लखनऊ। प्रोफेसर सोनिया नित्यानंद (कुलपति) किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी ने 15 जून 2026 को पैथोलॉजी विभाग में नव-नवीनीकृत स्नातक (UG) एवं स्नातकोत्तर (PG) प्रायोगिक प्रयोगशाला तथा डीबीटी निदान (National Inherited Disease AdministratioN) केंद्र का उद्घाटन किया।

उद्घाटन अवसर पर कुलपति ने पैथोलॉजी विभाग को विश्वविद्यालय की शैक्षणिक एवं नैदानिक सुविधाओं में इस महत्वपूर्ण वृद्धि के लिए बधाई दी। उन्होंने नवीनीकृत यूजी/पीजी प्रायोगिक प्रयोगशाला में किए गए आधुनिक विकास कार्यों की सराहना की, जिनसे एमबीबीएस विद्यार्थियों की पूर्ण बैच क्षमता के अनुरूप एक बेहतर, आधुनिक एवं अनुकूल शिक्षण वातावरण उपलब्ध हो सकेगा। उन्होंने कहा कि डीबीटी निदान केंद्र भावी माता-पिता (Expecting Couples) को थैलेसीमिया जैसे वंशानुगत रोगों की जांच सुविधा प्रदान करेगा। उन्होंने इस अवसर पर “उपचार से बेहतर रोकथाम” (Prevention is Better than Cure) के महत्व पर बल दिया। साथ ही उन्होंने नवजात शिशुओं की स्क्रीनिंग को समय पर पहचान एवं उपचार के लिए अत्यंत आवश्यक बताया।

पैथोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो.सुरेश बाबू ने विभाग की उत्कृष्ट स्नातक एवं स्नातकोत्तर शिक्षण व्यवस्था के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने बताया कि यह निदान परियोजना एक बहुविभागीय सहयोगात्मक प्रयास है, जिसमें पैथोलॉजी विभाग, बाल रोग विभाग, क्लिनिकल हीमैटोलॉजी विभाग तथा प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग मिलकर कार्य कर रहे हैं।
डीबीटी निदान परियोजना की प्रधान अन्वेषक (Principal Investigator) Dr. Mili Jain ने बताया कि यह सुविधा जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT), भारत सरकार से प्राप्त अनुदान तथा विश्वविद्यालय प्रशासन के सहयोग से पैथोलॉजी विभाग में स्थापित की गई है।
यह केंद्र निम्नलिखित जांच सुविधाएँ निःशुल्क उपलब्ध कराएगा:
गर्भवती महिलाओं एवं उनके पतियों में थैलेसीमिया स्क्रीनिंग।
नवजात शिशुओं में आनुवंशिक रोगों की स्क्रीनिंग, जिनमें शामिल हैं:
जी-6-पीडी (G6PD) की कमी
जन्मजात हाइपोथायरॉयडिज़्म (Congenital Hypothyroidism)
गैलेक्टोसीमिया (Galactosemia)
जन्मजात एड्रिनल हाइपरप्लासिया (Congenital Adrenal Hyperplasia)
उद्घाटन समारोह में पैथोलॉजी विभाग के संकाय सदस्य, विभिन्न विभागों के वरिष्ठ चिकित्सक एवं अन्य अतिथि उपस्थित रहे।
