आईटी-इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में नौ वर्षों में हुई ऐतिहासिक प्रगति, 60 प्रतिशत कंपोनेंट का यूपी में हो रहा उत्पादन
21 फरवरी को गौतमबुद्ध नगर में होगा फैब यूनिट का शिलान्यास, सेमीकंडक्टर निवेश को मिलेगी नई गति
यूपी में 20 हजार से अधिक स्टार्टअप सक्रिय, आधे का नेतृत्व महिलाएं कर रहीं, नेशनल स्टार्टअप रैंकिंग में टॉप परफॉर्मर राज्य बना यूपी
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बजट 2026-27 पर चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश ने आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में पिछले नौ वर्षों में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। इस अवधि में प्रदेश ने इस सेक्टर में नई दिशा और नई गति के साथ कार्य किया है, जिसके परिणामस्वरूप आज देश के कुल स्मार्टफोन निर्माण का 55 प्रतिशत हिस्सा अकेले उत्तर प्रदेश में तैयार हो रहा है। उन्होंने बताया कि इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट निर्माण के क्षेत्र में भी उत्तर प्रदेश अग्रणी बनकर उभरा है। पूरे देश में बनने वाले इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट का लगभग 60 प्रतिशत उत्पादन यूपी में हो रहा है, जो बड़े पैमाने पर औद्योगिक विस्तार और निवेश का संकेत है।
21 फरवरी को गौतमबुद्ध नगर में फैब यूनिट का किया जाएगा शिलान्यास
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भी प्रदेश तेजी से आगे बढ़ रहा है। वैश्विक निवेश के तहत सेमीकंडक्टर क्षेत्र की अग्रणी कंपनियों ने उत्तर प्रदेश में निवेश की शुरुआत कर दी है। 21 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कर कमलों से गौतमबुद्ध नगर में एक फैब यूनिट का शिलान्यास किया जाएगा। इस परियोजना में दुनिया की अग्रणी कंपनियां भारत से जुड़ी कंपनियों के साथ मिलकर निवेश करेंगी। यह उत्तर प्रदेश के लिए बड़ी उपलब्धि है। सेमीकंडक्टर परियोजनाओं के लिए 32,196 करोड़ रुपये के निवेश को आकर्षित करने की दिशा में सरकार सक्रिय रूप से कार्य कर रही है। इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग के लिए भी बजट में बड़ा प्रावधान किया गया है और सरकार इस क्षेत्र को और मजबूती देने के लिए प्रतिबद्ध है। आईटी निर्यात के क्षेत्र में भी प्रदेश ने उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है। वर्ष 2015-16 में प्रदेश से आईटी फील्ड के सॉफ्टवेयर का निर्यात केवल 15,000 करोड़ रुपये तक सीमित था, जबकि आज यह बढ़कर 75 से 80 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। अकेले उत्तर प्रदेश से यह बड़ा निर्यात किया जा रहा है, जो प्रदेश की तकनीकी क्षमता और प्रतिभा का प्रमाण है।
आज प्रदेश में 20 हजार से अधिक स्टार्टअप सक्रिय, आधे का नेतृत्व महिलाएं कर रहीं
मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले प्रदेश में स्टार्टअप कल्चर का अभाव था, लेकिन आज उत्तर प्रदेश में 20,000 से अधिक पंजीकृत स्टार्टअप सक्रिय हैं। उन्होंने विपक्ष पर कटाक्ष किया कि पहले का स्टार्टअप कल्चर “कट्टा-बम” तक सीमित था, जो एक प्रकार की अवैध गतिविधियों से जुड़ी मानसिकता को दर्शाता था। वर्तमान समय में प्रदेश का स्टार्टअप इकोसिस्टम नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा दे रहा है। पंजीकृत स्टार्टअप में से लगभग आधे का नेतृत्व महिलाएं कर रही हैं। यह प्रदेश में महिला सशक्तिकरण और उद्यमिता को मिल रहे प्रोत्साहन का प्रतीक है। उत्तर प्रदेश ने नेशनल स्टार्टअप रैकिंग में टॉप परफार्मर स्टेट के रूप में स्थान प्राप्त किया है।
सरकार 25 लाख युवाओं को देगी एआर, वीआर और एक्सआर आधारित कौशल प्रशिक्षण
मुख्यमंत्री ने कहा कि “एआई प्रज्ञा” के तहत नागरिकों और कार्मिकों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) में प्रशिक्षित करने का व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। इस पहल के तहत सरकार देश की तमाम बड़ी कंपनियों के साथ मिलकर प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित कर रही है, ताकि प्रदेश के लोग नई तकनीकों में दक्ष बन सकें। मुख्यमंत्री ने सदन में इस पहल का उल्लेख करते हुए अध्यक्ष के प्रति आभार जताया कि पिछले वर्ष ही माननीय सदस्यों को एआई में पारंगत बनाने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रारंभ किया गया था। उन्होंने कहा कि यह एक अनवरत चलने वाली प्रक्रिया होनी चाहिए और सरकार इसे निरंतर आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और ग्लोबल वैल्यू चेन में हिस्सेदारी बढ़ाने के उद्देश्य से भी विशेष कार्यक्रम चला रही है। प्रदेश में तकनीकी निवेश की संभावनाओं को बढ़ाने और टेक-युवाओं के लिए नए अवसर सृजित करने की दिशा में कई महत्वपूर्ण कार्य किए जा रहे हैं। इसी क्रम में सरकार ने 25 लाख युवाओं को एआर (Augmented Reality), वीआर (Virtual Reality) और एक्सआर (Extended Reality) आधारित कौशल प्रशिक्षण देने की बड़ी योजना बनाई है। इसके लिए बजट में विशेष धनराशि की व्यवस्था की गई है। सरकार का लक्ष्य है कि युवा इन उभरते क्षेत्रों में प्रशिक्षित होकर रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर प्राप्त कर सकें। एआर ऐसी तकनीक है, जिसमें वास्तविक दुनिया को देखते हुए डिजिटल तत्व जोड़े जाते हैं। उदाहरण के तौर पर, कोई व्यक्ति अपनी आंखों से वास्तविक दुनिया देखता है, लेकिन चश्मे या मोबाइल स्क्रीन के माध्यम से उस पर डिजिटल रास्ते, नाम या 3डी मॉडल प्रदर्शित किए जा सकते हैं। आज कई गेम्स और एप्लिकेशन में इसका उपयोग हो रहा है। सरकार इस क्षेत्र में युवाओं को प्रशिक्षित कर उनका स्किल डेवलपमेंट करने जा रही है।
वीआर आधारित कार्यक्रम के लिए 100 करोड़ दिये गये
मुख्यमंत्री ने कि बताया कि वीआर तकनीक में उपयोगकर्ता हेडसेट पहनकर पूरी तरह कंप्यूटर जनरेटेड दुनिया में प्रवेश करता है। इसमें वास्तविक दुनिया दिखाई नहीं देती, बल्कि व्यक्ति एक वर्चुअल वातावरण अनुभव करता है। उदाहरण के तौर पर, कोई बुजुर्ग व्यक्ति अपने घर में बैठकर किसी महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थल को देख सकता है या उसका आभासी अनुभव ले सकता है। इस तकनीक के माध्यम से पर्यटन, शिक्षा और मनोरंजन जैसे क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन की संभावनाएं हैं। सरकार ने वीआर आधारित कौशल विकास कार्यक्रम के लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। उन्होंने कहा कि एक्सआर हकीकत और डिजिटल का मिलन है। इसमें वास्तविक और डिजिटल दुनिया का ऐसा मेल होता है, जिसमें डिजिटल ऑब्जेक्ट्स केवल हवा में तैरते नहीं दिखाई देते, बल्कि उन्हें वास्तविक मेज या स्थान पर स्थापित कर इंटरैक्ट किया जा सकता है। सरकार इस तकनीक के माध्यम से पर्यटन सहित विभिन्न क्षेत्रों में नई संभावनाओं को विकसित करने की तैयारी कर रही है। सरकार ने इन उभरती तकनीकों के लिए पहली बार उत्तर प्रदेश के बजट में विशेष प्रावधान किया है।
यू हब की स्थापना के लिए धनराशि की व्यवस्था की गई
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राज्य में एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना के लिए धनराशि की व्यवस्था की गई है। लखनऊ और गौतमबुद्ध नगर में यू-हब (प्लग एंड प्ले, इन्क्यूबेशन एवं इनोवेशन) की स्थापना की जाएगी। यह यू-हब युवाओं, स्टार्टअप्स और नवाचार से जुड़े उद्यमियों को एक ही स्थान पर आवश्यक संसाधन, मार्गदर्शन और बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराएगा। ये सभी चीजें बताती हैं कि उत्तर प्रदेश बीमारू राज्य की श्रेणी से आगे बढ़ चुका है और काफी चीजें उसके सामने देखने को मिल रही हैं। आज प्रदेश की तस्वीर बदली है क्योंकि सरकार ने उस दिशा में कार्य किया है।
