ट्विशा शर्मा मौत केस: सुप्रीम कोर्ट में सरकार का बड़ा बयान.
“बेटी की मौत पर सुप्रीम कोर्ट सख्त सरकार बोली – तलाकशुदा बेटी बेहतर”
“ट्विशा शर्मा केस में बड़ा बयान SC में गूंजी दर्दनाक सच्चाई”
मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश के बहुचर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में अब सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणियों और सरकार के बयान ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। पूर्व मॉडल और अभिनेत्री ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत को लेकर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई, जहां मध्य प्रदेश सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा — “मरी हुई बेटी से बेहतर तलाकशुदा बेटी होती है।” यह बयान अदालत में उस समय आया जब दहेज उत्पीड़न, मानसिक प्रताड़ना और जांच में कथित लापरवाही को लेकर बहस चल रही थी।
ट्विशा शर्मा की मौत 12 मई 2026 को भोपाल स्थित उनके ससुराल में हुई थी। शुरुआती जांच में इसे आत्महत्या बताया गया, लेकिन परिवार ने इसे दहेज हत्या और सुनियोजित साजिश करार दिया। ट्विशा के परिजनों का आरोप है कि शादी के कुछ महीनों बाद से ही उन्हें लगातार प्रताड़ित किया जा रहा था। उनके पति समार्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह, जो रिटायर्ड जज हैं, पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। पुलिस ने दहेज प्रताड़ना और अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया है।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वतः संज्ञान लिया है। अदालत ने सभी संभावित गवाहों और आरोपियों को मीडिया में बयान देने से भी रोका है ताकि जांच प्रभावित न हो। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि अभी किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा गया है और निष्पक्ष जांच सबसे जरूरी है।
मामले में कई चौंकाने वाले खुलासे भी सामने आए हैं। परिवार ने आरोप लगाया कि शुरुआती जांच में प्रभावशाली लोगों का दबाव था और सबूतों से छेड़छाड़ की कोशिश हुई। ट्विशा के शव का दूसरा पोस्टमार्टम AIIMS दिल्ली की टीम से कराया गया। लगभग 12 दिन बाद उनका अंतिम संस्कार भोपाल में किया गया।
इस पूरे मामले ने एक बार फिर दहेज, घरेलू हिंसा और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया से लेकर अदालत तक, हर जगह यही चर्चा है कि अगर एक बेटी दुखी है, तो समाज और परिवार को उसे “समझौता” करने की सलाह देने के बजाय सुरक्षित जीवन चुनने का हक देना चाहिए।
