विशेष कोर्ट ने खारिज की याचिका, बेगुनाह साबित होने पर शमशेर ने साज़िशकर्ता मुस्ताक चोपड़ा को थमाया 25 लाख का नोटिस
देहरादून/उत्तरकाशी। देहरादून की एक विशेष पॉक्सो अदालत ने एक महिला द्वारा अपने ही सगे रिश्तेदारों पर दो नाबालिग लड़कियों से छेड़छाड़ और मारपीट करने के संगीन आरोपों वाली याचिका को पूरी तरह निरस्त कर दिया है। अदालत के फैसले और DGP के आदेश पर हुई थाना मोरी की अंतिम जांच रिपोर्ट में यह प्रमाणित हो गया है कि लड़कियों की माता नूरजहाँ के पिता मस्तू उर्फ गुलाम मुस्तफा उर्फ मुस्ताक चोपड़ा ने अवैध रूप से फर्जी परमिट बनवाने के अपने काले धंधे में साथ न देने पर वनाधिकार समिति के पदाधिकारियों पर दबाव बनाने के लिए अपनी ही नातिनों और बेटी को मोहरा बनाकर पोक्सो का यह घिनौना जाल बुना था। विशेष अदालत से पूरी तरह दोषमुक्त साबित होने के बाद अब पीड़ित शमशेर अली ने कड़ा कानूनी रुख अपनाते हुए मुख्य साज़िशकर्ता मुस्ताक चोपड़ा को 25 लाख का मानहानि और मानसिक उत्पीड़न का कानूनी नोटिस थमा दिया है।
इस संवेदनशील मामले में 17 जून 2026 को दून कैंपस के पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष चौधरी आज़म नबी आज़ाद ने शमशेर के परिजनों के साथ सूबे के DGP और आईजी गढ़वाल रेंज से मुलाकात की थी और उनके सामने सहसपुर कोतवाली के पक्के सरकारी रोजनामचा दस्तावेज़ पेश किए थे। श्री आज़ाद की इस निर्णायक पैरवी और पक्के साक्ष्य देखने के बाद ही DGP ने उत्तरकाशी पुलिस को जांच के कड़े निर्देश जारी किए थे, जिससे इस बड़े षड्यंत्र का पूरी तरह भंडाफोड़ हो सका।
थाना मोरी की फाइनल रिपोर्ट में हुए खुलासे:थाना मोरी के जांच अधिकारी द्वारा उच्चाधिकारियों को सौंपी गई आधिकारिक रिपोर्ट ने मुस्ताक चोपड़ा के कारनामों की पोल खोल दी है:फर्जी परमिट का मामला: थाना मोरी की रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि मुस्ताक चोपड़ा खुद जंगलों में प्रवेश करने के लिए फर्जी परमिट बनवाने का एक गैर-कानूनी खेल खेल रहा था। उसका वन क्षेत्र का पुराना पारंपरिक परमिट पहले ही निरस्त किया जा चुका है क्योंकि उसे हरिद्वार के गैंडी खाता में भूमि आवंटित हो चुकी है।ईमानदारी की मिली सज़ा: शमशेर अली वनाधिकार अधिनियम 2006 के तहत गठित वनाधिकार समिति यानी वन ग्राम सभा बाईकुल्ला फुल्लू, सांकरी रेंज के वैधानिक रूप से नियुक्त सचिव हैं। मुस्ताक चोपड़ा उन पर लगातार यह नाजायज दबाव बना रहा था कि वे वन विभाग को झूठा शपथ पत्र दें ताकि वह अपना निरस्त परमिट दोबारा बहाल करा सके। जब शमशेर और वन ग्राम सभा के अध्यक्ष याकुब अली ने इस फर्जीवाड़े में उसका साथ देने से साफ मना कर दिया, तो मुस्ताक चोपड़ा ने बदला लेने के लिए लड़कियों की माता नूरजहाँ के पिता होने का फायदा उठाकर देहरादून के एसएसपी को पत्र लिखकर छेड़छाड़ की झूठी कहानी रच डाली।सैकड़ों किलोमीटर दूर होने का अकाट्य प्रमाण: सहसपुर पुलिस के सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, शमशेर अली कथित घटना से डेढ़ महीना पहले 24 अप्रैल ही अपने 87 मवेशियों भैंसों और गायों के साथ चकराता के रास्ते उत्तरकाशी पहुंच चुके थे और तब से लगातार सांकरी रेंज गोविन्द वन्य जीव विहार में ही मौजूद थे। अतः देहरादून में घटना का दावा पूर्णतः झूठा और मनगढ़ंत पाया गया। विशेष पॉक्सो अदालत का कड़ा रुख और 25 लाख का हर्जानाअपर सत्र न्यायाधीश पॉक्सो, देहरादून की अदालत ने सहसपुर पुलिस के सरकारी रिकॉर्ड, वन विभाग की रिपोर्ट और थाना क्लेमेनटाउन की निष्पक्ष आख्या को सही मानते हुए मुस्ताक चोपड़ा पक्ष की याचिका को निरस्त कर पत्रावली दाखिल दफ़्तर करने के आदेश दिए।इस झूठे केस के कारण समाज में हुई भारी बदनामी और असहनीय मानसिक व आर्थिक उत्पीड़न के खिलाफ अब शमशेर अली ने मुस्ताक चोपड़ा को 25 लाख के हर्जाने का कानूनी नोटिस भेजा है। नोटिस में साफ चेतावनी दी गई है कि यदि तय समय के भीतर सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगी गई और हर्जाना नहीं दिया गया, तो मुस्ताक चोपड़ा के खिलाफ सक्षम न्यायालय में आपराधिक मानहानि का मुकदमा दर्ज कर उसे जेल भेजा जाएगा।
