संकट में फंसे परिवारों का सहारा बना मुख्यमंत्री राहत कोष, 5 साल में 2.44 लाख लोगों को मिली मदद
₹4,324 करोड़ से ज्यादा की सहायता स्वीकृत, 2025-26 में रिकॉर्ड 74,531 लाभार्थी
लखनऊ। बीमारी का इलाज हो या परिवार पर आया कोई बड़ा आर्थिक संकट.. मुश्किल वक्त में सरकारी मदद किसी परिवार के लिए बड़ी राहत बन सकती है। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री राहत कोष ऐसे ही जरूरतमंद परिवारों के लिए सहारा बन रहा है।
पिछले पांच वित्तीय वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि मुख्यमंत्री राहत कोष से 2021-22 से 2025-26 के बीच 2,44,263 लोगों के लिए कुल 4,324.60 करोड़ रुपये की सहायता स्वीकृत की गई। खास बात यह है कि इस दौरान सहायता पाने वाले लोगों की संख्या लगातार बढ़ी है।
पांच साल में 4.5 गुना बढ़े लाभार्थी
2021-22 में जहां 16,640 लोगों को 289.71 करोड़ रुपये की सहायता मिली थी, वहीं 2025-26 में लाभार्थियों की संख्या बढ़कर 74,531 पहुंच गई। यानी पांच साल के भीतर सालाना लाभार्थियों की संख्या करीब 4.5 गुना बढ़ी।
रकम घटी, लेकिन ज्यादा लोगों तक पहुंची मदद
2024-25 में 1,344.94 करोड़ रुपये की सहायता स्वीकृत हुई थी। इसके मुकाबले 2025-26 में सहायता राशि 1,108.48 करोड़ रुपये रही, यानी करीब 17.6 प्रतिशत की कमी।
लेकिन इसी दौरान एक अहम बदलाव देखने को मिला। सहायता पाने वाले लोगों की संख्या 66,874 से बढ़कर 74,531 हो गई। यानी पिछले साल के मुकाबले लाभार्थियों की संख्या में 11.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।
जिलों में भी दिखा व्यापक असर
जिला स्तर पर लखनऊ में 7,491, प्रयागराज में 6,572, गोरखपुर में 5,463 और कानपुर नगर में 4,890 लाभार्थियों को सहायता मिली।
इसके अलावा गोंडा, आजमगढ़, प्रतापगढ़, वाराणसी, जौनपुर और सीतापुर समेत कई जिलों में भी बड़ी संख्या में जरूरतमंदों को राहत मिली।
आंकड़े बता रहे हैं क्या?
पांच वर्षों के आंकड़ों की सबसे बड़ी तस्वीर यह है कि मुख्यमंत्री राहत कोष के माध्यम से सहायता पाने वाले लोगों की संख्या लगातार बढ़ी है। 2021-22 के 16,640 लाभार्थियों से बढ़कर 2025-26 में यह संख्या 74,531 तक पहुंच गई। यानी मुश्किल परिस्थितियों से गुजर रहे परिवारों के लिए राहत का दायरा लगातार विस्तृत हुआ है। कुल मिलाकर, पांच वर्षों में 2.44 लाख से ज्यादा लाभार्थी और ₹4,324.60 करोड़ की स्वीकृत सहायता—ये आंकड़े मुख्यमंत्री राहत कोष की बढ़ती पहुंच की तस्वीर पेश करते हैं।
