• घरेलू हिंसा की शिकार महिला, घर से बिछड़ी बेटी, बहन या माता अथवा किसी निराश्रित महिला के लिए राजकीय महिला शरणालय सहारा बनेगा : मुख्यमंत्री
• गोरखपुर में 100 बेड का महिला शरणालय बनकर तैयार हो जाने से निराश्रित महिला को अब भटकना नहीं पड़ेगा
• 01 करोड़ 10 लाख परिवारों को 12,000 रु0 वार्षिक पेंशन की सुविधा का लाभ मिल रहा, 80 करोड़ लोगों को निःशुल्क राशन उपलब्ध कराया जा रहा
• कोविड कालखण्ड में जिन बच्चों ने अपने अभिभावकों को खोया, सरकार उनके साथ खड़ी, ऐसे बच्चों को 4,000 रु0 प्रतिमाह छात्रवृत्ति प्रदान की जा रही
• लाखों बहनें लखपति दीदी बनकर स्वावलम्बन का जीवन व्यतीत कर रहीं
• लखनऊ से गोरखपुर की दूरी कम हुई, पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे के लिंक एक्सप्रेस-वे के माध्यम से वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध हुआ
लखनऊ| उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि घरेलू हिंसा की शिकार महिला, घर से बिछड़ी बेटी, बहन या माता अथवा किसी निराश्रित महिला के लिए राजकीय महिला शरणालय सहारा बनेगा। सरकार ऐसे लोगों का सहारा बनती है और उनके वैधानिक अभिभावकों से मिलाने का प्रयास करती है। आवश्यक कानूनी सहयोग उपलब्ध कराने के साथ ही, सरकार उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़कर आगे बढ़ाने के लिए कार्य करती है।
मुख्यमंत्री आज जनपद गोरखपुर में महिलाओं/संवासिनियों को सुरक्षित एवं सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराने के लिए आधुनिक सुविधाओं वाले राजकीय महिला शरणालय के लोकार्पण कार्यक्रम को सम्बोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने ‘उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना’ के लाभार्थी बच्चों को लैपटॉप वितरित किये।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गोरखपुर में 100 बेड का महिला शरणालय बनकर तैयार हो जाने से किसी कारणवश घर छोड़कर निकलने वाली बेटी, घरेलू हिंसा की शिकार अथवा किसी अन्य निराश्रित महिला को अब भटकना नहीं पड़ेगा। गोरखपुर मण्डल का यह महिला शरणालय ऐसी महिलाओं के लिए व्यवस्थित रूप से संचालित होगा।
आधी आबादी को सम्मान और सुरक्षा मिले तथा वह स्वावलम्बन के पथ पर आगे बढ़कर विकसित भारत की संकल्पना को साकार करने में सहभागी बने, इसके लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में डबल इंजन सरकार बिना रुके, बिना डिगे और बिना झुके निरन्तर कार्य कर रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि महिला कल्याण के क्षेत्र में सरकार ने बेटी के जन्म से लेकर उसकी शिक्षा, विवाह, रोजगार, सामाजिक सुरक्षा और जीवन के विभिन्न चरणों तक सहायता की व्यवस्था की है। बेटी के जन्म पर ‘प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना’ के माध्यम से परिवार को सहायता मिलती है। ‘मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना’ के अन्तर्गत बेटी के जन्म से लेकर स्नातक तक की पढ़ाई के लिए 25,000 रुपये धनराशि का पैकेज उपलब्ध कराया जा रहा है। बेटी के विवाह योग्य होने पर ‘मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना’ के अन्तर्गत 01 लाख रुपये की सहायता दी जा रही है।
यदि किसी महिला के सामने निराश्रित होने का संकट हो, किसी को सहारे की आवश्यकता हो अथवा बुजुर्ग अवस्था में कोई आर्थिक संकट उत्पन्न हो, तो उसे वृद्धावस्था पेंशन सहित अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ा जा रहा है। कामकाजी महिलाओं के लिए छात्रावास की व्यवस्था की जा रही है। बेसिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक प्रत्येक बेटी, बहन और नारी के लिए सुविधाएं उपलब्ध करायी जा रही हैं।
बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में प्रवेश लेने वाले बच्चों को दो यूनिफॉर्म, बैग, पुस्तकें, जूते, मोजे और स्वेटर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। बेटियों और बेटों दोनों को इसका लाभ प्राप्त हो रहा है। प्रदेश के 01 करोड़ 60 लाख बच्चों को यह सुविधा दी जा रही है। 01 करोड़ 10 लाख परिवारों को 12,000 रुपये की वार्षिक पेंशन की सुविधा का लाभ मिल रहा है। 80 करोड़ लोगों को निःशुल्क राशन उपलब्ध कराया जा रहा है। ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ और ‘मुख्यमंत्री आवास योजना’ के अन्तर्गत 65 लाख लोगों को आवास उपलब्ध कराए गए हैं।
पूर्व में कई बार जब ग्राम पंचायत की भूमि पर गरीब अपना मकान बनाता था, तो दबंग उस पर कब्जा कर लेते थे। मकान क्षतिग्रस्त होने पर उसे दोबारा नहीं बनाने देते थे। आज सरकार ने सुनिश्चित किया है कि जहां गरीब का मकान है, वहां उसे घरौनी मिले और घर की महिला सदस्य के नाम पर भूमि का अधिकार दर्ज हो। इससे गरीब परिवारों और महिलाओं को स्वामित्व एवं सुरक्षा का आधार मिला है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज गरीब परिवारों के पास रसोई गैस सिलेण्डर, विद्युत कनेक्शन और आयुष्मान कार्ड जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। उन्हें चिन्ता करने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि डबल इंजन सरकार उनके साथ खड़ी है। महिला शरणालय भी इसी सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने का प्रयास है।
वर्ष 2017 से पूर्व, प्रदेश में भय का माहौल था। शरीफ और सज्जन व्यक्ति भी असुरक्षित महसूस करता था। माता-पिता अपनी बेटियों की सुरक्षा को लेकर चिन्तित रहते थे। प्रदेश के अनेक जनपदों में बेटियों की पढ़ाई संकट में थी। संसाधनों का अभाव था। स्कूल व कॉलेज बहुत कम थे और जो थे, वे भी सुरक्षित नहीं थे।
पूर्व में योजनाओं का लाभ गरीब तक नहीं पहुंचता था। गरीब के राशन और पेंशन में भ्रष्टाचार होता था और उसकी जमीन पर कब्जा कर लिया जाता था। आज प्रदेश में ऐसी स्थिति पैदा नहीं होती। पर्व और त्योहारों के पहले उपद्रव नहीं होता। प्रदेश कर्फ्यू, दंगा, भय, गुंडागर्दी और अवैध कब्जों से मुक्त वातावरण में आगे बढ़ रहा है। यह परिवर्तन तब आया, जब समाज और सरकार ने एक दिशा में मिलकर कार्य किया।
कोविड कालखण्ड में जिन बच्चों ने अपने अभिभावकों को खोया, सरकार उनके साथ खड़ी हुई। ऐसे बच्चों को 4,000 रुपये प्रतिमाह छात्रवृत्ति प्रदान की जा रही है। उन्हें पढ़ाई के लिए टैबलेट उपलब्ध कराए गए हैं, ताकि वे शिक्षा प्राप्त कर आगे बढ़ सकें। आज युवाओं को नौकरी मिल रही है। घरों में रोजगार के अवसर पहुंचे हैं और शासन की सुविधाओं का विस्तार हुआ है। अच्छी शिक्षा, अच्छा स्वास्थ्य और बेहतर कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने के लिए कार्य हुआ है।
वर्ष 2017 से पूर्व पूर्वी उत्तर प्रदेश में इन्सेफेलाइटिस जैसी बीमारियां बच्चों को निगल जाती थीं। तत्कालीन सरकारों के स्तर पर इस गम्भीर समस्या का प्रभावी समाधान नहीं किया गया। सैकड़ों बच्चे मस्तिष्क ज्वर का शिकार होते थे। आज सरकार ने इन्सेफेलाइटिस से बचाव और उपचार की पुख्ता व्यवस्था की है। बी0आर0डी0 मेडिकल कॉलेज में वर्ष 2017 से पहले जहां लगभग 500 बच्चों की मौत होती थी, आज मौत के आंकड़े शून्य हैं। निरन्तर प्रयास से बड़े से बड़ा परिवर्तन सम्भव है। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप स्वास्थ्य के क्षेत्र में परिवर्तन दिखायी दे रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज महिलाएं प्रत्येक क्षेत्र में बेहतर कार्य कर रही हैं। आजमगढ़ में बाबा गोरखनाथ मिल्क प्रोड्यूसर के माध्यम से गांव-गांव में दुग्ध समितियां बनाई गई हैं, जहां गाय और भैंस का दूध एकत्र किया जाता है। झांसी, आगरा, काशी, गोरखपुर और लखनऊ में पांच मिल्क प्रोड्यूसर कार्य कर रहे हैं। लाखों बहनें लखपति दीदी बनकर स्वावलम्बन का जीवन व्यतीत कर रहीं हैं। महिलाएं ड्रोन दीदी के रूप में नई तकनीक से जुड़ रही हैं। बी0सी0 सखी के रूप में महिलाएं गांव में बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध कराकर आय अर्जित कर रही हैं।
परम्परागत उद्यमों को प्रोत्साहन देने के परिणामस्वरूप प्रदेश में 96 लाख एम0एस0एम0ई0 इकाइयां स्थापित हैं। इनसे 03 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार मिला है। इनमें से लाखों इकाइयों का संचालन महिलाएं कर रही हैं। प्रदेश का स्टार्टअप ईकोसिस्टम मजबूत हुआ है। 24,000 से अधिक स्टार्टअप आज प्रदेश की क्षमता को देश और दुनिया के समक्ष प्रदर्शित कर रहे हैं। इस क्षेत्र में महिलाएं और बालिकाएं भी मजबूती से आगे बढ़ रही हैं। युवा अब केवल नौकरी लेने वाला नहीं, बल्कि नौकरी देने वाला बन रहा है।
महिला स्वावलम्बन और सशक्तिकरण के लिए प्रधानमंत्री के नेतृत्व में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ संसद से पारित कराया गया है। पंचायतों के बाद विधानसभा और लोकसभा में भी महिलाओं को आरक्षण का लाभ दिलाने की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। सरकार प्रत्येक नारी की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलम्बन तथा प्रत्येक युवा की अच्छी शिक्षा और रोजगार के लिए पूरी सजगता और तत्परता से कार्य कर रही है। मिशन रोजगार इसी दिशा में संचालित अभिनव कार्यक्रम है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में अब तक 09 लाख से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी दी जा चुकी है। सरकार ने ऐसी व्यवस्था बनाई है कि प्रदेश के युवाओं को रोजगार देने का कार्य लगातार जारी रहेगा।
प्रदेश और गोरखपुर में अलग-अलग क्षेत्रों में नई सम्भावनाएं बनी हैं तथा आधारभूत ढांचा विकसित हुआ है। मेडिकल कॉलेज की सड़क, झुंगिया गेट से फर्टिलाइजर तथा भटहट तक 4-लेन, एच0एन0 सिंह चौराहे से गोरखनाथ थाने तक बेहतर कनेक्टिविटी तथा बरगदवा से स्पोर्ट्स कॉलेज होते हुए मोदीपुर तक 4-लेन कनेक्टिविटी जैसी सुविधाएं विकसित हुई हैं।
लखनऊ से गोरखपुर की दूरी कम हुई है और पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे के लिंक एक्सप्रेस-वे के माध्यम से वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध हुआ है। वाराणसी तक जहां पहले 06 से 07 घण्टे लगते थे, आज लगभग ढाई घण्टे में पहुंचा जा सकता है। आज गोरखपुर से देश और दुनिया के विभिन्न स्थानों के लिए हवाई सेवाएं उपलब्ध हैं। देश के विभिन्न हिस्सों तक जाने के लिए बेहतर रेल सुविधाएं भी हैं। यह सुविधाएं इसलिए सम्भव हुईं, क्योंकि डबल इंजन सरकार जनता के सुख-दुःख में उसके साथ खड़ी है और प्रत्येक प्रकार का सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है।
मुख्यमंत्री ने श्रीहरि विष्णु के महत्वपूर्ण अवतार भगवान वामन की पावन जयन्ती के अवसर पर प्रदेशवासियों को बधाई दी।
कार्यक्रम को गोरखपुर के सांसद रवि किशन शुक्ल ने भी सम्बोधित किया।
इस अवसर पर कुशीनगर के सांसद विजय दुबे, विधायक फतेह बहादुर सिंह, विपिन सिंह, महेन्द्र पाल सिंह, प्रदीप शुक्ला, श्रवण कुमार निषाद, गोरखपुर के महापौर डॉ0 मंगलेश कुमार श्रीवास्तव, उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष चारू चौधरी सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
