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शिक्षा, जागरूकता और एकता से ही आगे बढ़ेगा पासी समाज:  सूरज पासी

मदारी पासी की जयंती पर हरदोई में गरजे सूरज पासी, बोले- 25 फीट की प्रतिमा लगे

पासी समाज को एकजुट होकर अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना होगा: मदारी पासी की जयंती पर सूरज पासी

मदारी पासी के परिवार को मिले भारत रत्न, 24 अक्टूबर को सार्वजनिक अवकाश घोषित हो 

हरदोई। जननायक मदारी पासी की जयंती पर शनिवार को हरदोई के भरावन ब्लॉक में कार्यक्रम आयोजित हुआ। इस मौके पर लाखन आर्मी के संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरज पासी ने कहा कि मदारी पासी किसी एक जाति के नहीं, बल्कि सर्वसमाज के रक्षक और योद्धा थे। उनके विचारों को देशभर में प्रचारित किया जाना चाहिए।

उन्होंने मदारी पासी के नाम पर बन रहे पार्क को लेकर कहा कि उनके नाम पर इतना छोटा पार्क और छोटी प्रतिमा नहीं होनी चाहिए। उनकी कम से कम 20 से 25 फीट ऊंची प्रतिमा स्थापित की जानी चाहिए। उन्होंने मदारी पासी के परिवार को भारत रत्न से सम्मानित करने और 24 अक्टूबर को सरकारी अवकाश घोषित करने की भी मांग की।

सूरज पासी ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि मदारी पासी के एका आंदोलन को दबाने के लिए बड़ी-बड़ी ताकतें लग गई थीं। उस समय देश में असहयोग आंदोलन भी चल रहा था, लेकिन मदारी पासी का आंदोलन तेजी से बढ़ रहा था। लेकिन उनके आंदोलन को ब्रिटिश हुकुमत ने दबा दिया। उन्होंने कहा कि मदारी पासी के योगदान को वह सम्मान नहीं मिला, जिसके वे हकदार थे। उनके नाम पर हरदोई में बड़े स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए जाने चाहिए।

एकजुट नहीं हुए तो पासी समाज का शोषण होता रहेगा

सूरज पासी ने कहा कि पासी समाज के लोगों का लंबे समय तक शोषण किया गया। लोगों ने अपने काम के लिए समाज का इस्तेमाल किया और बाद में उन्हें छोड़ दिया। यदि समाज एकजुट नहीं हुआ तो शोषण जारी रहेगा। उन्होंने पासी समाज से शिक्षित बनने, नशामुक्त रहने, जागरूक होने और अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने की अपील की।

उन्होंने कहा कि पासी समाज को दीन-हीन बनाकर गुलाम बनाया गया। जो समाज कभी सनातन धर्म और देश की रक्षा करता था, वह आज अपनी सुरक्षा के लिए संघर्ष कर रहा है। उन्होंने समाज के भीतर भी एकजुटता की कमी पर सवाल उठाते हुए कहा कि कई बार पासी समाज के लोग ही दूसरे पासी को आगे बढ़ने से रोकते हैं। सूरज पासी ने बताया कि लाखन आर्मी प्रदेशभर में कार्यक्रम आयोजित कर रही है और महाराजा कंसा पासी को उनका उचित सम्मान दिलाने के लिए काम कर रही है। संगठन बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी को साथ लेकर चलने का प्रयास कर रहा है।

भारशिव पासियों और ऐतिहासिक राजाओं का किया उल्लेख

सूरज पासी ने अपने संबोधन में भरावन और भटपुर जैसे स्थानों के नामों का उल्लेख करते हुए भारशिव पासियों के इतिहास की चर्चा की। उन्होंने दावा किया कि प्राचीन काल में भर समुदाय को भारशिव कहा जाता था। उन्होंने राजा बीरसेन भारशिव पासी का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने 10 अश्वमेध यज्ञ किए और कुषाणों को चीन तक खदेड़कर शिव मंदिरों का पुनर्निर्माण कराया। उन्होंने राजा त्रिलोकचंद पासी को अर्कराज पासी की उपाधि मिलने का भी जिक्र किया।

धार्मिक पहचान और धर्मांतरण के मुद्दे पर भी बोले

सूरज पासी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली में हुए विरोध-प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा की टी-शर्ट को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने दावा किया कि ऐसी टी-शर्ट बांग्लादेश और नेपाल में भी पहनी गई थी और उसका संदेश संसद को जलाने तथा लोगों की दुकानें छीनने से जुड़ा था। उन्होंने फ्रांस में शरणार्थियों से जुड़े मामलों का उल्लेख करते हुए भी अपनी बात रखी।

धर्मांतरण के मुद्दे पर सूरज पासी ने एफसीआरए कानून और केरल में ईसाई आबादी का जिक्र किया। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि अंग्रेज आदिवासी समुदायों का विकास करना चाहते थे तो उन्हें हिंदू रहते हुए भी ऐसा किया जा सकता था, फिर उनका धर्मांतरण क्यों कराया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि धर्म के कुछ ठेकेदार लोगों की गरीबी का फायदा उठाते हैं। राम मंदिर निर्माण का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इसके निर्माण पर कुछ लोगों को आपत्ति होती है, जबकि जालंधर में करीब 2000 करोड़ रुपये की लागत से चर्च बनने पर विद्यालय और अस्पताल बनाने की मांग नहीं उठाई जाती।

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