प्रतीक की अस्थियां विसर्जित, अपर्णा फूट-फूटकर रोईं:हरिद्वार में बेटी ने कलश माथे से लगाया, ‘आई लव पापा’ का कार्ड प्रवाहित किया
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के भाई प्रतीक यादव की अस्थियां हरिद्वार के वीआईपी घाट पर गंगा में विसर्जित की गईं।
लखनऊ/देहरादून/हरिद्वार। हरिद्वार के पवित्र गंगा घाट पर शनिवार को ऐसा भावुक दृश्य देखने को मिला, जिसने वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम कर दीं। स्वर्गीय प्रतीक यादव की अंतिम विदाई के दौरान उनकी छोटी बेटी ने अपने पिता की अस्थियों के कलश को सीने से लगाकर लंबे समय तक पकड़े रखा। सबसे मार्मिक पल तब आया, जब बच्ची ने “आई लव यू पापा” लिखा एक छोटा सा कार्ड गंगा में प्रवाहित किया। घाट पर मौजूद लोग यह दृश्य देखकर खुद को संभाल नहीं सके। कई लोगों की आंखों से आंसू छलक पड़े। यह सिर्फ एक धार्मिक रस्म नहीं थी, बल्कि एक बेटी की अपने पिता से आखिरी भावुक विदाई थी, ऐसी विदाई जिसे देखकर हर कोई भीतर तक टूट गया।


अस्थि विसर्जन के दौरान बच्ची बार-बार अपने परिवार के करीब सिमटी रही। वह कभी कलश को देखती, कभी गंगा की ओर, और कभी अपनों के चेहरों को। मौजूद लोगों के अनुसार बच्ची शायद पूरी तरह समझ नहीं पा रही थी कि आखिर क्या हो रहा है। उसे बस इतना एहसास था कि उसके “पापा” अब उसके पास नहीं लौटेंगे।
जिस पिता के कंधों पर बैठकर उसने दुनिया देखी थी, आज उसी पिता की अस्थियों को वह अपनी छोटी बाहों में थामे खड़ी थी। यह दृश्य इतना भावुक था कि वहां मौजूद कई लोग अपने आंसू नहीं रोक पाए।

“आई लव यू पापा” लिखकर दी आखिरी विदाई
परिवार के लोगों ने बताया कि बच्ची ने खुद अपने हाथों से एक छोटा कार्ड तैयार किया था, जिस पर लिखा था-“I Love You Papa” अस्थि विसर्जन के दौरान उसने कांपते हाथों से वह कार्ड गंगा में प्रवाहित किया। उस पल घाट पर ऐसा सन्नाटा छा गया मानो हर किसी ने उस मासूम दर्द को महसूस कर लिया हो। कई लोगों ने कहा कि यह दृश्य जिंदगी भर भूल पाना मुश्किल होगा।


अपर्णा यादव भी हुईं भावुक
अस्थि विसर्जन के दौरान Aparna Yadav अपनी दोनों बेटियों के साथ मौजूद रहीं। छोटी बेटी को भावुक हालत में देखकर अपर्णा यादव भी खुद को संभाल नहीं पाईं। उन्होंने कई बार बच्ची को सीने से लगाया और उसे ढांढस बंधाने की कोशिश की। परिवार के अन्य सदस्य भी लगातार बच्ची को संभालते नजर आए। गंगा घाट पर मौजूद हर शख्स उस दर्द को महसूस कर रहा था, जो एक मासूम बच्ची अपने पिता को खोने के बाद झेल रही थी।
वहां मौजूद कई लोगों ने कहा कि कुछ दर्द ऐसे होते हैं जिन्हें शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। एक महिला श्रद्धालु ने भावुक होकर कहा-जब एक छोटी बच्ची अपने पिता की अस्थियों को सीने से लगाकर रोती है, तब इंसान समझ जाता है कि दुनिया का सबसे बड़ा दुख क्या होता है। कई लोगों ने बच्ची को देखकर अपनी आंखें पोंछीं। घाट पर मौजूद कुछ लोग तो खुद को संभालने के लिए वहां से कुछ देर दूर चले गए।
पिता का साया उठते ही बदल जाता है बचपन
जीवन में पिता का स्थान बेहद खास होता है। एक पिता सिर्फ परिवार का सहारा नहीं होता, बल्कि बच्चों की दुनिया का सबसे मजबूत स्तंभ भी होता है। जब किसी बच्चे के सिर से पिता का साया उठ जाता है, तो उसका बचपन अचानक बदल जाता है। यही दर्द शनिवार को उस छोटी बच्ची की आंखों में साफ दिखाई दे रहा था। वह शायद यह नहीं समझ पा रही थी कि अब उसके पापा कभी उसे स्कूल छोड़ने नहीं आएंगे, कभी गोद में उठाकर नहीं खिलाएंगे और न ही उसके हर छोटे-बड़े सपने पर मुस्कुराएंगे।

गंगा में समाई यादें
हिंदू धर्म में गंगा को मोक्षदायिनी माना जाता है। मान्यता है कि गंगा में अस्थि विसर्जन करने से आत्मा को शांति मिलती है। लेकिन शनिवार को हरिद्वार घाट पर सिर्फ अस्थियां ही नहीं, बल्कि एक परिवार की अनगिनत यादें और भावनाएं भी गंगा की लहरों में बहती दिखाई दीं। मासूम बेटी के “आई लव यू पापा” वाले कार्ड ने इस विदाई को और भी भावुक बना दिया।
यह पल हर किसी के दिल में उतर गया
हरिद्वार के घाट पर मौजूद लोग इस भावुक दृश्य को देखकर स्तब्ध रह गए। वैदिक मंत्रोच्चार, बहती गंगा, नम आंखें और एक बेटी का अपने पिता को अंतिम बार गले लगाना- यह पल हर किसी के दिल में उतर गया। कई लोगों ने कहा कि जीवन में बहुत अंतिम संस्कार देखे, लेकिन इतनी भावुक विदाई शायद ही कभी देखी हो।
हर आंख हुई नम
अस्थि विसर्जन के दौरान वहां मौजूद शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति रहा हो जिसकी आंखें नम न हुई हों। लोग लगातार परिवार को सांत्वना देते रहे और ईश्वर से प्रार्थना करते रहे कि दिवंगत आत्मा को शांति मिले। कई लोगों ने कहा कि इस दृश्य ने उन्हें अपने परिवार और रिश्तों की अहमियत का एहसास करा दिया।
