प्रशांत महासागर में तेजी से बढ़ते तापमान के कारण अल नीनो ने दस्तक दे दी है। मई महीने में समुद्र का तापमान अल नीनो की निर्धारित 0.5 डिग्री सेल्सियस की सीमा को पार कर चुका है। यूरोपीय मौसम एजेंसी के लेटेस्ट अपडेट के अनुसार, इसके प्रभाव से वैश्विक वायुमंडलीय परिस्थितियों में बड़े बदलाव की आशंका है, जिसका आने वाले महीनों में भारतीय मानसून सहित दुनिया भर के मौसम पर गहरा असर पड़ सकता है।
यूरोपियन सेंटर फॉर मीडियम-रेंज वेदर फोरकास्ट द्वारा जारी की गई यह रिपोर्ट प्रशांत महासागर की स्थिति पर किसी प्रमुख वैश्विक मौसम एजेंसी का जून महीने का पहला अपडेट है। पिछले महीने ही अधिकांश एजेंसियों ने चेतावनी दी थी कि अल नीनो आने की कगार पर है। वहीं, अमेरिकी सरकारी संस्थानों ने मई से जुलाई की अवधि के बीच इसके बनने की 82% संभावना जताई थी।
मौसम में दिखने लगा है बदलाव का असर
अनुभवी मौसम विज्ञानी और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के पूर्व सचिव एम राजीवन ने बताया कि ECMWF के नवीनतम चार्ट से पता चलता है कि 0.5 डिग्री की सीमा पार हो गई है।
आधिकारिक तौर पर, अल नीनो की घोषणा तभी की जाती है जब ये बदलाव कम से कम तीन महीने तक लगातार बने रहते हैं। अल नीनो से जुड़े वायुमंडलीय बदलाव अब पहले से ही देखे जा रहे हैं और इसका असर भी महसूस किया जाने लगा है।
केरल पहुंचा मानसून
ECMWF का यह अपडेट उसी दिन आया है, जब मानसून अपने सामान्य समय से तीन दिन की देरी के बाद केरल पहुंचा। भारत मौसम विज्ञान विभाग के प्रमुख मृत्युंजय महापात्र ने कहा कि मानसून के पश्चिमी तट के और अधिक हिस्सों तथा कर्नाटक, आंध्र प्रदेश की ओर बढ़ने और अगले दो-तीन दिनों में तमिलनाडु को कवर करने की संभावना है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि इन क्षेत्रों में बारिश की तीव्रता बहुत अधिक होने की संभावना नहीं है।
IMD की रिपोर्ट का इंतजार
अल नीनो के पूरी तरह से हावी होने को लेकर महापात्र ने कहा कि तस्वीर साफ होने के लिए अन्य एजेंसियों के अपडेट का इंतजार करना चाहिए। अमेरिकी सरकारी एजेंसियों और IMD द्वारा एक सप्ताह के भीतर अपना पूर्वानुमान जारी करने की उम्मीद है।
गौरतलब है कि IMD ने इस साल लॉन्ग पीरियड एवरेज का 90% यानी सामान्य से कम मानसून रहने का अनुमान जताया है, जो कि 90% से कम की श्रेणी के करीब है।
नीनो 3.4 क्षेत्र में तेजी से बढ़ा तापमान
पिछले महीने के अंत में ऑस्ट्रेलियाई मौसम ब्यूरो ने भी बताया था कि नीनो 3.4 क्षेत्र में तापमान सामान्य से 0.67 डिग्री सेल्सियस अधिक था, मध्य-पूर्व भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर का वह क्षेत्र जहां अल नीनो पर सबसे ज्यादा नजर रखी जाती है।
यह अधिकांश एजेंसियों द्वारा अल नीनो की शुरुआत के लिए तय की गई 0.5 डिग्री सेल्सियस की सीमा से अधिक है, हालांकि ऑस्ट्रेलियाई ब्यूरो इसका मापदंड 0.8 डिग्री सेल्सियस मानता है। ECMWF के नवीनतम मौसमी पूर्वानुमान के अनुसार, मई के अंत तक नीनो 3.4 क्षेत्र का तापमान सामान्य से 1 डिग्री सेल्सियस अधिक हो चुका है।
