श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान ने चढ़ावे की गणना प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाने का फैसला किया है। अब नकदी, सोना-चांदी और अन्य दान की गिनती सीसीटीवी निगरानी और वीडियो रिकॉर्डिंग के बीच होगी।
अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान ने श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर चढ़ावे की राशि की गणना प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाने का निर्णय लिया है। अब मंदिर की गुल्लकों से निकलने वाली नकदी, सोना-चांदी और अन्य चढ़ावे की गणना सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में होगी। पूरी प्रक्रिया की वीडियो और फोटोग्राफी कराई जाएगी। इतना ही नहीं संस्थान की 30 दुकानों के दुकानदारों में से प्रत्येक दिन एक या दो दुकानदारों की ड्यूटी लगाई जाएगी। मंदिर में हर माह लगभग एक करोड़ रुपये का चढ़ावा आता है।
श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान ने संस्थान से जुड़ी 30 दुकानों के दुकानदारों को निगरानी प्रक्रिया में शामिल किया है। प्रतिदिन एक या दो दुकानदारों की ड्यूटी गणना कक्ष में लगाई जाएगी। ये दुकानदार सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तथा दोपहर 3 बजे से शाम 7 बजे तक चढ़ावे की राशि की गिनती के दौरान गणना कक्ष में मौजूद रहकर पूरी प्रक्रिया पर नजर रखेंगे। संस्थान की ओर से दुकानदारों को आपसी सहमति के आधार पर ड्यूटी निर्धारित करने के लिए कहा गया है।
श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के सचिव कपिल शर्मा ने बताया कि गुल्लक खुलने के समय उसमें निकलने वाली नकदी, सोने, चांदी के जेवरात और अन्य बहुमूल्य वस्तुओं की अलग-अलग गणना कराई जाएगी। प्रत्येक चरण की वीडियो रिकॉर्डिंग की जाएगी। इससे राशि की गणना में पारदर्शिता बनी रहेगी और भविष्य में किसी प्रकार की शंका या विवाद की स्थिति में रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा। यह व्यवस्था रविवार से प्रभावी कर दी गई है। हालांकि मंदिर प्रबंधन का दावा है कि श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर आने वाली चढ़ावा राशि पूरी तरह से सुरक्षित है। गणना से लेकर राशि बैंक में जमा करने तक एक-एक रुपये की निगरानी होती है।
दिनेश फलाहारी ने की थी सीबीआई जांच कराने की मांग
बीते दिनों दिनेश फलाहारी महाराज ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर चढ़ावे की सीबीआई जांच कराने की मांग की थी। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को खून से पत्र लिखकर करोड़ों रुपये के घोटाले का आरोप लगाया था। कहा था कि जानबूझकर सीसीटीवी कैमरे बंद कर दिए जाते हैं,ताकि भक्तों द्वारा दिए गए दान को खुर्द-बुर्द किया जा सके। हालांकि कुछ दिन बाद वह अपने बयान से पलट गए थे।
