टेलीग्राम बैन पर उठे सवाल
रोजगार अधिकार अभियान ने जताया विरोध।
NEET परीक्षा को लेकर नया विवाद
टेलीग्राम बंद करना समाधान नहीं: अभियान।
नीट परीक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल उठाए जा रहे हैं। रोजगार अधिकार अभियान ने केंद्र सरकार द्वारा टेलीग्राम सेवा पर लगाई गई रोक को अनावश्यक कदम बताते हुए कहा है कि किसी एक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को बंद कर देना पेपर लीक और धांधली की समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकता। संगठन का कहना है कि इस तरह की कार्रवाई से मूल समस्या पर पर्दा डालने की कोशिश होती है, जबकि जरूरत परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की है।अभियान के अनुसार, हाल ही में आयोजित नीट यूजी परीक्षा के दौरान सामने आए विवादों ने चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। संगठन का दावा है कि पेपर लीक और धांधली की घटनाओं का सीधा संबंध उस परीक्षा तंत्र से है, जिसे सरकार संचालित कर रही है। यदि चयन प्रक्रिया में जवाबदेही और निगरानी मजबूत नहीं होगी, तो केवल तकनीकी प्रतिबंधों के जरिए ऐसी घटनाओं पर रोक नहीं लगाई जा सकती।
रोजगार अधिकार अभियान ने कहा कि शिक्षा क्षेत्र में सक्रिय कथित माफियाओं और संगठित गिरोहों पर प्रभावी कार्रवाई के बजाय सरकार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को निशाना बना रही है। संगठन का मानना है कि परीक्षा प्रक्रिया को सुरक्षित बनाने के लिए सबसे पहले उन नेटवर्कों पर कार्रवाई की जानी चाहिए जो पेपर लीक और धांधली जैसी गतिविधियों में शामिल पाए जाते हैं।
संगठन ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी यानी एनटीए की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। अभियान का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में एनटीए को लेकर कई गंभीर आरोप सामने आए हैं, लेकिन इसके बावजूद संस्था की जवाबदेही तय करने या उसकी कार्यप्रणाली में व्यापक बदलाव लाने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। छात्रों और युवाओं की ओर से उठाई गई कई मांगों को भी नजरअंदाज किया गया है।
अभियान का तर्क है कि यदि पेपर लीक रोकने के नाम पर इंटरनेट सेवाओं या सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को बंद करना ही समाधान माना जाए, तो भविष्य में देशभर में आयोजित होने वाली हजारों परीक्षाओं के दौरान इसी तरह के कदम उठाने पड़ सकते हैं। इसका असर केवल परीक्षार्थियों पर ही नहीं, बल्कि आम लोगों, कारोबार, शिक्षा और प्रशासनिक गतिविधियों पर भी पड़ सकता है।
रोजगार अधिकार अभियान का कहना है कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए मजबूत तकनीकी व्यवस्था, जवाबदेही तय करने की स्पष्ट प्रक्रिया और दोषियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई आवश्यक है। संगठन ने मांग की है कि परीक्षा संचालन से जुड़ी कमियों की निष्पक्ष जांच कराई जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस सुधार लागू किए जाएं।
इसी के साथ संगठन ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की मांग भी की है। अभियान का कहना है कि नीट परीक्षा समेत विभिन्न भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं में सामने आई गड़बड़ियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए। साथ ही केंद्र सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि छात्रों के भविष्य से जुड़े महत्वपूर्ण परीक्षाएं पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और शुचितापूर्ण ढंग से संपन्न हों।
फिलहाल, नीट परीक्षा और उससे जुड़े विवादों को लेकर राजनीतिक और सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रियाएं लगातार सामने आ रही हैं। ऐसे में परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बनाए रखना और छात्रों का भरोसा कायम रखना सरकार और संबंधित संस्थाओं के सामने बड़ी चुनौती बना हुआ है।
