उप मुख्यमंत्री श्री केशव प्रसाद मौर्य के नेतृत्व में महिला सशक्तिकरण को नई उड़ान
एलआईसी बीमा सखी कार्यक्रम से आत्मनिर्भर बन रहीं ग्रामीण महिलाएँ, मजबूत हो रही ग्रामीण अर्थव्यवस्था
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में प्रदेश सरकार ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण, वित्तीय समावेशन और आत्मनिर्भरता को नई गति प्रदान कर रही है। इसी दिशा में एलआईसी का बीमा सखी कार्यक्रम महिलाओं के लिए सम्मानजनक आजीविका, स्वरोजगार और वित्तीय नेतृत्व का प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है। स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) से जुड़ी महिलाओं को प्रशिक्षण देकर बीमा सखी के रूप में तैयार किया जा रहा है, जिससे वे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ करने के साथ-साथ ग्रामीण समाज में वित्तीय जागरूकता का भी विस्तार कर रही हैं।
उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि प्रदेश सरकार का संकल्प महिलाओं को केवल योजनाओं का लाभार्थी बनाना नहीं, बल्कि उन्हें विकास यात्रा का सक्रिय सहभागी और नेतृत्वकर्ता बनाना है। एलआईसी बीमा सखी कार्यक्रम इसी सोच का सशक्त उदाहरण है, जिसने हजारों ग्रामीण महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता और सम्मानजनक आजीविका के नए द्वार खोले हैं।
उन्होंने कहा कि बीमा सखी कार्यक्रम के माध्यम से महिलाओं को अतिरिक्त आय के अवसर प्राप्त हो रहे हैं, वहीं ग्रामीण परिवारों तक बीमा सुरक्षा, वित्तीय साक्षरता और सामाजिक सुरक्षा का संदेश भी प्रभावी ढंग से पहुँच रहा है। आज बीमा सखियाँ अपने कार्य से न केवल परिवार की आर्थिक मजबूती का आधार बन रही हैं, बल्कि अपने गाँवों में वित्तीय जागरूकता, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक परिवर्तन की प्रेरक के रूप में भी नई पहचान स्थापित कर रही हैं।
मौर्य ने विश्वास व्यक्त किया कि प्रदेश सरकार की महिला-केंद्रित योजनाओं तथा स्वयं सहायता समूहों की सशक्त भागीदारी से उत्तर प्रदेश में महिलाओं का आर्थिक सशक्तिकरण और अधिक गति पकड़ेगा तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा और मजबूती मिलेगी।
राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से प्राप्त जानकारी के अनुसार, एलआईसी बीमा सखी कार्यक्रम के अंतर्गत अब तक 4,900 से अधिक आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। इनमें से 1,000 से अधिक स्वयं सहायता समूहों की महिलाएँ सफलतापूर्वक बीमा सखी के रूप में कार्य कर रही हैं। कार्यक्रम में बीसी सखी, बैंक सखी तथा अन्य सामुदायिक कैडरों को प्राथमिकता दी गई है, ताकि उनके अनुभव, सामाजिक विश्वास और समुदाय से गहरे जुड़ाव का लाभ ग्रामीण क्षेत्रों तक बीमा सेवाओं के विस्तार में मिल सके।
बीमा सखियों ने अपने समर्पण, मेहनत और उत्कृष्ट कार्य के बल पर मात्र छह माह में रू 2 करोड़ से अधिक का सामूहिक कमीशन अर्जित कर उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। यह सफलता इस बात का सशक्त प्रमाण है कि महिलाओं को यदि उचित अवसर, गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण और प्रभावी मंच उपलब्ध कराया जाए तो वे न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति बदल सकती हैं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
