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कैंसर की दवाओं पर 2019 में 30 प्रतिशत था मार्जिन कैप, अब 700 प्रतिशत तक पहुंचा

फरवरी 2019 में नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) ने कुछ दवाओं की बिक्री कीमत पर 30 प्रतिशत का ट्रेड मार्जिन कैप (सीमा) तय किया था। इन दवाओं पर लगे मार्क-अप पर नजर डालने से पता चलता है कि अथॉरिटी की 2026 की सूची में शामिल ज्यादातर दवाओं पर 100 प्रतिसत से 700 प्रतिशत तक का मार्क-अप था। इस डेटा का हवाला देते हुए सस्ती दवाओं की उपलब्धता के लिए काम करने वाले ऑल-इंडिया ड्रग एक्शन नेटवर्क ने बताया कि अगर मार्जिन कैप को स्थायी रूप से लागू करने और लगातार निगरानी रखने की कोई व्यवस्था न हो तो सिर्फ एक बार एमआरपी कम करने की नीति का कोई खास फायदा नहीं है।

कितना अंतर पाया गया?

एनपीपीए ने कैंसर-रोधी दवाओं की जो सूची जारी की है और जिसमें ट्रेड मार्जिन घटाने की बात कही गई है, उसमें कुल 137 दवाएं शामिल हैं। इनमें से 34 दवाएं ऐसी हैं जो 2019 में एनपीपीए द्वारा जारी 42 कैंसर-रोधी दवाओं की सूची में भी थीं। हालांकि, एनपीपीए द्वारा हाल ही में जारी की गई सूची और जिसमें एमआरपी में भारी कमी दिखाई गई है, उससे पता चलता है कि 2019 की सूची में शामिल अधिकांश दवाएं जो 2026 की सूची में भी हैं, उन्होंने 43 प्रतिशत मार्क-अप के स्तर को पार कर लिया है। यह स्तर 30 प्रतिशत ट्रेड मार्जिन के बराबर है, क्योंकि जहां मार्जिन की गणना अंतिम एमआरपी के प्रतिशत के रूप में की जाती है, वहीं मार्क-अप की गणना स्टॉकिस्ट को दी जाने वाली कीमत के प्रतिशत के रूप में की जाती है।

2019 से 2026 में कितना अंतर

हालिया आदेश से पहले 2026 में मार्क-अप 2019 के आदेश से पहले के स्तर से भी अधिक था। इसलिए, सात साल पहले की तुलना में अब ज्यादातर मामलों में कीमतों में प्रतिशत के हिसाब से कमी भी काफी ज्यादा है। हालांकि, जिन दवाओं की एमआरपी में 2019 में बहुत भारी कटौती की गई थी, उनके मामले में 2026 में प्रतिशत के हिसाब से कमी कम है। उदाहरण के लिए, कैंसर-रोधी दवा पेमेट्रेक्सेड के एक ब्रांड की एमआरपी 2019 में 7,000 रुपये से घटकर 800 रुपये हो गई थी। हाल ही में हुई एमआरपी कटौती में यह 1,095 रुपये से घटकर 297 रुपये हो गई है, जो 2019 की तुलना में काफी कम कटौती है। कई बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने जिन्होंने 2019 में एमआरपी में काफी कमी की थी, इस बार बहुत कम या बिल्कुल भी कमी नहीं की है। वहीं, कुछ मूल कंपनियों जिनके पास शुरू में दवा का पेटेंट था, उन्होंने दोनों ही मौकों पर एमआरपी में कोई खास कटौती नहीं की। 2019 की सूची में शामिल ब्रांडों में से केवल पांच का मार्क-अप, नवीनतम आदेश से पहले 43 प्रतिशत था, जबकि अन्य चार का मार्क-अप 43 प्रतिशत से 100% के बीच था। बाकी 39 ब्रांडों का मार्क-अप 100 प्रतिशत से लेकर 700 प्रतिशत से भी अधिक था। AIDAN की मालिनी ऐसोला ने कहा, “एनपीपीए इसे ट्रेड मार्जिन कैपिंग कह रहा है, जैसा कि उन्होंने 2019 में भी कहा था। यह गुमराह करने वाला है क्योंकि यह कोई कैप (सीमा) नहीं है। यह बस मार्क-अप को सीमित करके एमआरपी में एक बार की गई कटौती है।” उन्होंने आगे कहा कि यह मार्क-अप को दोबारा बढ़ने से रोकने के लिए काफी नहीं होगा, जैसा कि 2019 के बाद हुआ था।

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