लखनऊ। अटल सुशासन पीठ, लोक प्रशासन विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय के द्वारा एस आई आर: मुद्दे एवं चुनौतियाँ विषयक कार्यालय का आयोजन डीपीए सभागार में किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ पूर्व प्रधानमंत्री अटल जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। तत्पश्चात मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथियों का स्वागत किया गया। कार्यक्रम के प्रारंभ में विभागाध्यक्ष लोक प्रशासन विभाग एवं अटल सुशासन पीठ के संयोजक प्रो नंद लाल भारती ने पीठ के विगत कार्यों और कार्यशाला के विषय से अवगत कराते हुए यह बताया कि अटल सुशासन पीठ द्वारा सुशासन के समसामयिक विषयों पर कार्यक्रम कराए जाते रहे हैं।

कार्यशाला के मुख्य वक्ता प्रो बलराज चौहान, पूर्व कुलपति राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, लखनऊ रहे। उद्घाटन सत्र में प्रो चौहान ने एसआईआर पर प्रतिभागियों के साथ गहन चर्चा एवं संवाद करते हुए एस0आई0आर0 की संवैधानिक, वैधानिक एवं ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर भी विस्तृत चर्चा की। इसके साथ ही एस आई आर की प्रक्रिया पर भी उन्होंने प्रकाश डाला। लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी से संबंधित मामलों पर उन्होंने विशेष बल दिया। एस0आई0आर0 की प्रक्रिया में गायब होते नामों पर भी उन्होंने चिंता व्यक्त की। तकनीकी प्रशिक्षण और उसके सही प्रयोग न कर पाने को उन्होंने इसकी एक बड़ी चुनौती माना। विशिष्ट वक्ता के रूप में प्रो संजय गुप्ता, विभागाध्यक्ष, राजनीति विज्ञान विभाग उपस्थित रहे। प्रथम तकनीकी सत्र में प्रो गुप्ता ने एस0आई0आर0 के कारण जनसामान्य के बीच चुनावी प्रक्रिया में बढ़ती जागरूकता पर प्रकाश डाला एवं उसकी सराहना की। समस्याओं से अधिक उनके निराकरण के प्रयास पर उन्होंने बल दिया। उन्होंने युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका की भी चर्चा की।

एस0आई0आर0 की प्रक्रिया में आ सकने वाली कुछ समस्याओं यथा जमीनी स्तर पर भौतिक सत्यापन की कमी पर गहरी चिंता व्यक्त की। निर्वाचन सूची में नामों में हो रही भरी कटौती के कारणों पर भी उन्होंने प्रकाश डाला। प्रो गुप्ता ने ग्रामीण क्षेत्रों में आ रही समस्याओं और उनके संभावित हल भी सुझाए। समयसीमा के विस्तार की आवश्यकता पर भी उन्होंने अपने विचार रखे। उन्होंने सरकार एवं चुनाव आयोग को उच्चतम न्यायालय द्वारा की गई टिप्पणियों पर विचार करने का भी सुझाव दिया। उद्घाटन सत्र में प्रो वैशाली सक्सेना द्वारा धन्यवाद ज्ञापन किया गया। प्रथम सत्र के अंत में वरिष्ठ पत्रकार हैदर रायानी ने एस0आई0आर0 के दौरान अधिकारियों और कर्मचारियों के समक्ष आ रही चुनौतियों पर चर्चा करते हुए 2003 की सूची से मिलान में आ रही समस्याओं पर प्रकाश डाला और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित करने का सुझाव दिया। उन्होंने एस0आई0आर0 की प्रक्रिया में एआई के प्रयोग और डिजिटल समाधान निकालने में की गई कमी पर अपना पक्ष रखा।

द्वितीय तकनीकी सत्र के मुख्य वक्ता डॉ यू0बी0 सिंह, पूर्व उप निदेशक, क्षेत्रीय नगर एवं पर्यावरण अध्ययन केंद्र, लखनऊ रहे। डॉ सिंह के द्वारा इस विशेष गहन पुनर्निरीक्षण की विशेषता को सबके समक्ष प्रस्तुत करते हुए इसकी नियमावली और विभिन्न चरणों पर प्रकाश डाला। उन्होंने प्रतिभागियों को एस आई आर एवं नागरिकता के परस्पर संबंध के विषय में भी अवगत कराया। उन्होंने बीएलओ की भूमिका के महत्व को उजागर करने के साथ ही जनसामान्य की भागीदारी पर भी जोर दिया। इसके साथ ही निर्वाचन सूची में आ रही समस्याओं के मूल कारणों पर भी चर्चा की। अंत में उन्होंने नागरिकों से इस प्रक्रिया में प्रशासन के साथ सहयोग करने की अपील की। इस अवसर पर विभिन्न राजनैतिक दलों के बी0एल0ए0 द्वारा भी सहभागिता दर्ज कराई गई। अंत में विभाग के शिक्षक डॉ एस0एस0 चौहान के द्वारा धन्यवाद ज्ञापन किया गया। कार्यक्रम में डॉ नंदिता कौशल, फैसल अंसारी, एकाँश अवस्थी, रंजीत चौहान, गजेंद्र कुमार, ऋचा यादव, स्वाति दास, कौशांबी, पयोध कांत, अणिमा शुक्ला, राजेश कुमार, समेत अन्य विद्यार्थी एवं शोधार्थी उपस्थित रहे।
