बाद से लगातार कारोबारी नए मार्केट तलाश रहे थे। फ्री ट्रेड के इस फैसले से उत्पाद एक्सपोर्ट करने वाली इकाइयों को ज्यादा ऑर्डर मिलेंगे। जूता उद्यमी जितेंद्र त्रिलोकानी भी इस डील को शहर के कारोबारियों के लिए टर्निंग प्वाइंट मान रहे हैं।
बता दें, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले साल अगस्त महीने में भारतीय उत्पादों के निर्यात पर कई गुना टैरिफ लगा दिया था। इसका असर जूता कारोबार पर हुआ। कारोबारियाें को जहां न सिर्फ पुराने ऑर्डर निरस्त होने का नुकसान हुआ, बल्कि नए ऑर्डर के लिए भी ग्राहक नहीं मिले। टैरिफ की वजह से करीब बीस फीसदी कारोबार में गिरावट दर्ज की गई। हस्तशिल्प क्षेत्र की इकाइयों को भी इस नए मार्केट में बेहद कम टैक्स की वजह से खासा लाभ मिल सकता है।
