प्रदेश सरकार ने पीसीएस जे के पदों पर भर्ती के लिए तीन साल वकालत का अनुभव अनिवार्य कर दिया है। कैबिनेट ने इसके लिए उप्र न्यायिक सेवा (सप्तम संशोधन) नियमावली 2026 को मंजूरी दे दी है। यह संशोधन हाईकोर्ट की संस्तुति के आधार पर किया गया है।
संशोधन के अनुसार पीसीएस (न्यायिक) सेवा की सीधी भर्ती में तीन साल के विधि व्यवसाय यानी वकालत की अनिवार्यता का प्रावधान शैक्षिक योग्यता से संबंधित नियम 11 के अंतर्गत जोड़ा गया है। इन पदों पर भर्ती के लिए पहले सिर्फ विधि स्नातक (एलएलबी) होना पर्याप्त था। सुप्रीम कोर्ट ने सिविल जज (जूनियर डिवीजन) की परीक्षाओं में तीन साल का अनुभव अनिवार्य किया था। इसे सभी हाईकोर्ट और राज्य सरकारों से अपने यहां लागू करने के निर्देश दिए गए थे। इसीलिए राज्य सरकार ने यह संशोधन किया है।
प्रशिक्षण व पदोन्नति से जुड़े नियमों में भी बदलाव किया गया है। प्रक्रिया को और स्पष्ट करने के लिए नए नियम भी जोड़े गए हैं। सरकार के अनुसार, इन संशोधनों से न्यायिक सेवा की भर्ती, प्रशिक्षण और पदोन्नति प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और मजबूत होगी।
सीएम फेलो को प्रतियोगी परीक्षाओं में मिलेगी आयु सीमा में छूट
सरकार ने उप्र लोक सेवा आयोग और अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की सभी प्रतियोगी परीक्षाओं में सीएम फेलो को आयु सीमा में अधिकतम तीन वर्ष तक की छूट के साथ ही अतिरिक्त अंक देने का फैसला किया है। कैबिनेट ने इससे संंबंधित उप्र लोक सेवाओं (प्रतियोगी परीक्षा के लिए मुख्यमंत्री अध्येतावृत्ति के अनुसंधानविदो के लिए आयु सीमा एवं अधिमान का शिथिलीकरण) नियमावली 2026 को हरी झंडी दे दी है।
नियमावली के अनुसार सीएम फेलो के रूप में एक, दो व तीन वर्ष पूरा करने वाले युवाओं को आयु सीमा में क्रमश: एक, दो व तीन साल की छूट मिलेगी। कार्यकाल की गणना विज्ञापन वर्ष के जुलाई के प्रथम दिवस से मानी जाएगी। जिन अभ्यर्थियों को पहले से आयु में छूट मिली है उन्हें इसका लाभ नहीं मिलेगा। फेलो के रूप में एक वर्ष पूरा करने वाले युवाओं को 100 अंक वाले पेपर में एक अंक, दो वर्ष वालों को दो और तीन वर्ष पूरा करने वालों को तीन अंक अधिमान के रूप में मिलेंगे। मुख्य परीक्षाओं में जिनमें 101 से 500 अंक का पेपर है वहां एक वर्ष वाले युवाओं को 1.5 अधिमान नंबर मिलेंगे।
दो वर्ष पूरा करने वालों को तीन अंक और तीन वर्ष की सेवा पूरी करने वालों को 4.5 अंक मिलेंगे। 501 से एक हजार अंक वाली मुख्य परीक्षा में एक वर्ष पूरा करने वाले को दो, दो वर्ष वालों को चार और तीन वर्ष पूरा करने वालों को छह अतिरिक्त अंक मिलेंगे। एक हजार से ज्यादा अंक वाली परीक्षाओं में एक वर्ष वाले को 2.5, दो वर्ष वाले को पांच एवं तीन वर्ष वाले को 7.5 अतिरिक्त अंक मिलेंगे। बता दें, राज्य सरकार ने कई विभागों में सीएम फेलो के रूप में युवाओं को तैनात किया है। इनके जरिये सरकार अपनी योजनाओं का संचालन के साथ ही निगरानी में सहयोग लेती है। इन युवाओं को सरकारी नौकरियों में छूट देने करने का निर्णय लिया गया है।
25 साल पुराने भवनों व औद्योगिक भवनों के स्थान पर बना सकेंगे अपार्टमेंट
प्रदेश में 25 साल पुराने भवनों और तीन साल से बंद पड़े औद्योगिक भवनों को ध्वस्त करके उसके स्थान पर अपार्टमेंट या हाउसिंग सोसायटी बनाने का रास्ता साफ हो गया है। हालांकि इसके लिए न्यूनतम 2000 वर्ग मीटर का क्षेत्रफल होना अनिवार्य होगा। इसके लिए आवास विभाग ने उत्तर प्रदेश शहरी पुनर्विकास नीति-2026 तैयार किया है। इसे कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है।
प्रस्तावित नीति के तहत इस श्रेणी की भूमि पर नया अपार्टमेंट के नक्शा कराने के लिए लगने वाले विकास शुल्क में 50 प्रतिशत छूट मिलेगी। वहीं, हाउसिंग सोसायटी के लिए विकास शुल्क में 25 प्रतिशत छूट देने का प्रावधान किया गया है। इस नीति का लाभ निजी के साथ ही सरकारी कॉलोनियों के मामले में भी मिलेगा।
मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में लिए गए फैसले के मुताबिक प्रदेश में पहली बार यह नीति लागू की जा रही है। इससे शहरी क्षेत्रों में रियल स्टेट क्षेत्र में निर्माण कार्य बढ़ेंगे और रोजगार के द्वार भी खुलेंगे। प्रस्ताव के मुताबिक एकल आवासीय या एकल भवन इस नीति के दायरे में नहीं आएंगे। लीज पर आवंटित भूमि जैसे नजूल भूमि, इंप्रूवमेंट ट्रस्ट और अन्य शासकीय भूमि जिसके फ्री-होल्ड में परिवर्तन नहीं हुआ है, वे भी इसके दायरे में नहीं आएंगे।
प्रस्ताव के मुताबिक तीन साल से बंद पड़े उद्योग और सक्षम प्राधिकारी द्वारा घोषित रुग्ण इकाइयों को तोड़कर बनाने की अनुमति दी जाएगी। नॉन कंफार्मिंग उद्योग, जिन्हें विस्तार की जरूरत होने या शहर के अंदर चालू रखने में व्यवहारिक कठिनाइयां होने से अन्य क्षेत्रों में पुर्नस्थापना की इच्छुक होने, शासकीय, निगमों की खाली, कारागार, बस टर्मिनल, डिपो (बस स्टाप को छोड़कर) तथा इसी प्रकार के अन्य उपयोग जो शहर के घने बसे भीड़ वाले क्षेत्रों में स्थित हो उसे तोड़कर बनाने की अनुमति दी जाएगी।
भवन विकास उपविधि के अनुसार अनुमन्य बेसिक एफएआर के ऊपर एक प्रतिशत अतिरिक्त दिया जाएगा। किसी भी पुराने भवन को तोड़कर उसके स्थान पर नया बनाने के दौरान वहां रहने वालों को दूसरे स्थानों पर रहने की व्यवस्था की जाएगी या उसको किराए दिया जाएगा। मकानों का आवंटन उसी प्रकार से किया जाएगा, जो जैसे रह रहा था। ऐसा न होने पर लाटरी से मकानों या फ्लैटों का आवंटन किया जाएगा।
विकास प्राधिकरणों द्वारा पुनर्विकास योजना का काम स्वयं किया जाएगा। वे चाहेंगे तो पीपीपी, निजी बिल्डरों के माध्यम से तोड़ कर बनवा सकेंगे। हाउसिंग सोसायटी या रेजीडेंट वेलफेयर सोसायटी द्वारा भी इस योजना में काम कर सकेंगे। इनके द्वारा संबंधित विकास प्राधिकरणों को आवेदन देना होगा। इसके लिए दो तिहाई सदस्यों की सहमति जरूरी होगी। इस नीति में निर्माण कार्य तीन साल में पूरा करना होगा अधिकतम दो वर्ष का विस्तार दिया जाएगा। ईडब्ल्यूएस व एलआईजी के 10-10 फीसदी मकान बनाने पर शेल्टर फीस में छूट दी जाएगी।
शिक्षकों को मिली कैशलेस सुविधा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में गुरुवार को हुई कैबिनेट बैठक में प्रदेश के शिक्षकों को योगी सरकार ने बड़ी सौगात दी है। अब शिक्षकों को भी राज्य कर्मचारियों की तरह ही कैशलेस इलाज की सुविधा मिलेगी। बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दो दी गई है। इस फैसले से 11.92 लाख से ज्यादा शिक्षकों को सीधा लाभ मिलेगा। इस फैसले को आयुष्मान व्यवस्था के माध्यम से लागू किया जाएगा। इस फैसले से शिक्षक, शिक्षामित्र, अनुदेशक व रसोइया सभी लाभांवित होंगे। इस फैसले के क्रियान्वयन में 358.61 करोड़ रुपये की लागत आएगी।
बैठक में माध्यमिक शिक्षा विभाग को भी कैशलेस सुविधा की मंजूरी दे दी गई है। इससे दो लाख 97 हजार 579 कर्मचारी लाभांवित होंगे। वहीं, सरकार 89.25 करोड़ रुपये का व्यय भार पड़ेगा। हालांकि, जो कर्मचारी पहले से ही किसी सरकारी योजना जैसे आयुष्मान से आच्छादित हैं उन्हें इसका लाभ नहीं दिया जाएगा।
बता दें कि कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बीते साल के पांच सितंबर को शिक्षक दिवस पर शिक्षकों के लिए कैशलेश चिकित्सा सुविधा देने की घोषणा की थी। विभाग की ओर से इस योजना को आयुष्मान योजना की तरह लागू करने की तैयारी है। यह सुविधा पूरी तरह कैशलेश है। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में कुल 32 में से 30 प्रस्ताव पास हो गए। सिर्फ 14वां और 17वां प्रस्ताव ही रोका गया।
