वर्ष 2025–26 में चिकित्सा सेवा, शिक्षा, शोध एवं नवाचार के क्षेत्र में संस्थान की उल्लेखनीय उपलब्धियाँ
लखनऊ। डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ के षष्ठम स्थापना दिवस समारोह के अवसर पर संस्थान द्वारा वर्ष 2025–26 की प्रमुख उपलब्धियों एवं भावी योजनाओं की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथियों में उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक , राज्य मंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह तथा संस्थान के उपाध्यक्ष एवं अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा अमित कुमार घोष सहित शासन-प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी, संस्थान के अधिकारी, संकाय सदस्य, चिकित्सक, नर्सिंग एवं पैरामेडिकल स्टाफ, विद्यार्थी एवं अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

संस्थान की प्रगति रिपोर्ट में बताया गया कि वर्ष 2025–26 में चिकित्सा सेवाओं का उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। वर्तमान में संस्थान प्रतिदिन लगभग 5,000 बाह्य रोगियों तथा 600 आपातकालीन मरीजों को चिकित्सा सेवाएँ प्रदान कर रहा है। विगत वर्ष में 10 लाख से अधिक बाह्य रोगी परामर्श, 85 हजार से अधिक मरीजों को भर्ती तथा 40 हजार से अधिक बड़ी एवं छोटी शल्य चिकित्साएँ की गईं। इस अवधि में लगभग 7,200 सुरक्षित प्रसव भी कराए गए।
रोबोटिक सर्जरी एवं गुर्दा प्रत्यारोपण में उल्लेखनीय प्रगति
संस्थान में रोबोटिक सर्जरी का निरंतर विस्तार किया जा रहा है और अब तक 600 शल्य चिकित्साएँ रोबोट के माध्यम से की जा चुकी हैं। संस्थान में प्रदेश का दूसरा रोबोटिक गुर्दा प्रत्यारोपण भी सफलतापूर्वक किया गया। वर्ष 2025–26 में कुल 29 गुर्दा प्रत्यारोपण किए गए।
केंद्र एवं उत्तर प्रदेश सरकार की विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत पात्र मरीजों को निःशुल्क चिकित्सा सुविधा प्रदान करने की दिशा में भी संस्थान ने महत्वपूर्ण कार्य किया। पं. दीनदयाल उपाध्याय योजना, असाध्य रोग योजना, आयुष्मान भारत योजना तथा मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष के माध्यम से लगभग 205 करोड़ रुपये की धनराशि से 22,300 मरीजों का निःशुल्क उपचार किया गया।

मरीजों की सुविधा एवं पारदर्शिता पर विशेष ध्यान
मरीजों को सुरक्षित एवं पारदर्शी चिकित्सा सेवाएँ उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संस्थान में बेड-साइड क्यूआर कोड आधारित शिकायत एवं सुझाव व्यवस्था प्रारम्भ की गई है। साथ ही आपातकालीन विभाग में आने वाले मरीजों को एम्बुलेंस से उतारकर विभाग तक पहुँचाने के लिए सहायक कर्मी (पोर्टर) सुविधा शुरू की गई है। इस प्रकार की सुविधा प्रारम्भ करने वाला संस्थान सार्वजनिक क्षेत्र का पहला अस्पताल है।

मातृ एवं शिशु परिसर में मरीजों एवं तीमारदारों की सुविधा के लिए नया रेडियोलॉजी ब्लॉक प्रारम्भ किया गया है।
चिकित्सा सुविधाओं एवं आधारभूत संरचना का विस्तार
मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन एवं व्यक्तिगत समीक्षा से संस्थान के आधारभूत ढाँचे के विस्तार को गति मिली है। 1,010 शैय्यायुक्त अस्पताल के निर्माण तथा 1,085 नवीन पदों की स्वीकृति इस दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
इसके साथ ही शहीद पथ परिसर से लगी लगभग साढ़े चार एकड़ भूमि पर प्रदेश का दूसरा लेवल-1 ट्रॉमा सेंटर स्थापित किए जाने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ रही है। इसके निर्माण से गंभीर दुर्घटना एवं आघात के मरीजों के उपचार की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
नर्सिंग उत्कृष्टता में राष्ट्रीय सम्मान
नर्सिंग सेवाओं में उत्कृष्टता के लिए संस्थान को द इकोनॉमिक टाइम्स द्वारा “हॉस्पिटल ऑफ द ईयर इन नर्सिंग एक्सीलेंस” पुरस्कार से सम्मानित किया गया। राष्ट्रीय स्तर पर यह सम्मान प्राप्त करने वाला संस्थान एकमात्र सरकारी संस्थान रहा।

चिकित्सा शिक्षा एवं शोध को बढ़ावा
वर्तमान में संस्थान में प्रतिवर्ष 200 एमबीबीएस, 107 एमडी/एमएस, 40 डीएम/एम.सीएच. तथा 4 डीएनबी सीटें उपलब्ध हैं। इसके अतिरिक्त बी.एससी. नर्सिंग एवं विभिन्न पैरामेडिकल पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। संस्थान में प्रारम्भ किए गए पीएच.डी. पाठ्यक्रम में वर्तमान में 45 शोधार्थी अध्ययनरत हैं।
वर्ष 2025–26 के दौरान संस्थान में 148 शोध परियोजनाएँ तथा 20 नैदानिक परीक्षण संचालित किए गए और लगभग 12 करोड़ रुपये की बाह्य शोध निधि प्राप्त हुई। संस्थान के शोधकर्ताओं द्वारा इस वर्ष 4 पेटेंट भी प्राप्त किए गए।
स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग, भारत सरकार द्वारा संस्थान को देश के चयनित 16 संस्थानों में शामिल करते हुए तकनीकी संसाधन केंद्र के रूप में चुना गया है। शोध एवं अकादमिक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए इस वर्ष विभिन्न राष्ट्रीय संस्थानों के साथ 8 नए समझौता ज्ञापन (एमओयू) किए गए, जिसके साथ संस्थान द्वारा किए गए समझौता ज्ञापनों की कुल संख्या 31 हो गई है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) एवं यूनिसेफ के सहयोग से संस्थान द्वारा सीसा विषाक्तता जैसे महत्वपूर्ण जनस्वास्थ्य विषय पर प्रदेशव्यापी अध्ययन भी किया जा रहा है।

गुणवत्ता एवं मरीजों की सुरक्षा
उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाओं के लिए संस्थान को द्वितीय अवधि की एनएबीएच मान्यता प्राप्त हुई है। यह उपलब्धि मरीजों की सुरक्षा, गुणवत्ता एवं बेहतर चिकित्सा सेवाओं के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
मानव संसाधन को मिली मजबूती
वर्ष 2025–26 में संस्थान में 650 नर्सिंग अधिकारियों तथा 194 तकनीकी संवर्ग के कार्मिकों की नियुक्ति की गई। इससे चिकित्सा, नर्सिंग, तकनीकी एवं शिक्षण सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ किया गया है।
सामाजिक उत्तरदायित्व एवं सामुदायिक स्वास्थ्य
संस्थान अस्पताल परिसर से बाहर भी सामुदायिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। हृदय सेतु परियोजना के अंतर्गत एसटीईएमआई केयर कार्यक्रम के माध्यम से 10 जिलों को हब एवं स्पोक मॉडल से जोड़कर हृदयाघात के मरीजों को समयबद्ध उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है।
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उन्नत भारत अभियान के अंतर्गत संस्थान द्वारा पाँच ग्राम गोद लिए गए हैं, जहाँ सामुदायिक चिकित्सा विभाग द्वारा नियमित स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम, स्वास्थ्य परीक्षण शिविर एवं अन्य सामुदायिक गतिविधियाँ आयोजित की जा रही हैं।
माननीय राज्यपाल महोदया की प्रेरणा से बाराबंकी स्थित राजकीय बालिका सम्प्रेक्षण गृह को भी संस्थान द्वारा गोद लिया गया है। वहाँ कंप्यूटर लैब की स्थापना के साथ एचपीवी टीकाकरण, स्वास्थ्य एवं कल्याण गतिविधियाँ तथा मानसिक परामर्श जैसी सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं।
पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के तहत संस्थान एवं उसके कर्मचारियों द्वारा वृक्षारोपण अभियान में लगभग 10,000 पौधे लगाए गए।
भावी योजनाएँ
आगामी समय में संस्थान का विशेष ध्यान 1,010 शैय्यायुक्त ब्रॉड-स्पेशियलिटी अस्पताल, 100 शैय्यायुक्त क्रिटिकल केयर ब्लॉक, 510 शैय्यायुक्त पीआरए, बहुस्तरीय पार्किंग, 888 क्षमता वाले बालक एवं बालिका छात्रावास, नर्सिंग कॉलेज तथा खेल परिसर सहित विभिन्न निर्माण एवं विस्तार परियोजनाओं को आगे बढ़ाने पर रहेगा।
सुपर-स्पेशियलिटी विभागों एवं आपातकालीन विभाग में शैय्याओं की संख्या बढ़ाने, न्यूरोसाइंसेज सेंटर एवं क्रिटिकल केयर ब्लॉक के संचालन के लिए स्वीकृत 1,085 नवीन पदों पर पूर्ण पारदर्शिता के साथ नियुक्तियाँ करने की दिशा में भी कार्य किया जाएगा।
इसके अतिरिक्त भविष्य में बर्न एवं प्लास्टिक सर्जरी विभाग, प्रजनन चिकित्सा विभाग तथा वृद्धजन देखभाल केंद्र प्रारम्भ करने की योजना है।
संस्थान का लक्ष्य डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान को न केवल प्रदेश के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में, बल्कि रोगी देखभाल, शिक्षण, अनुसंधान एवं नवाचार के क्षेत्र में देश के अग्रणी चिकित्सा संस्थानों में स्थापित करना है।
षष्ठम स्थापना दिवस के अवसर पर संस्थान ने सभी संकाय सदस्यों, चिकित्सकों, रेजिडेंट चिकित्सकों, नर्सिंग अधिकारियों, पैरामेडिकल एवं तकनीकी कर्मचारियों, अधिकारियों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों के योगदान के प्रति आभार व्यक्त किया। साथ ही मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, राज्य मंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार, चिकित्सा शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य विभाग तथा शासन एवं प्रशासन के सभी वरिष्ठ अधिकारियों के निरंतर मार्गदर्शन एवं सहयोग के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया गया।
