आरएमएलआईएमएस और लखनऊ विश्वविद्यालय के मध्य क्लीनिकल प्रशिक्षण के लिए एमओयू ।
लखनऊ। डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ और लखनऊ विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्यूटिकल साइंसेज के बीच फिजियोथेरेपी विद्यार्थियों के क्लीनिकल प्रशिक्षण एवं व्यावहारिक शिक्षा को सुदृढ़ करने के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए।
डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ और लखनऊ विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्यूटिकल साइंसेज के बीच फिजियोथेरेपी विद्यार्थियों के क्लीनिकल प्रशिक्षण एवं व्यावहारिक शिक्षा को सुदृढ़ करने के लिए महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए।

इस पांच वर्षीय समझौते का उद्देश्य फिजियोथेरेपी विद्यार्थियों को उच्चस्तरीय तृतीयक चिकित्सा संस्थान में गुणवत्तापूर्ण और व्यावहारिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराना है। एमओयू के तहत विद्यार्थियों को विभिन्न विशेषज्ञता वाले विभागों में पर्यवेक्षित क्लीनिकल प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।
प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थियों को पीएमआर (फिजिकल मेडिसिन एंड रिहैबिलिटेशन), ऑर्थोपेडिक्स, न्यूरोलॉजी, न्यूरोसर्जरी, कार्डियोलॉजी, पीडियाट्रिक्स और इमरजेंसी मेडिसिन सहित विभिन्न विभागों में व्यावहारिक अनुभव प्राप्त होगा।क्लीनिकल प्रशिक्षण के दौरान रोगी मूल्यांकन, रिहैबिलिटेशन प्लान तैयार करना, क्लीनिकल डॉक्यूमेंटेशन, संक्रमण नियंत्रण और साक्ष्य-आधारित चिकित्सा पद्धति पर विशेष जोर दिया जाएगा। इससे विद्यार्थियों को वास्तविक मरीजों के साथ काम करने और आधुनिक चिकित्सा व्यवस्था को करीब से समझने का अवसर मिलेगा।

समझौते के तहत योग्यता-आधारित प्रशिक्षण, अंतर-विषयक अधिगम, संकाय सहभागिता और नियमित मूल्यांकन को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके माध्यम से विद्यार्थियों की पेशेवर दक्षता और क्लीनिकल स्किल्स को और बेहतर बनाने का प्रयास किया जाएगा।यह सहयोग फिजियोथेरेपी शिक्षा को अकादमिक ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक अनुभव से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे विद्यार्थियों को भविष्य में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए आवश्यक कौशल विकसित करने में मदद मिलेगी।

इस सहयोग के तहत विद्यार्थियों को पीएमआर, ऑर्थोपेडिक्स, न्यूरोलॉजी, न्यूरोसर्जरी, कार्डियोलॉजी, पीडियाट्रिक्स, इमरजेंसी मेडिसिन सहित विभिन्न विभागों में पर्यवेक्षित क्लीनिकल प्रशिक्षण मिलेगा। प्रशिक्षण में रोगी मूल्यांकन, रिहैबिलिटेशन योजना, क्लीनिकल डॉक्यूमेंटेशन, संक्रमण नियंत्रण और साक्ष्य —आधारित अभ्यास पर विशेष जोर रहेगा।
पांच वर्षीय यह समझौता योग्यता आधारित प्रशिक्षण, अतः —विषय अधिगम, संकाय सहभागिता एवं नियमित मूल्यांकन को बढ़ावा देगा और विद्यार्थियों को उच्चस्तरीय तृतीयक चिकित्सा संस्थान में व्यावहारिक अनुभव प्रदान करेगा।
