अरुणाचल प्रदेश में 27 भौगोलिक जगहों के लिए स्टैंडर्ड नाम तय करने पर चीन ने भारत को कड़ा जवाब दिया है। सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स का दावा है कि ये इलाके चीन के जांगनान क्षेत्र में आते हैं। दरअसल, चीन अरुणाचल प्रदेश और उससे सटे इलाकों को इसी नाम से बुलाता है और उन पर तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र का हिस्सा होने का दावा करता है।
अखबार ने बताया कि चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने 14 अप्रैल को एक रेगुलर प्रेस ब्रीफिंग में कहा था कि जांगनान इलाका चीन का हिस्सा है और चीन भारत द्वारा गैर-कानूनी तरीके से बनाए गए तथाकथित अरुणाचल प्रदेश को मान्यता नहीं देता है। चीनी सरकार का जांगनान की कुछ जगहों के लिए स्टैंडर्ड नाम जारी करना पूरी तरह से चीन के संप्रभु अधिकारों के दायरे में आता है।
भारत ने तय किए अरुणाचल की जगहों के नाम
यह प्रतिक्रिया तब आई जब भारत के सर्वे ऑफ इंडिया ने अरुणाचल प्रदेश में 21 इलाकों, चार दर्रों, ज्यादा ऊंचाई पर मौजूद एक ग्लेशियल झील और 1962 के युद्ध के हीरो के स्मारक की पहचान करते हुए अपना आधिकारिक नक्शा अपडेट किया। सरकार का कहना था कि यह कदम जगहों की सही पहचान सुनिश्चित करने और उनके भौगोलिक और ऐतिहासिक महत्व के बारे में लोगों में जागरूकता बढ़ाने के लिए उठाया गया था।
चीन का क्या कहना है?
ग्लोबल टाइम्स ने रविवार रात को रिपोर्ट दी कि भारत की ओर से यह मैपिंग, चीन-भारत सीमा मामलों पर बातचीत और समन्वय के लिए बने वर्किंग मैकेनिज्म की 36वीं बैठक के ठीक बाद हुई। यह बैठक 6 अगस्त को नई दिल्ली में हुई थी, जिसमें दोनों पक्षों के अधिकारियों ने सीमा तय करने, सीमा प्रबंधन और नियंत्रण, सिस्टम बनाने और सीमा-पार सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा की थी।
शंघाई इंटरनेशनल स्टडीज यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर गुओ जुएतांग ने कहा, “भारत का यह ताजा कदम असल में विवादित इलाके पर अपने दावों को मजबूत करने और चीन की संप्रभुता के रुख का मुकाबला करने की कोशिश है।”
