नेपाल में भयावह बाढ़ के मलबे से अब तक 1344 शव मिल चुके हैं। अधिकारियों का कहना है कि अब तक केवल 98 शव ही उनके स्वजनों को वापस किए जा चुके हैं। 700 से अधिक शवों को अस्थायी तौर पर दफनाया गया है।
उनकी डीएनए पहचान के लिए भारत से फोरेंसिक यूनिवर्सिटी से विशेषज्ञों का दल नेपाल में मौजूद है। इसके साथ ही बेंगलुरु के बोरिंग और लेडी कर्जन अस्पताल में नेपाल बाढ़ से प्रभावित लोगों के रिश्तेदारों के डीएनए सैंपल इकट्ठा करने के लिए एक नोडल सेंटर खोला गया है, जिससे अज्ञात शवों की पहचान करने में मदद मिलेगी।
बोरिंग और लेडी कर्जन हास्पिटल के डायरेक्टर और डीन डा. श्रीनिवासुलु नायडू ने कहा कि नेपाल बाढ़ से प्रभावित लोगों के करीबी रिश्तेदारों के रक्त नमूने इकट्ठा करने के लिए सरकार के निर्देशों के बाद यह सेंटर बनाया गया है।
उन्होंने कहा कि उनका केंद्र डीएनए के लिए नमूने एकत्र करेगा और फोरेंसिक साइंस लैबोरेटरी (एफएसएल) के पास भेजेगा। अस्पताल में फ़ोरेंसिक मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ. नागेश कुप्पास्ट ने कहा कि पीड़ित पक्ष के लोग वैध पहचान-पत्र साथ लाकर डीएनए फिंगरप्रिंटिंग के लिए नमूने दे सकते हैं।
उन्होंने कहा कि फर्स्ट-डिग्री रिश्तेदारों यानी पिता, माता, बेटा या बेटी के नमूनों से 50 प्रतिशत तक मिलान हो सकता है। वहीं, सेकंड-डिग्री में यह घटकर 25 प्रतिशत रह जाता है।
नेपाल बाढ़ में मारे गए लोगों की पहचान करने में कोई भी रिश्तेदार मदद कर सकता है। प्रेट्र के अनुसार, नेपाल पुलिस ने अब तक 2272 डीएनए नमूने एकत्र किए हैं।
इसमें 1260 नमूने शवों के और 1012 नमूने उन स्वजनों के हैं, जो अपनों को तलाश रहे हैं। अधिकारियों ने बताया कि अब तक 1030 शव अस्थायी तौर पर दफनाए गए हैं।
