विनोद यादव ब्यूरो रिपोर्ट प्रयागराज
प्रयागराज। 15 साल से स्टाइपेंड नहीं बढ़ने से नाराज आयुष छात्रों ने फाफामऊ स्थित लाल बहादुर शास्त्री होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज के मेन गेट पर प्रदर्शन किया। छात्रों ने 7,500 रुपए का स्टाइपेंड बढ़ाकर 25 हजार रुपए करने की मांग की।आयुष छात्रों को अब भी पुरानी रकम मिल रही है। तेज धूप के बावजूद बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं धरने पर पर जुटे हैं। कई छात्र-छात्राओं ने पोस्टर और बैनर से सिर ढककर प्रदर्शन करते नजर आए। इस दौरान उन्होंने शपथ ली..हमारी मेहनत पूरी है, 25 हजार मांगना जरूरी है.. और एक माह हमारा पूरा स्टाइपेंड क्यों आधा-अधूरा जैसे नारे लगाए। छात्रों का कहना है कि कॉलेज में पढ़ाई के साथ मरीजों के इलाज और अस्पताल से जुड़े कार्यों में भी अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें मिलने वाला स्टाइपेंड लंबे समय से नहीं बढ़ा है। बढ़ती महंगाई में 7,500 रुपए प्रतिमाह में अपनी जरूरतें पूरी करना उनके लिए मुश्किल हो रहा है। साढ़े चार साल की पढ़ाई के बाद एक साल की इंटर्नशिप करनी होती है। 2011 से 2026 आ गया, लेकिन स्टाइपेंड में एक रुपए की भी बढ़ोतरी नहीं हुई है। बहुत से छात्र किराए पर कमरा लेकर रहते हैं। जितना स्टाइपेंड हमें मिलता है, उसमें एक कमरा भी किराए पर नहीं मिल पाता। बाकी खर्च छात्र कैसे चलाए ? करीब 250 रुपए के हिसाब से प्रतिदिन मिलता है। इससे ज्यादा तो एक दिहाड़ी मजदूर कमा लेता है। पिछले 15 साल में महंगाई कहां से कहां पहुंच गई, लेकिन आयुष छात्रों का स्टाइपेंड वहीं का वहीं है। उन्हें जो पैसा मिल रहा है, वह बेहद अपमानजनक है।एमबीबीएस इंटर्न ने प्रदर्शन किया था, जिसमें बढ़ा स्टाइपेंड करीब 12 हजार से बढ़ाकर 25 हजार रुपए कर दिया गया। हमारा काम भी उन्हीं के बराबर है। फिर हमें यह स्टाइपेंड क्यों नहीं दिया गया? अब हम धरने पर बैठे हैं। जब मेहनत बराबर है तो पैसा भी बराबर क्यों नहीं? आयुष इंटर्न हैं प्रदर्शन कर रहे। पूरे प्रदेश में करीब 5 हजार आयुष इंटर्न हैं। अभी बहुत से छात्र कमरा किराए पर लेकर रहते हैं। स्टाइपेंड जो मिलता है, उसमें एक कमरा भी किराए पर नहीं मिल पाता। बाकी खर्च ओ कैसे चलाए ? खैर इसकी शुरुआत 2011 में हुई थी। उस समय महंगाई कम थी, लेकिन पिछले 15 साल में महंगाई कई गुना बढ़ गई है। दूध, पेट्रोल, राशन, सब्जी और फल समेत हर चीज के दाम बढ़ गए हैं। शहर में किराए पर कमरा लेकर रहने वाले एक छात्र का खर्च 20 से 25 हजार रुपए महीने तक पहुंच जाता है। हम सिर्फ इतना स्टाइपेंड मांग रहे हैं, जिससे हमें अपने खर्च के लिए घर से पैसे न लेने पड़ें। यह बहुत दुर्भाग्य की बात है कि आयुष छात्रों की कोई सुध लेने को तैयार नहीं हैं।
