पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में लापता पुरुषों के लिए लड़ने वाली महिला को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। इस महिला का नाम है डॉ. महरंग बलोच। जब वह युवा थीं तो उन्होंने पाकिस्तान में सैकड़ों परिवारों के साथ मिलकर अपने पिता की तलाश शुरू की थी।
सालों बाद ये महिला डॉक्टर से एक एक्टिविस्ट बन गई और इस आंदोलन की सबसे जाने-पहचाने चेहरों में से एक बन गई। इस आंदोलन का मकसद उन लापता पुरुषों की तलाश करना था जो जबरदस्ती गायब हो गए थे। अब इस महरंग को जेल की सजा का सामना करना पड़ रहा है।
महरंग को सुनाई गई उम्रकैद की सजा
पाकिस्तान की एक आतंकवाद-रोधी अदालत ने सोमवार को महरंग और उनके साथी एक्टिविस्ट सिबगतुल्लाह शाह को उम्रकैद की सजा सुनाई है। उन्हें 2024 में ग्वादर शहर में एक विरोध प्रदर्शन के दौरान पैरामिलिट्री सैनिक की मौत के मामले में आतंकवाद, देशद्रोह और हत्या का दोषी ठहराया गया।
हालांकि, महरंग ने इन आरोपों से इनकार किया है और उम्मीद है कि वो ऊपरी अदालत में अपील करेंगीं। इस मामले को लेकर महरंग का परिवार डटा हुआ है और उनका कहना है कि इस फैसले को ऊपरी अदालतों में चुनौती दी जाएगी।
बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, जेल में बंद महरंग की बहन नादिया बलोच का कहना है, “मुझे उनसे मिलने की हिम्मत नहीं है। क्योंकि उन्हें न्याय न दिलाकर मैं अपनी जिम्मेदारी निभाने में नाकाम रही।”
गायब पुरुषों की तलाश महरंग के लिए बन गया निजी मसला
33 साल की महरंग के लिए जबरदस्ती गायब हुए पुरुषों का मुद्दा सिर्फ राजनीतिक नहीं है। यह बहुत ही निजी मामला है। उनके पिता अब्दुल गफ्फार लैंगोव एक राजनीतिक कार्यकर्ता थे और 2009 में गायब हो गए। उस समय महरंग 16 साल की थीं। उनके पिता की मौत के मामले ने उनकी जिंदगी पर गरा असर डाला।
लगभग तीन साल बाद महरंग के परिवार को एक फोन कॉल आया जिसमें बताया गया कि उनका शव प्रांत के दक्षिण में स्थित लासबेला जिले में मिला है। उन्होंने 2025 में अपनी गिरफ्तारी से पहले बीबीसी को दिए एक इंटरव्यू में कहा, “जब मेरे पिता का शव आया तो उन्होंने वही कपड़े पहने हुए थे जो अब फट चुके थे। उन्हें बुरी तरह प्रताड़ित किया गया था।”
इसके बाद के सालों में महरंग बलूचिस्तान में लापता लोगों के बारे में जानकारी की मांग करने वाले अभियानों में शामिल हो गईं। कार्यकर्ताओं और मानवाधिकार समूहों का कहना है कि पिछले दो दशकों में हजारों बलूच लोग लापता हो गए हैं। उनका आरोप है कि सुरक्षा बलों ने कई लोगों को बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के हिरासत में लिया या अलगाववादी विद्रोह के खिलाफ चलाए जा रहे अभियानों के तहत उनका अपहरण किया, उन्हें प्रताड़ित किया और उनकी हत्या कर दी।
पाकिस्तान सरकार आरोपों से करती रही इनकार
पाकिस्तान सरकार इन आरोपों से इनकार करती है और कहती है कि लापता लोगों में से कई अलगाववादी गुटों में शामिल हो गए हैं या देश छोड़कर भाग गए हैं। कुछ लोग सालों बाद सदमे और टूटे हुए मन के साथ लौटते हैं तो कई कभी वापस नहीं आते। कुछ लोगों के शव बलूचिस्तान में बनी बिना पहचान वाली कब्रों में मिलते हैं। उनके शव इतने बुरी तरह बिगड़े होते हैं कि उनकी पहचान करना भी मुश्किल होता है।
पिछले साल नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नॉमिनेट हुईं महरंग पिछले एक दशक में इस आंदोलन की सबसे प्रमुख नेताओं में से एक बन गई हैं। उन्हें बलूचिस्तान की शेरनी भी कहा जाता है।
पाकिस्तान ने बलूचिस्तान से किया सौतेला व्यवहार
बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है और ये देश के कुल क्षेत्रफल का लगभग 44% हिस्सा है। यहां की जमीन गैस, कोयला, तांबा और सोने जैसे संसाधनों से समृद्ध है लेकिन ये इलाका तरक्की से दूर रहा है। सुरक्षा कारणों से प्रांत के कई हिस्सों में जाने पर रोक है। यहां बुनियादी ढांचा खराब है, बिजली कभी-कभी आती है और पानी की कमी है।
जब भारत का बंटवारा हुआ तो बलूचिस्तान पाकिस्तान का हिस्सा बन गया। हालांकि कुछ प्रभावशाली कबीलाई नेता एक स्वतंत्र राज्य चाहते थे और वो इसे पाकिस्तान का हिस्सा मानने से इनकार करते रहे।
बता दें कि पाकिस्तान, अमेरिका और कई अन्य देशों द्वारा आतंकवादी संगठन घोषित किए गए बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) जैसे उग्रवादी समूहों ने हाल के वर्षों में अपने हमले तेज कर दिए हैं। सुरक्षा बलों पर बमबारी, हत्या और घात लगाकर हमले करने की घटनाएं बढ़ गई हैं।
गायब हुए लोगों की कहानी
बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, माना जाता है कि प्रांत में लोगों का गायब होना इस्लामाबाद की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसका मकसद विद्रोह को कुचलना तो है ही साथ ही असहमति को दबाना और राष्ट्रवादी भावना तथा स्वतंत्र बलूचिस्तान के समर्थन को कमजोर करना भी है।
गायब हुए लोगों में से कई बलूच राष्ट्रवादी समूहों के सदस्य या समर्थक हो सकते हैं जो आजादी की मांग करते हैं लेकिन इनमें से बड़ी संख्या ऐसे आम लोगों की भी है जिनका किसी राजनीतिक गुट से कोई संबंध नहीं है। वहीं, सरकार में कई लोग इस बात से इनकार करते हैं कि बड़े पैमाने पर लोगों को जबरदस्ती गायब किया जा रहा है और इसे सुनियोजित दुष्प्रचार बताते हैं।
पाकिस्तान सरकार का यह भी कहना है कि 2011 से बलूचिस्तान में लापता होने के जो 2,900 से ज्यादा मामले सामने आए हैं उनमें से लगभग 80% मामलों को सुलझा लिया गया है।
बिखर गई महरंग की दुनिया
अपने पिता की मौत के बाद महरंग के परिवार की दुनिया बिखर गई। 2017 में सुरक्षा बलों ने उनके भाई को हिरासत में ले लिया और लगभग तीन महीने तक उन्हें रोके रखा।
उस वक्त महरंग ने कहा था, “यह बहुत डरावना था। मैंने अपनी मां को यकीन दिलाया था कि जो मेरे पिता के साथ हुआ वह मेरे भाई के साथ नहीं होगा। लेकिन ऐसा हुआ।” इसके बाद ही महरंग ने जबरदस्ती गायब किए जाने और गैर-न्यायिक हत्याओं के खिलाफ लड़ने का फैसला किया।
शुरु हुई कानूनी लड़ाई
एक ट्रेंड डॉक्टर महरंग बलूच ‘बलूच यकजेहती कमिटी’ (BYC) के जरिए चर्चा में आईं। यह संगठन जबरदस्ती लोगों को गायब करने और मानवाधिकारों के कथित उल्लंघन के खिलाफ आवाज उठाता है साथ ही बलूचिस्तान के प्राकृतिक संसाधनों पर ज्यादा नियंत्रण की वकालत भी करता है।
उन्होंने विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व किया, लंबी पदयात्राएं कीं और बलूचिस्तान से उभरने वाली सबसे प्रभावशाली आवाजों में से एक बनीं। यह सब उन्होंने जान से मारने की धमकियों, कानूनी चुनौतियों और यात्रा पर लगी पाबंदियों के बावजूद किया।
2023 के आखिर में उन्होंने सैकड़ों महिलाओं के साथ राजधानी इस्लामाबाद तक 1,000 मील (1,600 किलोमीटर) की पदयात्रा की ताकि वे अपने परिवार के सदस्यों के ठिकाने के बारे में जानकारी मांग सकें। इस यात्रा के दौरान उन्हें दो बार गिरफ्तार किया गया।
2025 में महरंग की गिरफ्तारी
आखिरकार मार्च 2025 में महरंग को गिरफ्तार कर लिया गया। वह क्वेटा में एक विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रही थीं, जो शहर में 13 अज्ञात शवों को दफनाए जाने के बाद शुरू हुआ था। आशंका थी कि ये शव उन लोगों के थे जो लापता हो गए थे।
अधिकारियों का दावा था कि ये लोग उग्रवादी थे जिन्हें बोलन दर्रे में ट्रेन हाईजैक की घटना के बाद मार गिराया गया था, हालांकि इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी। महरंग ने चेतावनी दी कि जबरदस्ती गायब करने की कार्रवाई से विरोध को दबाने के बजाय उसे और बढ़ावा मिलता है।
उम्रकैद की सजा उनके एक्टिविज्म के लिए अब तक की सबसे बड़ी चुनौती है। उनके परिवार का कहना है कि यह बलूचिस्तान में असहमति की आवाज को दबाने की कोशिश है। महरंग की बहन ने इस मुकदमे की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं और कहा है कि उनकी कानूनी टीम इस मामले को लड़ने के लिए पूरी तरह तैयार है।