अखिलेश यादव को श्रीकृष्ण के स्वरूप में दिखाने वाले पोस्टर पर ब्रजेश पाठक का बयान
कहा – केवल यादव उपनाम होने से कोई व्यक्ति भगवान श्रीकृष्ण के विचारों और आदर्शों का प्रतिनिधि नहीं बन जाता
लखनऊ। रायबरेली में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को भगवान श्रीकृष्ण के स्वरूप में प्रस्तुत किए जाने वाले पोस्टर पर उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण करोड़ों भारतीयों की आस्था, धर्म, नीति और सत्य के प्रतीक हैं। उनका जीवन अन्याय के विरुद्ध संघर्ष, धर्म की स्थापना और कर्तव्य का संदेश देता है।
ब्रजेश पाठक ने कहा कि केवल यादव उपनाम होने से कोई व्यक्ति भगवान श्रीकृष्ण के विचारों और आदर्शों का प्रतिनिधि नहीं बन जाता। उन्होंने कहा कि व्यक्ति की जातीय पहचान नहीं, बल्कि उसके आचरण और विचार उसके आदर्शों को प्रमाणित करते हैं।
उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का नाम लेना और उनके आदर्शों पर चलना दो अलग-अलग बातें हैं। श्रीकृष्ण ने गीता के माध्यम से कर्म, धर्म और सत्य का संदेश दिया, जबकि भगवान श्रीराम ने मर्यादा, त्याग और कर्तव्य का आदर्श प्रस्तुत किया।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि अखिलेश यादव को श्रीकृष्ण के स्वरूप में प्रस्तुत करने वाला पोस्टर राजनीतिक बहस का विषय है। श्रीराम और अयोध्या को लेकर समाजवादी पार्टी तथा अखिलेश यादव के पूर्व बयानों को लेकर भी राजनीतिक बहस होती रही है। ऐसे में भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण के प्रतीकों का राजनीतिक पोस्टरों में इस्तेमाल स्वाभाविक रूप से सवाल खड़े करता है।
उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि राजनीति में प्रतीकों का इस्तेमाल हो सकता है, लेकिन आस्था के सम्मान और विचारों की ईमानदारी को भी महत्व दिया जाना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि भगवान का स्वरूप अपनाने से पहले क्या उनके आदर्शों को भी अपनाया जा रहा है?
उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण और भगवान श्रीराम के आदर्शों को आत्मसात करना ही उनके प्रति वास्तविक सम्मान है।
