नहीं रहे 4 बार MLA रहे दिग्गज नेता यदुनाथ सिंह पटेल, रवींद्र पटेल ने कहा एक युग का अंत

अखिलेश कृष्ण मोहन

मिर्जापुर/चुनार. पूर्वांचल में पटेल समुदाय के दिग्गज नेता यदुनाथ सिंह पटेल नहीं रहे। उन्होंने चुनार के अपने पैतृक गांव नियामतपुर में 31 मई को आखिरी सांस ली। बीएचयू से मकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर छात्र जीवन से राजनीति की शुरुआत करने वाले यदुनाथ सिंह पटेल सामाजिक न्याय के विचारों वाले नेता थे। वह चौधरी चरण सिंह, मुलायम सिंह यादव, चौधरी अजीत सिंह और विश्वनाथ प्रताप सिंह के साथ काम किए। उत्तर प्रदेश विधानसभा में आज भी उनका नाम सम्मान के साथ लिया जाता है। जिस तरह से इलाहाबाद में राम पूजन पटेल ने राजनीतिक चेतना की अलख जगाई उसी तरह से मिर्जापुर और चुनार में यदुनाथ सिंह पटेल पटेल समुदाय के लिए सियासी आदर्श बने रहे। यदुनाथ सिंह पटेल की तीसरी पीढ़ी भी राजनीति में है। उनके नाती रविंद्र सिंह पटेल राष्ट्रीय लोक दल की युवा इकाई में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं।

रविंद्र पटेल कहते हैं कि यदुनाथ सिंह पटेल पूर्वांचल के सियासी जगत में एक बड़ा नाम था। वह जीवन पर्यंत संघर्षों के रास्ते पर चलकर जनता की सेवा किये और जिले से लेकर प्रदेश तक अपने कीर्तिमान स्थापित किये, अपने सम्पूर्ण जीवन में उन्होंने सादगी और ईमानदारी को ही अपना पथप्रदर्शक माना। छात्र जीवन से ही क्रांतिकारी विचार के यदुनाथ सिंह पटेल जी गरीबी और अन्याय को करीब से देखा और उसके खिलाफ संघर्ष करना प्रारंभ किया। 1977 में मुग़लसराय क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में इन्होंने तब के चर्चित नेता व विधायक जंगी यादव को कड़ा मुकाबला दिया था, लेकिन चुनाव हार गए थे।

रविंद्र सिंह पटेल आगे कहते हैं कि जंगी यादव ने किसानों के मसीहा चौधरी चरण सिंह से यदुनाथ सिंह पटेल की मुलाकात करवाई और वर्ष 1980 में चुनार से ऐतिहासिक जीत दर्ज करके अपना नाम संघर्ष और गरीबों के मसीहा के रूप में दर्ज किया। 1980 और 1985 लोकदल तथा 1989 और 1991 में जनतादल से लगातार चार बार विधायक रहे और जीवनपर्यंत चौधरी परिवार के करीबियों में रहे। 1991 के नामांकन जुलूस को “लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड” में दर्ज करवाया था उन्होंने। अपने राजनैतिक जीवन के तमाम उतार चढ़ाव के बाद भी यदुनाथ सिंह पटेल (जनतादल अ) के प्रदेश अध्यक्ष रहे।

वर्ष 1996 में जनतादल सेकुलर से चुनाव लड़े और पूर्व प्रधानमंत्री देवगौड़ा की ऐतिहासिक रैली करवा कर विरोधियों में अपनी लोकप्रियता का लोहा मनवाया। 2002 में भाजपा और जनता दल (यू) से राजगढ़ से चुनाव लड़े और हारे, फिर 2007 में राष्ट्रीय लोकदल से चुनार से चुनाव लड़े और वही चुनाव यदुनाथ सिंह पटेल के जीवन का अंतिम चुनाव रहा। लगातार गिरते स्वास्थ्य की वजह से सक्रिय राजनीति से अलग होते चले गए, लेकिन आज भी जब यदुनाथ सिंह पटेल का नाम कहीं भी आता है, तो लोग बड़े अदब और सम्मान के साथ लेते है। यदुनाथ सिंह पटेल जी अक्सर कहा करते थे- “तू जमाना बदल” जीवनभर किसान, गरीब, असहाय की मदद और सेवा करते हुए 31 मई 2020 की रात्रि 9 बजे अंतिम सांस लिए। यदुनाथ सिंह पटेल की 4 पुत्रियां और एक पुत्र धनंजय सिंह हैं। यदुनाथ सिंह पटेल के दूसरे दामाद विनोद कटियार भोगनीपुर, कानपुर देहात से विधायक हैं।

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