मोतिहारी थाना परिसर में बेरोजगार युवकों के साथ चल रही ठगी का खेल, जिसका खुलासा अमर उजाला ने पहले किया था उस पर जिले के एसपी ने एक्शन लिया है।
मोतिहारी थाना परिसर में बेरोजगार युवकों के साथ चल रही ठगी का खेल, जिसका खुलासा अमर उजाला ने पहले किया था, अब पुलिस की सक्रिय कार्रवाई के केंद्र में है। मोतिहारी पुलिस ने पूरे गिरोह के मास्टरमाइंड का पता लगा लिया है और उसके साथ तीन अन्य प्रमुख आरोपियों पर इनाम की घोषणा कर दी है।
एसपी ने किया था SIT टीम का गठन
मोतिहारी एसपी स्वर्ण प्रभात के निर्देश पर ठगी गिरोह के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई शुरू की गई है। ‘पुलिस मित्र’ के नाम पर फर्जी बहाली का जाल बिछाकर लाखों रुपये की ठगी करने वाले इस गिरोह को पकड़ने के लिए एसपी ने विशेष एसआईटी टीम का गठन किया था। टीम ने बिहार के कई जिलों में छापेमारी कर गिरोह के सदस्यों को दबोचना शुरू कर दिया है। टीम ने देर रात मुजफ्फरपुर से एक मुख्य आरोपी सहित दो ठगों को गिरफ्तार किया है। छापेमारी से पहले ही चिरैया थाना क्षेत्र से एक व्यक्ति को हिरासत में लिया गया था, जो अपनी गाड़ी पर ‘पुलिस मित्र बिहार प्रदेश अध्यक्ष’ का बोर्ड लगाकर घूम रहा था।
पटना के गांधी मैदान में दी फर्जी ट्रेनिंग
मास्टरमाइंड अशोक सम्राट (वैशाली) के ऊपर 15,000 रुपये का इनाम रखा गया है। वहीं समस्तीपुर के धर्मेंद्र कुमार और पटना के राकेश कुमार उर्फ जितेंद्र के ऊपर 10,000 रुपये का इनाम रखा गया है। पुलिस ने साफ किया है कि सूचना देने वालों का नाम पूरी तरह गोपनीय रखा जाएगा। ठगों ने बेरोजगार युवकों को सोलह हजार रुपये मासिक वेतन का लालच दिया और पटना के गांधी मैदान में फर्जी ट्रेनिंग दी। गिरोह ने युवकों को आई कार्ड थमा कर थाना परिसर तक पुलिसकर्मियों को भी भ्रमित किया। प्रत्येक युवक से 50,000 से 1,00,000 रुपये की वसूली की गई। ठगों ने सोशल मीडिया चैनलों के जरिए भी अपना जाल फैलाया।
कई थानों तक फैला हुआ है फर्जीवाड़ा
विश्वस्त सूत्रों के अनुसार यह फर्जीवाड़ा अरेराज, फेनहारा, ढाका, चिरैया और घोड़ासहन समेत कई थानों तक फैला हुआ है। एसपी ने संलिप्त थानों के पुलिसकर्मियों और थानेदारों की संदिग्ध भूमिका की भी जांच के निर्देश दिए हैं। जांच का दायरा अब मोतिहारी से बढ़कर रोहतास, सारण और मुजफ्फरपुर तक फैल गया है। अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करें
