देश के त्रुटिपूर्ण और गलत नक्शों के प्रकाशन के बढ़ते मामलों को देखते हुए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने सभी विश्वविद्यालयों और कालेजों को सतर्क करते हुए कहा है कि वे सिर्फ भारतीय सर्वेक्षण विभाग की ओर से तैयार देश के नक्शों का ही उपयोग करें।
साथ ही बताया है कि देश के गलत नक्शों का प्रकाशन कानूनी अपराध है। ऐसा करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का भी प्रविधान है।यूजीसी ने यह निर्देश ऐसे समय दिया है, जब विश्वविद्यालयों में नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने वाला है। जिसके लिए इस समय नई पाठ्यपुस्तकें और अध्ययन सामग्री तैयार की जाती है।
भारतीय सर्वेक्षण विभाग का भारतीय नक्शा करें इस्तेमाल
ऐसे में आयोग ने देश के सभी विश्वविद्यालयों और कालेजों के प्रमुखों को पत्र लिखकर देश के नक्शों में पूरी सावधानी रखने के निर्देश दिए है और कहा है कि वह देश के जो भी नक्शे इस्तेमाल करें यह सुनिश्चित करें कि वह भारतीय सर्वेक्षण विभाग ( सर्वे आफ इंडिया) के ही हो।
आयोग ने इस दौरान देश के नक्शों की गड़बड़ी को रोकने के लिए 1990 में बनाए गए क्रिमिनल ला एक्ट का हवाला दिया, जिसके तहत देश के त्रुटिपूर्ण नक्शों के प्रकाशन पर न्यूनतम छह महीने तक की कैद , जिसको बढ़ाया भी जा सकेगा के साथ जुर्माना दोनों का प्रविधान है। जो अलग-अलग या एक साथ ही सुनाई जा सकती है।
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