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बाढ़ प्रभावित इलाकों में सफाई अभियान तेज, योगी सरकार का जलनिकासी और स्वास्थ्य सुरक्षा पर जोर

बाढ़ का पानी उतरते ही एक्शन में लखनऊ नगर निगम, 70 एकड़ में ड्रोन से एंटी लार्वा का छिड़काव

जीआईएस मैपिंग के आधार पर जोन-3 और जोन-6 में सेक्टरवार कार्ययोजना तैयार

नालियों की सफाई, कीचड़ हटाने और जलनिकासी व्यवस्था सुधारने पर जोर

ब्लीचिंग पाउडर, चूने और एंटी लार्वा के छिड़काव से मच्छरजनित बीमारियों पर नियंत्रण की तैयारी

लखनऊ। योगी सरकार बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जनजीवन सामान्य बनाने और लोगों को संक्रामक व मच्छरजनित बीमारियों से बचाने के लिए राहत एवं स्वच्छता संबंधी कार्यों पर जोर दे रही है। इसी क्रम में लखनऊ नगर निगम ने बाढ़ का पानी उतरने के साथ ही प्रभावित इलाकों में सफाई, जलनिकासी और स्वास्थ्य सुरक्षा के कार्य तेज करने की तैयारी शुरू कर दी है। नगर आयुक्त गौरव कुमार ने जोन-3 के जोनल कार्यालय में अपर नगर आयुक्त अरुण कुमार गुप्त और संबंधित अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर अभियान को तत्काल गति देने के निर्देश दिए।

बैठक में जोन-3 और जोन-6 के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जलस्तर कम होने के बाद किए जाने वाले कार्यों की समीक्षा की गई। नगर आयुक्त ने निर्देश दिए कि जिन इलाकों से पानी उतर चुका है, वहां मड पंप लगाकर डीसिल्टिंग और सफाई कराई जाए। ताकि ताकि प्रभावित गलियों और नालियों से जमा मिट्टी, कीचड़ और गंदगी को हटाया जा सके।

जीआईएस मैपिंग से तैयार हुई सेक्टरवार कार्ययोजना

बाढ़ प्रभावित इलाकों में सफाई अभियान को व्यवस्थित और प्रभावी बनाने के लिए नगर निगम ने जीआईएस मैपिंग के आधार पर कार्ययोजना तैयार की है। प्रभावित क्षेत्रों को अलग-अलग सेक्टरों में बांटकर प्रत्येक सेक्टर के लिए प्रभारी नियुक्त किए गए हैं। इंजीनियरिंग, स्वास्थ्य और जलकल विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों की तैनाती के साथ गलीवार सुपरवाइजरों की जिम्मेदारी भी तय की गई है। इससे विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित करने और कार्यों की नियमित निगरानी में मदद मिलेगी।

400 से 500 अतिरिक्त सफाई कर्मचारियों लगाए जा रहे

बड़े पैमाने पर सफाई अभियान संचालित करने के लिए नगर निगम के अन्य जोनों से भी अतिरिक्त मानवबल बुलाया जाएगा। बैठक में एलएसए और एलएसजी से कर्मचारियों की तैनाती के निर्देश दिए गए। प्रारंभिक आकलन के अनुसार प्रभावित क्षेत्रों में सफाई कार्यों के लिए करीब 400 से 500 अतिरिक्त कर्मचारियों की आवश्यकता है। संबंधित एजेंसियों को आवश्यक मानवबल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। जलस्तर कम होने के अनुसार अलग-अलग क्षेत्रों में चरणबद्ध तरीके से अभियान चलाया जाएगा।

70 एकड़ क्षेत्र में ड्रोन से एंटी लार्वा का छिड़काव

जलभराव के बाद मच्छरों के प्रजनन और मच्छरजनित बीमारियों की आशंका को कम करने के लिए नगर निगम एंटी लार्वा का छिड़काव करा रहा है। जोन-3 और जोन-6 में कुल 70 एकड़ क्षेत्र में ड्रोन के माध्यम से दवा का छिड़काव किया गया है।

जोन-3 के फैजुल्लागंज में 44 एकड़ क्षेत्र में ड्रोन से एंटी लार्वा का छिड़काव कराया गया। घैला रोड पर टैंकर से भी दवा का छिड़काव किया गया। दाउदनगर की 60 फीट रोड पर सोडियम हाइपोक्लोराइट और ब्लीचिंग का छिड़काव करने के साथ सफाई तथा झाड़ियों की कटाई कराई गई। गणेश बाग, सन्मंत विहार और मिल्लत नगर में भी ड्रोन से दवा का छिड़काव किया गया। मामा कॉलोनी और पुराने दाउदनगर में पानी उतरने के बाद सूख चुकी गलियों में ब्लीचिंग का छिड़काव, नालियों की सफाई और झाड़ियों की कटाई कराई गई।

जोन-6 में भी स्वच्छता और जलनिकासी पर जोर

जोन-6 के सैथा में 18 एकड़ और हयात नगर में 8 एकड़ क्षेत्र में ड्रोन से एंटी लार्वा का छिड़काव कराया गया। इस प्रकार जोन-6 में कुल 26 एकड़ क्षेत्र को कवर किया गया।

हयात नगर, सैथा, टांड़खेड़ा और दौलतखेड़ा में जलभराव वाले क्षेत्रों तथा पानी के किनारे ब्लीचिंग पाउडर, चूने और एंटी लार्वा का छिड़काव किया गया। हरि नगर और मिश्री की बगिया में भी सफाई एवं स्वास्थ्य सुरक्षा संबंधी कार्य कराए गए। हयात नगर और दौलतखेड़ा में सड़क किनारे की नालियों की सफाई कर जलनिकासी व्यवस्था सुधारने पर जोर दिया गया।

जलभराव के बाद स्वच्छता और स्वास्थ्य सुरक्षा पर विशेष ध्यान

बाढ़ का पानी उतरने के बाद प्रभावित क्षेत्रों में जमा गंदगी, कीचड़ और मच्छरों के प्रजनन की आशंका को देखते हुए नगर निगम द्वारा सफाई एवं स्वास्थ्य सुरक्षा संबंधी कार्यों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। एंटी लार्वा छिड़काव के साथ ब्लीचिंग पाउडर, चूने और सोडियम हाइपोक्लोराइट का प्रयोग किया जा रहा है। वहीं, नालियों की सफाई और झाड़ियों की कटाई के माध्यम से प्रभावित इलाकों को स्वच्छ बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। नगर निगम की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति के अनुसार कार्य कर रही हैं, ताकि बाढ़ के बाद स्वच्छता बनाए रखने और मच्छरजनित बीमारियों की आशंका कम करने में सहायता मिल सके।

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