विदेशी दौरे के दौरान सुरक्षा उपाय के तौर पर डिकॉय विमान का इस्तेमाल करने वाले डोनल्ड ट्रंप पहले अमेरिकी राष्ट्रपति नहीं हैं। उनसे पहले भी अमेरिकी राष्ट्रपतियों की सुरक्षा के लिए इस तरह के बेहद गोपनीय और नाटकीय कदम उठाए जा चुके हैं।
द वाशिंगटन पोस्ट के अनुसार, जुलाई में ट्रंप एक सैन्य विमान से गुप्त रूप से तुर्की से रवाना हुए थे, जबकि व्हाइट हाउस ने सार्वजनिक रूप से यह दिखाया था कि वह अपने पारंपरिक एयर फोर्स वन विमान में यात्रा कर रहे हैं। यह कदम ईरान से संभावित खतरों से बचने के लिए उठाया गया था।
बिल क्लिंटन ने भी भारत-पाकिस्तान दौरे पर अपनाई थी यही रणनीति
यूएसए टुडे के मुताबिक, पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने भी साल 2000 में अपने भारत और पाकिस्तान दौरे के समय इसी तरह की रणनीति अपनाई थी। क्लिंटन बिना पहचान वाले विमान से भारत से पाकिस्तान गए थे, जो पारंपरिक एयर फोर्स वन के पीछे-पीछे उड़ान भर रहा था।
यह योजना तब तक गुप्त रखी गई जब तक कि कड़ी सुरक्षा के बीच इस्लामाबाद में उतरने के बाद क्लिंटन उस दूसरे विमान से बाहर नहीं आ गए। यह पाकिस्तान की उनकी छह घंटे की एक संक्षिप्त यात्रा थी।
पत्रकारों की सुरक्षा की चिंता
उस समय सुरक्षा की यह व्यवस्था इतनी असामान्य थी कि व्हाइट हाउस के अधिकारियों ने क्लिंटन के साथ यात्रा कर रहे प्रेस के सदस्यों को इन इंतजामों के बारे में पहले ही जानकारी दे दी थी। उस समय व्हाइट हाउस कॉरेस्पोंडेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष रहे एक पत्रकार ने बताया कि जो लॉकहार्ट और ओवल ऑफिस के अन्य अधिकारियों ने मुंबई से उड़ान भरने से पहले उनसे इस बारे में बात की थी।
इस ऑफ-द-रिकॉर्ड बातचीत के दौरान अधिकारियों ने असाधारण सुरक्षा उपायों और परिचित एयर फोर्स वन के साथ-साथ एक बड़े चार्टर्ड प्रेस विमान में यात्रा कर रहे पत्रकारों की सुरक्षा चिंताओं पर चर्चा की थी। यह प्रेस विमान व्हाइट हाउस के विमान से पहले ही इस्लामाबाद पहुंच गया था।
पत्रकार के अनुसार, वह उस प्रेस विमान में थे और जहां तक उन्हें पता था, वह एकमात्र ऐसे रिपोर्टर थे जिन्हें क्लिंटन के विमान बदलने की जानकारी थी। उन्होंने कहा कि जाहिर है, जब वह उतरे, तो दुनिया को पता चल गया कि उन्होंने एक बिना पहचान वाले विमान का इस्तेमाल किया था।