मुख्यमंत्री की टिप्पणी पर विपक्षी नेता ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए सामाजिक मंच पर कई सवाल उठाए। उन्होंने मुख्यमंत्री के अतीत, राजनीतिक सफर और उत्तराधिकार से जुड़े मुद्दों को लेकर निशाना साधा। बयानबाजी के इस दौर ने प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है।
अखिलेश यादव ने सीएम योगी के टोंटी वाले तंज पर पलटवार किया है। उन्होंने अपने एक्स अकाउंट से लिखा- विज्ञान कहता है कि किशोरावस्था में किया गया वनस्पति का अत्यधिक सेवन व्यक्ति के बोलने और समझने की क्षमता को प्रभावित करता है।
अखिलेश यादव ने इन मुद्दों पर कसा तंज
• मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 1994 के आसपास अजय सिंह बिष्ट अपने पारिवारिक परिवहन व्यवसाय में सहयोग कर रहे थे।
• उस समय उनके पास तीन बसें और एक ट्रक था।
• संभवतः उन्होंने यह भाषिक अभद्रता उसी दौर में, डग्गामार वाहन चलवाते समय सीखी।
• अजय सिंह बिष्ट के पिता आनंद सिंह बिष्ट और गोरखनाथ मठ के पूर्व महंत श्री अवैद्यनाथ जी यानी श्री कृपाल सिंह बिष्ट जी, रिश्ते में भाई बताए जाते हैं।
• कहा जाता है कि बाद में उनके चाचा ने ही उन्हें मठ में बुलाया।
• महंत अवैद्यनाथ जी ने अपने भतीजे अजय सिंह बिष्ट को कुछ ही वर्षों में मठ का उत्तराधिकारी बना दिया।
अखिलेश यादव ने सवाल उठाया
उत्तराधिकारी के रूप में उन्हीं को क्यों चुना गया? क्या यह केवल योग्यता का निर्णय था या रिश्तेदारी का भी प्रभाव था? पहले मठ की गद्दी मिली, फिर कुछ ही वर्षों में लोकसभा की सीट भी। स्पष्ट किया जाए कि मठ में महंत चुनने के लिए क्या कोई औपचारिक चुनाव प्रक्रिया हुई थी?
डग्गामार वाहन चलवाने वाला व्यक्ति क्या 4 वर्षों में ही इतना योग्य हो गया? यदि नहीं, तो क्या इसे ‘पक्षपाती परिवारवाद’ नहीं कहा जाना चाहिए? और अंत में- पद और परिधान रिश्तों और समय की मदद से मिल सकते हैं, पर भाषा और व्यवहार नहीं।
