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ईडी ने अनिल देशमुख को रोकने के लिएजारी किया लुक आउट नोटिस

नई दिल्ली: प्रवर्तन निदेशालय ने महाराष्ट्र के पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख के खिलाफ लुक आउट नोटिस जारी किया है. ईडी की तरफ से देशमुख को यह नोटिस 100 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जारी किया है. इसी मामले में नाम आने के बाद अनिल देशमुख ने अप्रैल में गृहमंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था. कहा जा रहा है कि ईडी को आशंका है कि अनिल देशमुख देश से बाहर जा सकते हैं ऐसे में उन्हें रोकने के लिए यह नोटिस जारी किया गया है.

बता दें कि इससे पहले प्रवर्तन निदेशालय ने पूर्व गृहमंत्री को कई बार समन जारी किया था लेकिन वह एक बार भी ईडी के सामने प्रस्तुत नहीं हुए . उन्होंने ईडी को जवाब देते हुए कहा था कि जब तक मामला कोर्ट में है वह उन्हें प्रस्तुत होने के लिए बाध्य न करें. बता दें कि अनिल देशमुख और कई अन्य पर भ्रष्टाचार के कई आरोपों के बाद ईडी ने देशमुख पर मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया था.

इससे पहले महाराष्ट्र के पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख ने अपने खिलाफ दर्ज धनशोधन मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा जारी समन के खिलाफ बृहस्पतिवार को बंबई उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर उसे रद्द किए जाने और जांच का जिम्मा मुंबई के बाहर के ईडी के अधिकारियों की एसाआईटी को सौंपने का अनुरोध किया.

उन्होंने अदालत से यह भी अनुरोध किया कि उनके बयान डिजिटल तरीके से दर्ज किए जाएं. न्यायमूर्ति रेवती मोहिते डेरे की एकल पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए देशमुख की याचिका आयी, लेकिन उन्होंने बिना कोई कारण बताए खुद को सुनवाई से अलग कर लिया. उन्होंने कहा कि सुनवाई के लिए इसे मेरी पीठ के समक्ष नहीं रखें. अब याचिका पर दूसरी पीठ सुनवाई करेगी.
देशमुख ने अपनी याचिका में अनुरोध किया कि उच्च न्यायालय केंद्रीय एजेंसी द्वारा समय-समय पर उन्हें जारी किए गए समन को रद्द करे. राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के नेता ने अपनी याचिका में उच्च न्यायालय से ईडी को डिजिटल माध्यम से उनका बयान दर्ज करने और सभी प्रासंगिक दस्तावेज जमा करने का निर्देश देने का भी अनुरोध किया.

उन्होंने मामले की जांच मुंबई अंचल कार्यालय के बाहर ईडी अधिकारियों के एक विशेष जांच दल (एसआईटी) को सौंपने का निर्देश देने का भी अनुरोध किया. केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा भ्रष्टाचार और आधिकारिक पद का दुरुपयोग करने के मामले में 21 अप्रैल को देशमुख के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के बाद ईडी ने पूर्व मंत्री और उनके साथियों के खिलाफ जांच शुरू की थी.

ईडी के अनुसार राज्य के गृह मंत्री के रूप में सेवा देते हुए देशमुख ने कथित तौर पर अपने पद का दुरुपयोग किया और बर्खास्त पुलिस अधिकारी सचिन वाजे के जरिए मुंबई में विभिन्न ‘बार’ और रेस्तरां से 4.70 करोड़ रुपये एकत्र किए.

देशमुख के परिवार द्वारा नियंत्रित नागपुर स्थित एक शैक्षिक ट्रस्ट, ‘श्री साईं शिक्षण संस्थान’ में इस पैसे का कथित तौर पर इस्तेमाल किया गया. ईडी मामले में पूछताछ के लिए अब तक पांच बार देशमुख को समन भेज चुकी है. हालांकि देशमुख इनमें से किसी समन पर पेश नहीं हुए.

देशमुख ने समन के खिलाफ राहत मांगने और गिरफ्तारी से संरक्षण के लिए पिछले महीने उच्चतम न्यायालय का भी रुख किया था, लेकिन शीर्ष अदालत ने उन्हें राहत देने से इनकार कर दिया था. इसके बाद उन्होंने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की.

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