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मिडिल ईस्ट में जारी जंग का असर अब भारत में दिखा, गैस की किल्लत से महंगी हुई चीजें

LPG Crisis Impact | मिडिल ईस्ट में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी जंग का असर अब भारत में भी दिखने लगा है। सबसे बड़ा संकट एलपीजी गैस को लेकर सामने आ रहा है। गैस की कीमतें बढ़ रही हैं, कमर्शियल सिलेंडर के ऑर्डर रोके जा रहे हैं और इसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ रहा है।
जंग भले ही भारत से करीब 3000 किलोमीटर दूर चल रही हो, लेकिन इसका असर देश की रसोई तक पहुंच गया है। एलपीजी की कमी के चलते चाय-नाश्ते से लेकर होटल और रेस्टोरेंट के खाने तक सब कुछ महंगा होने लगा है। जो चाय पहले 10 रुपये में मिलती थी, वह अब 15 से 20 रुपये में बिक रही है।
गैस की किल्लत की वजह से कई छोटे ढाबों और रेस्टोरेंट्स को अपना मेन्यू तक बदलना पड़ रहा है। पूरी-सब्जी और अन्य खाने की चीजों के दाम भी बढ़ गए हैं। कई जगहों पर कमर्शियल गैस सिलेंडर मिलना मुश्किल हो गया है।
दुकानदारों का कहना है कि अब सिलेंडर के लिए लंबी लाइनों में लगना पड़ रहा है। इतना ही नहीं, कई जगह सिलेंडर ब्लैक में भी बिक रहा है। जहां पहले 19 किलो का कमर्शियल सिलेंडर करीब 2000 रुपये में मिल जाता था, वहीं अब इसकी कीमत 2500 से 2800 रुपये तक पहुंच गई है।
इस संकट की बड़ी वजह होर्मुज स्ट्रेट में आई रुकावट बताई जा रही है। दरअसल भारत अपनी जरूरत का 60 फीसदी से ज्यादा एलपीजी विदेशों से मंगाता है और इनमें से करीब 85 से 90 फीसदी सप्लाई इसी रास्ते से आती है।
देश में हर साल करीब 31 मिलियन टन एलपीजी की खपत होती है। इसमें से करीब 87 फीसदी गैस घरों में इस्तेमाल होती है, जबकि बाकी होटल और रेस्टोरेंट में जाती है।
सरकार ने हालात को देखते हुए तेल कंपनियों को घरेलू एलपीजी उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए हैं, ताकि घरों में गैस की कमी न हो। लेकिन कमर्शियल सिलेंडर के ऑर्डर रुकने से छोटे कारोबारियों और रेस्टोरेंट मालिकों की मुश्किलें बढ़ गई हैं
यानी मिडिल ईस्ट की जंग का असर अब भारत के बाजार और आम लोगों की जेब पर साफ दिखाई देने लगा है। अगर हालात जल्द नहीं सुधरे तो आने वाले दिनों में खाने-पीने की चीजें और भी महंगी हो सकती हैं।

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