अमेरिका के वाशिंगटन स्थित स्मिथसोनियन नेशनल म्यूजियम ऑफ एशियन आर्ट ने भारत सरकार को तीन बहुमूल्य कांस्य प्रतिमाओं को वापस करने का निर्णय लिया है। यह प्रतिमाएं तमिलनाडु के मंदिरों से अवैध रूप से तस्करी कर लाई गई हैं।
दरअसल, गहन शोध और अभिलेखीय जांच के इस बात की पुष्टि हुई कि चोल और विजयनगर काल की इन मूर्तियों को दशकों पहले भारतीय कानूनों का उल्लंघन कर विदेशों में बेचा गया था। जिसे स्मिथसोनियन संग्रहालय ने न सिर्फ लौटाने का फैसला लिया है, बल्कि
जांच के बाद हुआ खुलासा
तमिलनाडु के मंदिरों से चोरी हुई ‘शिव नटराज’ (चोल काल, लगभग 990), ‘सोमस्कंद’ (चोल काल, 12वीं शताब्दी) और ‘संत सुंदरार विद परवई’ (विजयनगर काल, 16वीं शताब्दी) की मूर्तियां दक्षिण भारतीय कांस्य ढलाई की समृद्ध कलात्मकता के उदाहरण हैं। राष्ट्रीय एशियाई कला संग्रहालय ने इन तीनों मूर्तियों की उत्पत्ति की विस्तृत जांच की। जिसमें प्रत्येक कृति के लेन-देन के इतिहास की गहन छानबीन की गई।
जांच पड़ताल के बाद संग्रहालय ने न केवल इन्हें लौटाने की घोषणा की है, बल्कि ‘शिव नटराज’ की प्रतिमा को दीर्घकालिक ऋण पर रखकर उनकी चोरी से लेकर वापसी तक की पूरी कहानी को दुनिया के सामने प्रदर्शित करने का भी फैसला किया है।इसे ‘दक्षिण एशिया, दक्षिणपूर्व एशिया और हिमालय में ज्ञान की कला’ नामक प्रदर्शनी के हिस्से के रूप में प्रदर्शित किया जाएगा।
2023 में, पांडिचेरी स्थित फ्रांसीसी संस्थान के फोटो अभिलेखागार के सहयोग से, संग्रहालय के शोधकर्ताओं द्वारा इस बात की पुष्टि की गई कि इन कांस्य मूर्तियों की तस्वीरें 1956 और 1959 के बीच तमिलनाडु के मंदिरों में ली गई थीं।
कौन सी प्रतिमा कहां से संबंधित है?
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय पुरातत्व विभाग के सर्वेक्षण के बाद इन निष्कर्षों की समीक्षा की और पुष्टि की कि मूर्तियों को भारतीय कानूनों का उल्लंघन करते हुए हटाया गया था। संग्रहालय के निदेशक चेस एफ रॉबिन्सन ने कहा, ‘शिव नटराज की यह प्रतिमा तंजावुर जिले के श्री भाव औषधेश्वर मंदिर से संबंधित थी, जहां 1957 में इसकी तस्वीर ली गई थी। बाद में 2002 में न्यूयॉर्क स्थित डोरिस वीनर गैलरी से इस कांस्य प्रतिमा को राष्ट्रीय एशियाई कला संग्रहालय ने अधिग्रहित कर लिया।
संग्रहालय के एक शोधकर्ता ने बताया कि डोरिस वीनर गैलरी ने संग्रहालय को प्रतिमा बेचने में सुविधा प्रदान करने के लिए जाली दस्तावेज उपलब्ध कराए थे। सोमस्कंद और संत सुंदरार परवई सहित की प्रतिमा 1,000 वस्तुओं के उपहार का हिस्सा थी। शोध में पता चला कि यह प्रतिमा मन्नारकुडी तालुक के अलत्तूर गांव स्थित विश्वनाथ मंदिर से थी। इसके अलावा शिव मंदिर में संत सुंदरार परवई की प्रतिमा कल्लकुरुच्ची तालुक के वीरसोलपुरम गांव से थी।
