मेरठ महायोजना-2031 से न केवल शहर बल्कि गांव के विकास को भी पंख लगेंगे। सरधना, मवाना, बहसूमा, हस्तिनापुर समेत नौ नगरीय क्षेत्र इसमें शामिल किए गए हैं। इसी के साथ गांव में औद्योगिक क्लस्टर बनाए जाएंगे। महायोजना के अंतर्गत मुजफ्फरपुर सैनी और फिटकरी गांव में इंडस्ट्रियल क्लस्टर बनाए जाने हैं, जिसके लिए प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जहां 2021 में महायोजना करीब 500 वर्ग किमी. की थी तो वहीं अब यह 1043 वर्ग किमी. की हो गई है। ऐसे में मेडा अब देहात में औद्योगिक कैंप तथा व्यावसायिक निर्माण की जानकारी के लिए कैंप लगाएगा। वहीं सरधना, मवाना, हस्तिनापुर आदि के लिए विशेष पर्यटन नीति भी मेडा तैयार करेगा।
मेरठ विकास प्राधिकरण की सीमा में अब 305 नए गांवों को शामिल कर लिया गया है। इससे जहां गांव देहात का हुनर निखरेगा तो वहीं आर्थिक स्वावलंबन भी आएगा। मेरठ में लावड़ आर्टिफिशियल ज्वेलरी का बड़ा गढ़ है। यहां से दिल्ली समेत पूरे उत्तर भारत में आर्टिफिशियल ज्वेलरी पहुंचती है। ऐसे ही सरधना और मवाना में कई गांवों में फुटबॉल-ग्लव्स और क्रिकेट बॉल बनाने तथा क्रिकेट बैट की हैंड ग्रिप को चढ़ाने का काम बड़े पैमाने पर होता है।
मेरठ में कैंची क्लस्टर के लिए लोहियानगर में जमीन दी गई थी, जिसमें एक ही व्यक्ति ने प्लॉट लिया। ऐसे में गांव के लोगों को गांव के अंदर ही रोजगार मिले, इसके लिए औद्योगिक क्लस्टर मेडा तैयार करेगा। इसी के साथ सरधना में बेगम समरू का चर्च और हस्तिनापुर में जैन मंदिरों को देखने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं। इसके लिए भी मेडा विशेष पर्यटन नीति तैयार करेगा।
दूसरी ओर परतापुर और मोदीपुरम में स्पेशल डेवलपमेंट एरिया (एसडीए) प्रस्तावित है। परतापुर-भूड़बराल में यह 288.79 हेक्टेयर और मोदीपुरम में 457.06 हेक्टेयर में यह बनेंगे। इसके लिए पहले फेज के तहत परतापुर-भूड़बराल में नई टाउनशिप के लिए 177 किसान भी रजामंद हो गए हैं। मेडा ने लोगों से आपत्ति भी मांगी, जिसके बाद मेडा जल्द ही समझौते के साथ इनसे जमीन खरीदेगा।
गांव की भी बदलेगी तस्वीर, होगा विकास
महायोजना में शहर के साथ ही देहात के विकास का भी ध्यान रखा गया है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों में औद्योगिक क्लस्टर स्थापित होंगे जिससे ग्रामीणों को वहीं रोजगार उपलब्ध होगा। पर्यटन पर भी काम होगा जिसके लिए मेडा इसी महीने से कैंप लगाएगा। – अभिषेक पांडेय, उपाध्यक्ष मेडा
रैपिड से मिलेगी शहर को रफ्तार
रैपिड कॉरिडोर को एनसीआरटीसी के सुझाव पर मिश्रित भू-उपयोग की श्रेणी में रखा गया है। इन क्षेत्रों में मेडा नक्शा पास करेगा। 305 गांव और 9 नगरीय क्षेत्र शामिल हुए हैं, जिनमें विकास कार्य होंगे। जल्द ही बदलता हुआ मेरठ जमीन पर दिखेगा। – विजय कुमार सिंह, मुख्य नगर नियोजक, मेडा
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