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तीसरी लहर आने का रिस्क बेहद कम: एक्सपर्ट

नई दिल्ली. देश में कोरोना की दूसरी लहर ने कुछ महीने पहले जबरदस्त कोहराम मचाया था. दूसरी लहर अब भी देश से गई नहीं है और दक्षिण भारतीय राज्य केरल में इसका भीषण प्रकोप है. देश में दूसरी लहर का कारण डेल्टा वैरिएंट था. दूसरी लहर की विभीषिका के बाद से ही लोगों में तीसरी लहर का खौफ और आशंकाएं पैदा हो गई थीं. अब संक्रामक रोगों की एक्सपर्ट डॉ. गगनदीप कांग ने कहा है कि अगर कोई नया वैरिएंट नहीं आता तो तीसरी लहर के आने का रिस्क कम है. अगर कोरोना के केस बढ़े भी तो दूसरी लहर जैसे प्रचंड नहीं होंगे.

वहीं बच्चों के वैक्सीनेशन को लेकर गगनदीप कांग ने कहा है कि भारत को इसके लिए अपने डेटा पर भरोसा करना चाहिए. उन्होंने कहा कि बहुत कम ऐसे अध्ययन हुए हैं जिनमें बताया गया है कि कितने बच्चे कोरोना से संक्रमित हुए और इनमें से कितने केस गंभीर हुए.
बता दें कि अमेरिका, इजरायल और कुछ अन्य यूरोपीय देशों ने अपने यहां बच्चों के वैक्सीनेशन की प्रक्रिया शुरू कर दी है. लेकिन ब्रिटेन के एडवायजरी पैनल ने ऐसा करने से मना कर दिया है. भारत के लिए गगनदीप कांग ने कहा है कि हमें हमारे डेटा पर भरोसा करना चाहिए. हमारे बच्चों पर निर्णय लेने के लिए सही डेटा हमारे पास होना चाहिए.

भारत में बच्‍चों की चार वैक्‍सीन के ट्रायल को मंजूरी दी गई है
1- जायडस कैडिला की वैक्सीन जायकोव-डी को भारत में इमरजेंसी इस्तेमाल की मंजूरी मिल गई है. इस वैक्‍सीन का इस्‍तेमाल 12 से 18 साल के बच्‍चों पर ही किया जा सकता हैसीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया की COVOVAX के दूसरे/तीसरे चरण का ट्रायल चल रहा है. इस वैक्‍सीन को 2 से 17 साल तक के बच्‍चों को दिया जा सकेगा.भारत बायोटेक की कोवैक्सीन के दूसरे/तीसरे फेज के ट्रायल को मंजूरी मिल चुकी है. बच्‍चों के लिए तैयार हो रही कोवैक्सीन का इस्‍तेमाल 2 से 18 साल के बच्‍चों पर किया जा सकेगा.- बायोलॉजिकल ई लिमिटेड को कुछ शर्तों के साथ 5 से 18 वर्ष की उम्र के बच्चों पर कोविड-19 वैक्‍सीन कोर्बेवैक्स के दूसरे और तीसरे चरण के क्लीनिकल ट्रायल की मंजूरी मिली है.

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