पंजाब में नशा तस्करी पर नकेल पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती है मगर इससे भी बड़ी चुनौती पुलिस द्वारा पकड़े गए नशा तस्करी के आरोपियों को कोर्ट में दोषी साबित कर उन्हें सलाखों के पीछे पहुंचाना है।
पिछले चार साल से पुलिस ने इन मामलों में अपनी जांच को मजबूत बनाया है। नतीजतन इन केसों में सजा की दर 89.24 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है जबकि 23846 मामलों में दोषियों को सजा हो चुकी है।
पंजाब का बड़ा हिस्सा पाकिस्तान से सटा है। लिहाजा यहां सीमा पार से काफी मात्रा में नशीले पदार्थ यहां बसे गांवों के खेतों में ड्रोन के जरिये गिराया जाता है। उसके बाद पाकिस्तान से आने वाली नशे की इस खेप को विभिन्न राज्यों तक पहुंचाया जाता है। इस काम में पंजाब के कई लोग खासकर युवा क्रास बॉर्डर नारको सिंडिकेट के नेटवर्क के रूप में काम करते हैं। ऐसे ही लोगों की धरपकड़ के लिए पंजाब सरकार ने युद्ध नशेयां विरुद्ध नाम से अभियान भी चलाया हुआ है।
सूबे में अभियान का दूसरा चरण चल रहा है। जिसके तहत रोजाना पंजाब पुलिस विभिन्न जिलों में दबिश देकर नशा तस्करी के आरोपियों को पकड़ रही है। उनके खिलाफ नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंसेस (एनडीपीएस) एक्ट के तहत केस दर्ज किए जा रहे हैं। पकड़ने के बाद इन आरोपियों को अदालतों में पेश किया जाता है और जुटाए गए सबूतों के आधार पर पुलिस का जांच अफसर इन आरोपियों को कोर्ट में दोषी साबित करने का प्रयास करता है। दोषी साबित होने के बाद उन्हें अदालत से सजा मिलती है और सजा की इसी दर में अब बढ़ोतरी हुई है।
