छपरा व्यवहार न्यायालय ने पॉक्सो एक्ट के जघन्य अपराध में दो अभियुक्तों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास व अर्थदंड की सजा सुनाई है। न्यायालय ने इसे नाबालिगों के विरुद्ध अपराध पर कड़ा संदेश बताया।
सारण जिले में पॉक्सो एक्ट से जुड़े एक जघन्य अपराध के मामले में छपरा व्यवहार न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाते हुए दो अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने दोनों दोषियों पर 50-50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
मामले में अनुसंधानकर्ता द्वारा किए गए गुणवत्तापूर्ण एवं साक्ष्य-आधारित अनुसंधान के चलते अभियोजन पक्ष को न्यायालय में मजबूत आधार मिला। अभियोजन की ओर से चिकित्सक, अनुसंधानकर्ता सहित कुल 10 साक्षियों की गवाही कराई गई, जिससे मामला निर्णायक मोड़ तक पहुंच सका। लोक अभियोजक सर्वजीत ओझा एवं सहायक लोक अभियोजक अश्वनी कुमार ने प्रभावी ढंग से अभियोजन पक्ष रखा। सजायाफ्ता अभियुक्तों की पहचान सारण जिले के मकेर थाना क्षेत्र अंतर्गत फुलवरिया गांव निवासी परमा महतो के पुत्र सत्येंद्र महतो एवं दिन दयाल साह के पुत्र मुकेश साह के रूप में हुई है।
सारण के वरीय पुलिस अधीक्षक विनीत कुमार ने बताया कि पुलिस मुख्यालय के निर्देश के आलोक में वर्ष 2026 में जिले के गंभीर अपराधों को चिन्हित कर त्वरित विचारण हेतु न्यायालय में प्रस्तुत किया जा रहा है। इसी क्रम में छपरा व्यवहार न्यायालय स्थित विशेष पॉक्सो न्यायालय की न्यायाधीश स्मिता राज ने मकेर थाना कांड संख्या 65/23 में फैसला सुनाया।
न्यायालय ने दोनों अभियुक्तों को भारतीय दंड संहिता की धारा 376 (डीबी) के तहत आजीवन कारावास एवं 50-50 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड की राशि जमा नहीं करने की स्थिति में प्रत्येक अभियुक्त को छह-छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
इसके अतिरिक्त पॉक्सो अधिनियम की धारा 4/6 के तहत दोनों अभियुक्तों को 20-20 वर्ष का कठोर कारावास एवं 25-25 हजार रुपये अर्थदंड की सजा दी गई है। अर्थदंड अदा नहीं करने पर इस धारा में भी अतिरिक्त कारावास का प्रावधान किया गया है। यह फैसला न केवल पीड़िता को न्याय दिलाने की दिशा में अहम कदम है, बल्कि समाज में यह सख्त संदेश भी देता है कि नाबालिगों के विरुद्ध अपराध किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे।
