हर माता-पिता अपने बच्चे की सुरक्षा को लेकर हमेशा सतर्क रहते हैं। अक्सर टीकाकरण के समय यह डर सताता है कि कहीं इसका नन्हे बच्चे की सेहत पर कोई बुरा असर तो नहीं पड़ेगा? क्या टीकों से मिर्गी जैसी गंभीर समस्या हो सकती है? अगर आपके मन में भी ऐसे सवाल हैं, तो यह खबर आपके लिए एक बड़ी राहत लेकर आई है।
अक्सर माता-पिता के मन में छोटे बच्चों को लगने वाले टीकों को लेकर कई तरह की चिंताएं होती हैं, लेकिन हाल ही में हुए एक बड़े शोध ने इन चिंताओं को दूर कर दिया है। अमेरिकी रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (CDC) के नेतृत्व में किए गए एक नए अध्ययन से यह स्पष्ट हो गया है कि बचपन में लगाए जाने वाले टीकों का मिर्गी के जोखिम से कोई संबंध नहीं है। यह महत्वपूर्ण शोध प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल ‘द जर्नल ऑफ पीडियाट्रिक्स’ में प्रकाशित हुआ है।
टीकों में मौजूद एल्युमीनियम से भी खतरा नहीं
इस अध्ययन की सबसे खास बात यह है कि इसमें टीकों के भीतर इस्तेमाल होने वाले ‘एल्युमीनियम’ की भी गहराई से जांच की गई। एल्युमीनियम साल्ट्स का उपयोग आमतौर पर टीकों में ‘सहायक पदार्थ’ के रूप में किया जाता है, जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को बढ़ाने में मदद करता है।
अक्सर लोग इस बात को लेकर चिंतित रहते हैं कि क्या टीकों में मौजूद एल्युमीनियम बच्चों के नर्वस सिस्टम को नुकसान पहुंचा सकता है? शोधकर्ताओं ने टीकों के कार्यक्रम और उनमें मिलीग्राम में मापे गए एल्युमीनियम की मात्रा की जांच की। नतीजे बताते हैं कि एल्युमीनियम से मिर्गी जैसी तंत्रिका संबंधी स्थिति का जोखिम बिल्कुल नहीं बढ़ता है।
कैसे किया गया यह शोध?
शोधकर्ताओं की टीम ने इस अध्ययन को बहुत ही विस्तृत तरीके से अंजाम दिया। इस रिसर्च में 1 से 4 वर्ष से कम आयु के बच्चों को शामिल किया गया। अध्ययन को दो समूहों में बांटा गया था:
पहला समूह: इसमें 2,089 ऐसे बच्चे शामिल थे जिन्हें मिर्गी का दौरा पड़ा था।
दूसरा समूह: इनकी तुलना 20,139 ऐसे बच्चों से की गई जिन्हें मिर्गी की बीमारी नहीं थी।
तुलना करते समय बच्चों की आयु, लिंग और स्वास्थ्य देखभाल केंद्र जैसी समानताओं का पूरा ध्यान रखा गया। इस अध्ययन में शामिल अधिकांश बच्चे लड़के थे (54 प्रतिशत) और अधिकतर बच्चों की उम्र एक वर्ष से 23 महीने के बीच थी (69 प्रतिशत)।
टीकों के बाद कोई ‘हाई रिस्क’ नहीं
अध्ययन के अंत में शोधकर्ताओं ने पाया कि टीकाकरण कार्यक्रम का पालन करने वाले बच्चों में मिर्गी का कोई भी बढ़ा हुआ खतरा नहीं देखा गया। टीम ने स्पष्ट किया कि चाहे नियमित टीके हों या उनमें इस्तेमाल होने वाले सहायक पदार्थ, इनका मिर्गी के जोखिम से कोई लेना-देना नहीं है। यह अध्ययन उन सभी माता-पिता के लिए आश्वस्त करने वाला है जो टीकाकरण को लेकर सुरक्षा संबंधी चिंताओं से घिरे रहते हैं।
