आरक्षण का उद्देश्य किसी को नुकसान पहुंचाना नहीं, सामाजिक कारणों से दमित लोगों को समान अवसर प्रदान करना है
लखनऊ| डाॅ0 आंबेडकर महासभा परिसर में स्थित रमाबाई आंबेडकर सभागार में आरक्षण की प्रासंगिकता एवं डाॅ0 आंबेडकर विषय पर आयोजित सेमिनार को मुख्य अतिथि के रूप में सम्बोधित करते हुए सदस्य विधान परिषद तथा डाॅ0 आंबेडकर महासभा ट्रस्ट के अध्यक्ष डाॅ0 लालजी प्रसाद निर्मल के कहा है कि आरक्षण का उद्देश्य किसी को नुकसान पहुॅचाना नही बल्कि ऐतिहासिक अन्याय को सुधारना और समान अवसर सुनिश्चित करना है। डाॅ0 निर्मल का कथन था कि राजनैतिक लोकतंत्र तब तक अधूरा है जब तक सामाजिक लोकतंत्र स्थापित न हो जाए। आरक्षण इसी सामाजिक लोकतंत्र की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। जिसे समय के साथ परिष्कृत और उद्देश्यपूर्ण बनाए रखना होगा। डाॅ0 निर्मल ने कहा कि सामाजिक असमानता जब तक समाप्त न हो जाय तब तक आरक्षण को जारी रखना होगा।
महाबोधि सोसाइटी ऑफ इंडिया के कार्यकारणी सदस्य जय शंकर सहाय ने आरक्षण शब्द की जगह इसे प्रतिनिधित्व का अधिकार बताते हुए इसे लोकतंत्र की आधारशिला बताया जिसे बाबासाहब ने अपने सतत संघर्ष से पूना पैक्ट के माध्यम से क्रियान्वित कराया।
लखनऊ विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ कालीचरण स्नेही ने वर्तमान में दलितों के उत्पीड़न की अनेक घटनाओं का उल्लेख करते हुए आरक्षण को अनिवार्य बताया। उन्होंने कहा कि उच्च न्यायपालिका, उच्च शैक्षणिक संस्थानों, निजी क्षेत्र में दलितों के प्रतिनिधित्व की स्थिति लगभग नगण्य है इसलिए आरक्षण पर सवाल खड़ा करना उचित नहीं है ।
लोकपाल आर आर जैसवार ने कहा कि संविधान में आरक्षण का प्रावधान बाबासाहब के निरंतर संघर्ष का परिणाम है। आंबेडकर महासभा के प्रदेश अध्यक्ष प्रमोद सरोज ने बाबासाहब के योगदान पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर अमरनाथ प्रजापति, दिनेश कुमार आईडी यादव, रचना चन्द्रा, रामशंकर, जितेन्द्र वाल्मीकि, ऋतु दिवाकर रामचंद्र पटेल, सिद्धार्थ सोनकर, भंते प्रज्ञासार, रामधार राकेश , रामशंकर , नागेंद्र निराला, विजय कुमार , सिद्धार्थ सोनकर सहित भारी संख्या में लोग उपस्थित थे।
सेमिनार की अध्यक्षता प्रदेश अध्यक्ष प्रमोद सरोज तथा संचालन खुशीराम चौधरी ने किया ।
