पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में तथाकथित विधानसभा चुनाव हो रहे हैं। इस दौरान बर्बरता, हिंसा और अशांति की खबरें सामने आ रही हैं। मानवाधिकार और प्रेस की आजादी पर नजर रखने वाली वैश्विक संस्थाओं ने प्रदर्शनकारियों और मीडिया पर बढ़ती सख्ती को लेकर चिंता जताई है।
एमनेस्टी इंटरनेशनल और कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स (सीपीजे) जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने सरकार समर्थित हिंसा, स्वतंत्र रिपोर्टिंग पर रोक, पत्रकारों के जबरन गायब होने और लंबे समय तक इंटरनेट बंद रहने जैसे आरोपों पर चिंता जाहिर की है।
‘गैर-कानूनी हिंसा पाकिस्तान का पुराना इतिहास’
इन संस्थाओं ने पाकिस्तानी अधिकारियों से सख्ती खत्म करने, संचार सेवाएं बहाल करने और कथित मानवाधिकार उल्लंघनों की पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने की अपील की है। रावलकोट में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अत्यधिक बल प्रयोग की खबरों का जिक्र करते हुए एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कहा कि ये घटनाएं प्रदर्शनकारियों के खिलाफ गैर-कानूनी हिंसा के पाकिस्तान के पुराने रिकॉर्ड को दर्शाती हैं।
एमनेस्टी ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, “रावलकोट से आ रही परेशान करने वाली खबरें, प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पाकिस्तानी अधिकारियों की गैरकानूनी हिंसा के लंबे इतिहास से मेल खाती हैं। प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सुरक्षा बलों द्वारा बल प्रयोग की तुरंत, स्वतंत्र और पारदर्शी जांच का आदेश दिया जाना चाहिए। जब तक इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं बंद रहेंगी, तब तक जमीनी हालात की पूरी जानकारी की स्वतंत्र पुष्टि में भारी बाधा आएगी। हम पाकिस्तानी अधिकारियों से आग्रह करते हैं कि वे सभी संचार सेवाएं बहाल करें और मीडिया तथा स्वतंत्र पर्यवेक्षकों को उस इलाके में जाने दें।”
सीपीजे रख रहा बिगड़ती स्थिति पर नजर
इसी तरह की चिंता जताते हुए सीपीजे ने कहा कि वह पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में प्रेस की आजादी की बिगड़ती स्थिति पर नजर रख रहा है। उसने इंटरनेट बंद होने, टेलीकम्युनिकेशन सेवाएं ठप होने, रिपोर्टिंग पर पाबंदियों और पत्रकारों को हिरासत में लेने व उनके लापता होने का हवाला दिया।
प्रेस की आजादी पर नजर रखने वाली इस संस्था ने स्वतंत्र पत्रकार राजी ताहिर और उनके सहयोगी मुहम्मद सैफ के लापता होने की खबरों पर भी चिंता जताई। आरोप है कि 1 अगस्त को इस्लामाबाद में उनके दफ्तर से पुलिस की वर्दी पहने लोगों ने उन्हें उठा लिया था।
सीपीजे ने उन खबरों पर गहरी चिंता जताई है जिनके मुताबिक, आजाद पत्रकार राजी ताहिर और उनके साथी मुहम्मद सैफ 1 अगस्त से लापता हैं। खबरों के अनुसार, उन्हें इस्लामाबाद में उनके दफ़्तर से पुलिस की वर्दी पहने लोगों ने उठा लिया था और अभी तक उनके बारे में कोई जानकारी नहीं है।
सीपीजे ने लिखा, “पाकिस्तानी अधिकारियों को यह बताना चाहिए कि क्या वे सरकारी हिरासत में हैं, कानूनी प्रक्रिया का पालन करना चाहिए और अगर उन्हें बिना किसी ठोस वजह के हिरासत में रखा गया है तो उन्हें तुरंत रिहा करना चाहिए।”
दो पत्रकार अभी भी लापता
बाद के एक अपडेट में सीपीजे ने कहा कि दो पत्रकार अभी भी लापता हैं, जबकि कश्मीरी पत्रकार राजा इकराम, जिन्हें 1 अगस्त को इस्लामाबाद में हिरासत में लिया गया था, उन्हें रिहा कर दिया गया है।
सीपीजे ने यह भी कहा कि मीडिया पर की जा रही कार्रवाई इस इलाके से बाहर भी फैलती दिख रही है, क्योंकि बड़े न्यूज आउटलेट्स के खिलाफ कार्रवाई की खबरें आ रही हैं और साथ ही टेलीकम्युनिकेशन में भी रुकावटें जारी हैं।
यह आलोचना ऐसे समय में हो रही है जब जारी विरोध प्रदर्शनों के दौरान मरने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है। पीओके की मानवाधिकार परिषद द्वारा रविवार तक जारी आंकड़ों के अनुसार, कम से कम 80 लोगों की मौत हुई है। इनमें 27 जुलाई से पहले मारे गए 33 आम नागरिक, 27 जुलाई के बाद रावलकोट, मीरपुर और मुजफ्फराबाद में मारे गए 43 लोग और पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर पुलिस के चार जवान शामिल हैं।