यशोदा जयंती का दिन वात्सल्य और ममता का प्रतीक है। हर साल फाल्गुन महीने के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को माता यशोदा का जन्मोत्सव मनाया जाता है। इस साल यह 7 फरवरी 2026 यानी आज के दिन मनाया जा रहा है। इस शुभ दिन पर उपवास रखने से जीवन में सुख-शांति आती है। साथ ही संतान प्राप्ति की कामना रखने वालों के लिए यह दिन बहुत महत्वपूर्ण है।
ऐसी मान्यता है कि इस दिन माता यशोदा की विधि-विधान से पूजा करने और उनकी विशेष आरती करने से संतान पर आने वाले सभी संकट टल जाते हैं और सुख-समृद्धि का वास होता है, तो आइए कान्हा की भव्य आरती करते हैं, जो इस प्रकार हैं –
॥आरती बाल कृष्ण की कीजै॥
तोतली बोलन मधुर सुहावै,
सखन संग खेलत सुख पावै ।
सोई सुक्ति जो इनको ध्यावे,
अब इनको अपना करि लीजै ॥
॥आरती बाल कृष्ण की कीजै…॥
आरती बाल कृष्ण की कीजै,
अपना जन्म सफल कर लीजै ॥
॥श्रीकृष्ण जी की आरती॥
आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
गले में बैजंती माला,
बजावै मुरली मधुर बाला ।
श्रवण में कुण्डल झलकाला,
नंद के आनंद नंदलाला ।
गगन सम अंग कांति काली,
राधिका चमक रही आली ।
लतन में ठाढ़े बनमाली
भ्रमर सी अलक,
कस्तूरी तिलक,
चंद्र सी झलक,
ललित छवि श्यामा प्यारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
कनकमय मोर मुकुट बिलसै,
देवता दरसन को तरसैं ।
गगन सों सुमन रासि बरसै ।
बजे मुरचंग,
मधुर मिरदंग,
ग्वालिन संग,
अतुल रति गोप कुमारी की,
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥
आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
जहां ते प्रकट भई गंगा,
सकल मन हारिणि श्री गंगा ।
स्मरन ते होत मोह भंगा
बसी शिव सीस,
जटा के बीच,
हरै अघ कीच,
चरन छवि श्री बनवारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
चमकती उज्ज्वल तट रेनू,
बज रही वृंदावन बेनू ।
चहुं दिसि गोपि ग्वाल धेनू
हंसत मृदु मंद,
चांदनी चंद,
कटत भव फंद,
टेर सुन दीन दुखारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
।।यशोदा के लाल भजन।।
जय हो जय हो तेरी माँ यशोदा के लाल,
ले के अवतार आना गज़ब हो गया,
त्रेता युग में थे तुम आये द्वापर में भी,
त्रेता युग में थे तुम आये द्वापर में भी,
तेरा कलयुग में आना गज़ब हो गया,
जय हो जय हो तेरी माँ यशोदा के लाल ॥
जब लगे पाप धरती पे बढ़ने तभी,
आके दुष्टो को तुमने संहारा तभी,
राम बनकर के मारे रावण को कभी,
प्राण कंस के हरना गज़ब हो गया,
जय हो जय हो तेरी मां यशोदा के लाल,
ले के अवतार आना गज़ब हो गया,
जय हो जय हो तेरी माँ यशोदा के लाल ॥
जब लगे तुम सखाओ के संग खेलने,
आ गए देव सारे ये पल देखने,
गेंद जाकर गिरी कालियादेह में,
नाग नथकर के आना गज़ब हो गया,
जय हो जय हो तेरी मां यशोदा के लाल,
ले के अवतार आना गज़ब हो गया,
जय हो जय हो तेरी माँ यशोदा के लाल ॥
आज तेरा मनाए हम जन्मोदिवस,
सबकी आँखों में तुम ही बसे हो प्रभु,
आके दीदार दे दो घडी के लिए,
तेरा पल भर को आना गज़ब हो गया,
जय हो जय हो तेरी मां यशोदा के लाल,
ले के अवतार आना गजब हो गया,
जय हो जय हो तेरी माँ यशोदा के लाल ॥
जय हो जय हो तेरी माँ यशोदा के लाल,
ले के अवतार आना गज़ब हो गया,
त्रेता युग में थे तुम आये द्वापर में भी,
त्रेता युग में थे तुम आये द्वापर में भी,
तेरा कलयुग में आना गज़ब हो गया,
जय हो जय हो तेरी माँ यशोदा के लाल ॥
