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विपरीत परिस्थितियों पर विजय: एक नई मिसाल

केजीएमयू के ट्रॉमा सर्जनों ने तीन घंटे की जटिल सर्जरी में चाकू से हुए वक्षीय आर-पार घाव के बाद सुपीरियर वेना कावा की दुर्लभ एवं जानलेवा चोट का सफल उपचार किया

लखनऊ: किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू), लखनऊ के लेवल-1 ट्रॉमा सेंटर के चिकित्सकों ने 57 वर्षीय एक मरीज का जीवन सफलतापूर्वक बचाया, जिसे कुशीनगर से दाहिने वक्ष (छाती) में चाकू लगने के बाद रेफर किया गया था। मरीज आपातकालीन विभाग में उस समय पहुँचा जब चाकू अभी भी उसकी छाती में धँसा हुआ था। उसे सुपीरियर वेना कावा (एसवीसी)—जो शरीर के ऊपरी भाग से रक्त को हृदय तक पहुँचाने वाली सबसे बड़ी शिराओं में से एक है—की अत्यंत दुर्लभ एवं संभावित रूप से घातक चोट लगी थी।

अस्पताल पहुँचते ही मरीज का त्वरित पुनर्जीवन (रिससिटेशन) किया गया। समय से पहले चाकू निकालने से जानलेवा रक्तस्राव होने की आशंका को देखते हुए ट्रॉमा टीम ने शल्यक्रिया तक चाकू को उसी स्थिति में रहने दिया।

तत्काल किए गए कॉन्ट्रास्ट-एन्हांस्ड सीटी स्कैन में पाया गया कि चाकू का सिरा सुपीरियर मीडियास्टिनम तक पहुँच चुका था तथा सुपीरियर वेना कावा, महाधमनी (एओर्टा) के आर्च, उसकी प्रमुख शाखाओं, कैरोटिड धमनियों तथा सबक्लेवियन रक्तवाहिनियों के अत्यंत निकट स्थित था। इस इमेजिंग ने शल्यक्रिया की सटीक योजना बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

चाकू सुपीरियर वेना कावा को भेदते हुए कई प्रमुख रक्तवाहिनियों के बिल्कुल समीप स्थित था, जिससे उसका थोड़ा-सा भी हिलना या समय से पहले निकालना जानलेवा सिद्ध हो सकता था। इसलिए टीम ने पहले सुरक्षित रूप से रक्तवाहिनियों पर नियंत्रण स्थापित किया और उसके बाद प्रत्यक्ष दृष्टि में अत्यंत सावधानीपूर्वक चाकू को निकाला।

जैसा अनुमान था, चाकू निकालते ही सुपीरियर वेना कावा से तीव्र शिरापरक रक्तस्राव शुरू हो गया, जिसे तुरंत नियंत्रित कर शिरा की सफल मरम्मत की गई। लगभग तीन घंटे तक चली इस जटिल शल्यक्रिया के दौरान छह यूनिट रक्त एवं रक्त अवयवों की आवश्यकता पड़ी। वर्तमान में मरीज स्वस्थ हो रहा है।

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