भारत सरकार ने, केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के अधीनस्थ संगीत नाटक अकादेमी की अध्यक्ष, डॉ संध्या पुरेचा को वंदे मातरम कार्यक्रम के आयोजन की जिम्मेदारी सौंपी है। देशवासी और दुनिया, कर्त्तव्य पथ से राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम जो, एक तराना से जो आंदोलन बन गया को सुनेंगे।
आजादी के 77 साल बाद पहली बार गणतंत्र दिवस परेड में राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम भी बजेगा। भारत सरकार ने गणतंत्र दिवस परेड की वर्षों पुरानी परंपरा में बदलाव किया है। कर्त्तव्य पथ पर 26 जनवरी को आयोजित होने वाली परेड का आगाज और समापन के लिए 150 साल पुराने राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम को चुना है। खास बात यह है कि परेड में सबसे आगे 200 लोक और जनजातीय कलाकार वाद्य यंत्रों पर वंदे मातरम की धून सुनाएंगे तो समापन में 2,300 कलाकार वंदे मातरम पर लोकनृत्य पेश करेंगे।
भारत सरकार ने, केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के अधीनस्थ संगीत नाटक अकादेमी की अध्यक्ष, डॉ संध्या पुरेचा को वंदे मातरम कार्यक्रम के आयोजन की जिम्मेदारी सौंपी है। देशवासी और दुनिया, कर्त्तव्य पथ से राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम जो, एक तराना से जो आंदोलन बन गया को सुनेंगे। इसीलिए परेड का आगाज वंदे मातरम के मूल गीत वाद्य यंत्रों पर सुनाई देगा। देश के हर कोने से लोक व जनजातीय कलाकार अपनी पारंपरिक वेशभूषा में अपने वाद्य यंत्रों पर वंदे मातरम के मूल गीत को बजाएंगे। समापन पर, लोक कलाकार वंदे मातरम की धून पर लोकनृत्य पेश करेंगे। अभी तक गणतंत्र दिवस परेड की शुरुआत सेना से होती थी। वंदे मातरम थीम को क्रिएटिव संध्या पुरेचा हैं। जबकि संगीत एमएम कीरवानी, स्क्रिप्ट सुभाष सहगल, कारियोग्राफर संतोष नायर हैं।
पहली बार सीआरपीएफ के पुरुष दस्ते का नेतृत्व करेंगी महिला अफसर
इस वर्ष 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस परेड में जम्मू-कश्मीर की 26 वर्षीय असिस्टेंट कमांडेंट सिमरन बाला एक नया कीर्तिमान स्थापित करेंगी। वह कर्तव्य पथ पर केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के 140 से अधिक पुरुष जवानों के मार्चिंग दस्ते का नेतृत्व करेंगी। अधिकारियों के अनुसार, ऐसे कई मौके आए हैं जब महिला सीआरपीएफ अधिकारियों ने अलग-अलग गणतंत्र दिवस टुकड़ियों को कमांड किया है, लेकिन यह पहली बार है जब कोई महिला अधिकारी सीआरपीएफ के पुरुष दस्ते की कमान संभालेगी। परेड में सीआरपीएफ और एसएसबी की महिला डेयर डेविल्स टीम बुलेट बाइक पर हैरतअंगेज करतब भी दिखाएंगी।
बस्तरिया बटालियन में तैनात हैं सिमरन
सिमरन बाला जम्मू-कश्मीर के राजोरी जिले की रहने वाली हैं। वह अपने जिले से देश के सबसे बड़े अर्धसैनिक बल में अधिकारी रैंक पर शामिल होने वाली पहली महिला हैं। उन्होंने जम्मू के गांधीनगर स्थित गवर्नमेंट कॉलेज फॉर वुमेन से राजनीति विज्ञान में स्नातक किया है। संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की सीएपीएफ परीक्षा पास करने के बाद, अप्रैल 2025 में उन्हें सीआरपीएफ में कमीशन मिला।
