एक मुखिया के तौर पर प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल के कैसे रहे 25 साल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार के मुखिया के तौर पर अपने 25 साल पूरे कर रहे हैं। 2001 में नरेंद्र मोदी ने अचानक ही शासन की मुख्य जिम्मेदारी संभाली थी। उस समय गुजरात में स्थानीय चुनावों में पार्टी को हार का सामना करना पड़ा था और कच्छ में आए भीषण भूकंप से निपटने में मुख्यमंत्री केशुभाई पटेल की सरकार का काम संतोषजनक नहीं था।
मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के कुछ ही महीनों बाद गोधरा ट्रेन अग्निकांड के बाद राज्य में दंगे भड़क उठे। 2002 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी की जीत ने उनकी स्थिति मजबूत कर दी और जब उन्होंने अपना गवर्नेंस एजेंडा लागू करना शुरू किया तो पार्टी के भीतर उनके विरोधी हाशिए पर चले गए।
अक्टूबर 2001-मई 2014 तक गुजरात के सीएम
गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर पीएम मोदी की उलब्धियों को अगर देखें तो कच्छ को फिर से बसाया गया। 2003 में गुजरात ने भारत का पहला राज्य आपदा प्रबंधन कानून पास किया।
अपनी ताकत दिखाने और निवेशकों को आकर्षित करने के लिए 2003 में वाइब्रेंट गुजरात समिट शुरू की गई।
2006 में शुरू की गई ज्योतिग्राम योजना में गांवों को सस्ती लेकिन अनियमित बिजली के बजाय भरोसेमंद बिजली सप्लाई को प्राथमिकता दी गई।
जल्द ही सभी 18,000 गांवों में भरोसेमंद थ्री-फेज बिजली पहुंचने लगी। साथ ही खेती से अलग आर्थिक गतिविधियां बढ़ीं और सब्सिडी लगभग आधी कर दी गई।
2007 में शुरू की गई सागरखेड़ू सर्वांगी विकास योजना ने तटीय समुदायों के लिए नतीजे-केंद्रित मिशन अपनाया, जिसमें बुनियादी ढांचा, आजीविका, सिंचाई, खारेपन पर नियंत्रण, तटीय सुरक्षा और मछली पालन का विकास शामिल था।
2009 में शुरू किए गए गरीब कल्याण मेला ने नागरिकों तक कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाया।
चेक डैम, खेत के तालाब, रिचार्ज कुएं, नहरें और इंटर-बेसिन ट्रांसफर की योजना बनाई गई थी। बाढ़ का अतिरिक्त पानी 332 किलोमीटर लंबी नहरों के जरिए ले जाया गया और नर्मदा का पानी सौराष्ट्र के जलाशयों तक पहुंचा, जिससे 10 लाख एकड़ से ज्यादा जमीन पर सिंचाई की क्षमता तैयार हुई।
2017 की एक सीएजी रिपोर्ट में बताया गया कि भूजल रिचार्ज 2002 के स्तर से लगभग 50% ज्यादा था। उनकी सरकार ने बंदरगाहों को बिजली, सड़कों, रेल और औद्योगिक क्षेत्रों से जोड़ा। मुंद्रा, हजीरा और पिपावाव बड़े निजी बंदरगाह बन गए।
बीजेपी के बड़े नेताओं ने जून 2013 में मोदी को 2014 के चुनावों के लिए अपनी कैंपेन कमेटी का प्रमुख बनाया और जल्द ही उन्हें प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया। जब 16 मई को नतीजे घोषित हुए तो बीजेपी की सीटें दोगुनी से ज्यादा होकर 282 हो गईं। यह 545 सदस्यों वाली लोकसभा में पार्टी को मिला पहला बहुमत था। यह 1984 के बाद पहली बहुमत वाली सरकार थी।
प्रधानमंत्री के तौर पर पीएम मोदी का पहला कार्यकाल
उनकी सरकार ने जन धन योजना शुरू की, जिसके तहत 59 करोड़ खाते खोले गए और उनमें 3.1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा जमा हुए। इनमें से 33 करोड़ खाते महिलाओं के नाम पर थे। इससे डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) शुरू करने और कल्याणकारी योजनाओं के लाभ पहुंचाने के तरीके को बदलने में मदद मिली। अगस्त 2026 तक डीबीटी के जरिए 320 योजनाओं और 56 मंत्रालयों के तहत 53.2 लाख करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए।
15 अगस्त को लाल किले पर अपने भाषण में पीएम मोदी ने शौचालय न होने की वजह से महिलाओं को होने वाली परेशानियों का जिक्र किया और एक स्वच्छता अभियान शुरू करने की घोषणा की। स्वच्छ भारत मिशन शुरू किया गया। 2016 में शुरू की गई पीएम उज्ज्वला योजना के तहत मई 2026 तक गरीब परिवारों की महिलाओं को 10.5 करोड़ मुफ्त एलपीजी कनेक्शन दिए गए।
उनकी सरकार ने सामाजिक सुरक्षा का दायरा बढ़ाया, जिसमें आयुष्मान भारत के तहत गरीबों के लिए मुफ्त इलाज भी शामिल था। सरकारी अनुमानों के मुताबिक, 2025 तक 94.3 करोड़ भारतीय किसी न किसी तरह की सोशल सिक्योरिटी के दायरे में आ गए थे। यह संख्या 2015 में 19% थी जो बढ़कर 64% हो गई।
जुलाई 2017 में जीएसटी लागू किया गया, जिसे प्रधानमंत्री ने भारत के आर्थिक एकीकरण के तौर पर सराहा, क्योंकि इससे टैक्स से जुड़ी सीमाएं खत्म हो गईं और पूरा बाजार एक हो गया।
पीएम के तौर पर दूसरा कार्यकाल
इस कार्यकाल के दौरान उन्होंने शायद अपने सबसे अहम राजनीतिक फैसले लिए। अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू-कश्मीर को मिले विशेष संवैधानिक दर्जे को खत्म किया, राज्य का दर्जा घटाकर उसे केंद्र-शासित प्रदेश (UT) बनाया और लद्दाख को अलग केंद्र-शासित प्रदेश बनाया।
सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले ने अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण का रास्ता साफ कर दिया। जनवरी 2024 में मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा की गई।
2019 में सीएए पास किया गया, जिससे पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए प्रताड़ित गैर-मुस्लिम समुदायों के लिए नागरिकता पाने का रास्ता खुला।
कोविड महामारी और लॉकडाउन ने सरकार की परीक्षा ली। उस समय भारत में बहुत से लोगों की जान गई। देश में बनी वैक्सीन का उत्पादन बढ़ाने और दुनिया के सबसे बड़े वैक्सीनेशन अभियान से मदद मिली।
सरकार ने आत्मनिर्भर भारत प्रोग्राम शुरू किया। इसी दौरान यूपीआई का इस्तेमाल तेज़ी से बढ़ा और यह एक बड़ी कामयाबी बन गया।
2024 की जीत
2024 के चुनावों में बीजेपी पूरे आत्मविश्वास के साथ उतरी थी, लेकिन उसे तब झटका लगा जब वोटरों के एक वर्ग ने उसके अबकी बार 400 पार वाले नारे को पसंद नहीं किया।
हालांकि, अपने सहयोगियों के साथ मिलकर उसने बहुमत हासिल कर लिया, भले ही एक दशक बाद उसने अपना खुद का बहुमत खो दिया।
सेमीकंडक्टर, स्टार्टअप और आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना अब भी मुख्य फोकस बना हुआ है।
सरकार ने वैश्विक चुनौतियों से निपटने की अपनी क्षमता पर जोर देने के लिए भारत की तेज विकास दर का हवाला दिया।
सुरक्षा बलों ने नक्सलवाद को लगभग खत्म कर दिया है। इसे पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भारत के लिए सबसे बड़ा आंतरिक खतरा बताया था और इस सफलता ने बीजेपी के राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंडे को मजबूत किया है।
पहलगाम हमले के बाद मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान में मौजूद आतंकवादियों के ठिकानों को निशाना बनाया गया।




